उत्तराखंड के पर्वतीय मार्गों पर छुट्टियों और धार्मिक यात्रा के भारी दबाव के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। चमोली जिले से गुजरने वाले बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार को अभूतपूर्व जाम की स्थिति बन गई, जिसके चलते हजारों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को घंटों तक सड़क पर ही फंसे रहना पड़ा। तीन दिनों के लंबे सप्ताहांत का लाभ उठाने के लिए दिल्ली-एनसीआर सहित मैदानी इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। इस अत्यधिक दबाव के बीच सुबह से शुरू हुई वाहनों की कतारें देर रात तक जस की तस बनी रहीं, जिससे घने अंधेरे में पहाड़ियों के बीच केवल जलती-बुझती गाड़ियों की हेडलाइट्स और बैकलाइट्स ही दिखाई दे रही थीं।
जोशीमठ से विष्णुप्रयाग तक 12 किलोमीटर में पसरा महाजाम
इस यातायात संकट का विस्तार इतना विशाल था कि जोशीमठ से आगे लगभग 11 से 12 किलोमीटर के पूरे दायरे में गाड़ियां फंसी रहीं। जोशीमठ के मुख्य बाजार से लेकर नरसिंह मंदिर, जीरो बैंड, मारवाड़ी, मारवाड़ी पुल, विष्णुप्रयाग और बलदूड़ा पुल तक केवल वाहनों की अंतहीन कतारें ही खड़ी दिखाई दीं। संकरे और घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर दोपहिया और चार पहिया वाहन एक-दूसरे के पीछे अटके रहे और स्थिति ऐसी थी कि वाहन बमुश्किल कुछ कदम ही आगे बढ़ पा रहे थे। हरिद्वार, ऋषिकेश और रुद्रप्रयाग से तड़के अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए श्रद्धालु दिनभर के थकाऊ सफर के बाद रात तक केवल जोशीमठ ही पहुंच सके और वहां पहुंचते ही वे इस भीषण गतिरोध में उलझ गए।
बरसात का मलबा और संकरी सड़कें बनीं बड़ी रुकावट
सड़क पर घंटों से अटके यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि इस स्थिति के पीछे मुख्य वजह हालिया बारिश के बाद सड़क किनारे जमा हुआ मलबा है। मानसून के दौरान पहाड़ी ढलानों से आया यह मलबा अब तक पूरी तरह साफ नहीं किया जा सका है, जिसके कारण राष्ट्रीय राजमार्ग कई संवेदनशील स्थानों पर बहुत अधिक संकरा हो चुका है। जब भी दोनों दिशाओं से आने वाले वाहनों का प्रवाह बढ़ता है, तो संकरा रास्ता तुरंत चोक हो जाता है और देखते ही देखते महाजाम लग जाता है। स्थानीय निवासी संजय और यात्री शीतल ने इस प्रशासनिक विफलता पर गहरा रोष जताया और कहा कि समय रहते मलबे की सफाई न होने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
पितृपक्ष के तर्पण और वीकेंड की भीड़ का दोहरा दबाव
यातायात के इस अप्रत्याशित दबाव के पीछे धार्मिक और मौसमी दोनों ही कारक जिम्मेदार हैं। वर्तमान समय में पितृपक्ष चल रहा है, जिसके चलते बदरीनाथ धाम में अपने पूर्वजों के तर्पण और पिंडदान के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का भारी हुजूम पहुंच रहा है। इसके साथ ही तीन दिन की लगातार छुट्टियों ने पर्यटकों के प्रवाह को भी कई गुना बढ़ा दिया। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने आगाह किया है कि यदि प्रशासन ने तुरंत प्रभावी कदम उठाकर सड़क से मलबा नहीं हटाया और यातायात के सुचारु संचालन के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो आने वाले दिनों में यह संकट और विकराल रूप धारण कर सकता है।





















