नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में दूषित पेयजल आपूर्ति की वजह से जल जनित बीमारियों का भयंकर प्रकोप देखने को मिल रहा है। बीते दो सप्ताह से इलाके में गंदे पानी की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण गांव-गांव में उल्टी, दस्त, तेज बुखार और पीलिया (जॉन्डिस) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस स्थिति के चलते नैनीताल के प्रसिद्ध बीडी पांडे जिला अस्पताल में मरीजों का तांता लगा हुआ है और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
बीडी पांडे जिला अस्पताल में मरीजों की उमड़ी भीड़
दूषित पानी के कारण बीमार पड़े लोगों का असर बीडी पांडे जिला अस्पताल में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज पीलिया और पेट में संक्रमण की गंभीर शिकायतें लेकर आ रहे हैं। इनमें से अत्यधिक गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तुरंत भर्ती किया जा रहा है। रोजाना औसतन 5 से 6 नए मरीजों को अस्पताल के वार्डों में एडमिट करना पड़ रहा है।
फिलहाल बीडी पांडे अस्पताल में करीब 25 पीलिया पीड़ित मरीजों का इलाज चल रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भर्ती मरीजों में से लगभग 90 प्रतिशत लोग अकेले ज्योलीकोट और उसके निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी हैं। इतने बड़े पैमाने पर एक ही क्षेत्र से आ रहे मामलों से स्पष्ट होता है कि उस इलाके की पेयजल लाइन में बड़ा संक्रमण फैल चुका है।
स्वास्थ्य विभाग का एक्शन, मेडिकल कैंप और क्लोरीनेशन शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रश्मि पंत ने स्वास्थ्य महकमे को तुरंत सक्रिय होने के निर्देश दिए हैं। बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावित गांवों में विशेष मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं। हाल ही में चलाए गए अभियान के दौरान छीड़ा-वीरभट्टी में आयोजित कैंप में 17 लोगों की जांच की गई, जबकि ज्योलीकोट में लगे कैंप में 9 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
इसके अतिरिक्त, ज्योलीकोट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में भी 43 मरीज अपनी जांच कराने पहुंचे, जहां डॉक्टरों द्वारा उन्हें आवश्यक दवाएं और परामर्श दिया गया। सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने चिकित्सा टीमों को क्षेत्र में लगातार कैंप आयोजित करने और स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने की सख्त ताकीद की है। इसके साथ ही, पानी को पूरी तरह जीवाणु मुक्त करने के उद्देश्य से गांव की सभी पेयजल टंकियों की सफाई और सघन क्लोरीनेशन का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।
मौसम और बीमारियों पर चिकित्सकों की राय
बीडी पांडे अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एमएस दुग्ताल ने बताया कि बारिश और उमस से भरे मौसम में जल जनित बीमारियों जैसे टाइफाइड, पीलिया (हेपेटाइटिस) तथा डायरिया का प्रकोप अत्यधिक बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आ रहे ज्यादातर मरीजों में यही लक्षण देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टरों ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराने के बजाय पूरी सतर्कता बरतें और अपने खान-पान में विशेष सावधानी रखें।
बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक डॉक्टरी सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को संक्रमण से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है
- पानी को उबालकर पिएं: जब तक नल का पानी पूरी तरह से साफ और सुरक्षित घोषित न हो जाए, तब तक पानी को अच्छी तरह उबालकर और ठंडा करके ही उपयोग में लाएं।
- हाथों की नियमित सफाई: भोजन करने से पूर्व और शौच के पश्चात हाथों को साबुन व साफ पानी से अच्छे से अवश्य धोएं।
- बाहरी खाद्य पदार्थों से बचें: खुले में बिकने वाले कटे हुए फल, स्ट्रीट फूड और खुले में तैयार पेय पदार्थों के सेवन से पूरी तरह परहेज करें।
- लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं: यदि आंखें या त्वचा पीली दिखाई दें, पेशाब का रंग गहरा पीला हो, भूख न लगे, उल्टी आए या अत्यधिक कमजोरी और बुखार महसूस हो, तो मनमाने ढंग से दवा लेने के स्थान पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लें।



















