पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है, जहां भारतीय जनता पार्टी की नेता और पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने ममता बनर्जी के मौजूदा राजनीतिक रुख और हाल के फैसलों को उनकी हताशा का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि कभी खुद की तुलना रॉयल बंगाल टाइगर से करने वाली नेता की राजनीतिक जमीन अब खिसक चुकी है और उनके पास कोई ठोस आधार नहीं बचा है।
लोकतंत्र बचाओ रैली और देशव्यापी अभियानों का संदर्भ
कोलकाता में आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली के दौरान पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों पर विस्तार से बात की गई। इस आयोजन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की भागीदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की गतिविधियां केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में चलाई जा रही हैं। संगठनात्मक सिलसिले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रविवार के दिन हरियाणा में अपना कार्यक्रम पूरा किया था और फिर भागलपुर में निर्धारित कार्यक्रम संपन्न करने के बाद वे यहां पहुंचे।
इस राजनीतिक अभियान के व्यापक उद्देश्य को साझा करते हुए यह बात सामने रखी गई कि देश के भीतर लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा के लिए आम नागरिकों को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर आगे आना होगा। उन्होंने विपक्ष के आपसी तालमेल पर तंज कसते हुए रेखांकित किया कि देशविरोधी ताकतों का मकसद जनता को जोड़ना नहीं है, बल्कि वे केवल अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के प्रयास में लगी हैं। अस्तित्व के इसी संकट के कारण अलग-अलग दल अब एक-दूसरे का हाथ थामकर खड़े होने को मजबूर दिख रहे हैं।
गठबंधनों पर तीखा तंज और पुराने रुख में बदलाव
ममता बनर्जी के हालिया राजनीतिक समझौतों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कटाक्ष किया कि खुद को शेर की तरह पेश करने वाली नेता अब कॉकरोच जनता पार्टी जैसे मंचों के साथ भी तालमेल बिठाने को तैयार दिख रही हैं। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम साफ दर्शाता है कि सत्ताधारी दल के भीतर कितनी गहरी हताशा घर कर चुकी है और जो पहले सरकार चला रहे थे, आज उनकी राजनीतिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है।
कांग्रेस के प्रति बदले हुए व्यवहार का हवाला देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि पहले की तस्वीरें और वीडियो साफ दिखाते हैं कि कांग्रेस को किस नजरिए और भाव से देखा जाता था। आज वही नेतृत्व उन्हें 'मैडम' कहकर संबोधित करने लगा है। इस बदलाव की तुलना मौसम के बदलने से करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनका यही राजनीतिक सीजन चल रहा है, जहां पुराने विरोध भुलाकर मजबूरी में नए रिश्ते साधे जा रहे हैं।
विचारधारा की कमी और तुष्टिकरण के आरोप
पार्टी की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के पास कभी कोई स्पष्ट विचारधारा या स्थायी नीति नहीं रही। हर नए राजनीतिक दौर के साथ उनकी नीतियां बदल जाती हैं और जिस किसी के सहारे काम निकालना हो, वे उसी के साथ खड़े नजर आते हैं। उन्होंने दावा किया कि संगठन अब अंदरूनी तौर पर काफी टूट चुका है और कई लोग साथ छोड़ चुके हैं या धोखा दे चुके हैं, जिसके कारण अब ऐसे नए संबोधन और समझौते देखने को मिल रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उनके कामकाज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में उन्हें अब विश्राम ले लेना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए बयानों का संदर्भ देते हुए यह आरोप भी लगाया कि अतीत में दूसरे धर्मों को उकसाने की कोशिशें हुईं और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज पर अत्याचार और तुष्टिकरण की जो कार्यशैली पहले अपनाई गई थी, उसकी आदत आज भी बनी हुई है और सार्वजनिक बयानों में वही तेवर नजर आते हैं।
सिंडिकेट संस्कृति खत्म करने और व्यवस्था में बदलाव का दावा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के वक्तव्यों का समर्थन करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में अब एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले समय में पूरी व्यवस्था को साफ-सुथरा, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा, जहां किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं होगी।
सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि फिल्म फेस्टिवल जैसे बड़े आयोजनों को भी पूरी गरिमा और निष्पक्षता के साथ आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिंडिकेटबाजी और मनमाने नियंत्रण की पुरानी परंपरा को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा ताकि जो लोग वास्तव में प्रतिभाशाली हैं और अवसर पाने के योग्य हैं, केवल उन्हें ही मंच और सम्मान मिल सके।



















