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टीएमसी राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के परिसरों पर ईडी की 24 घंटे लंबी तलाशी, 60 करोड़ रुपये के हिसाब में गड़बड़ी उजागरपश्चिम बंगाल
8 सित॰ 2026, 3:08 pm (1 घंटे पहले)· 3

टीएमसी राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के परिसरों पर ईडी की 24 घंटे लंबी तलाशी, 60 करोड़ रुपये के हिसाब में गड़बड़ी उजागर

ईडी ने टीएमसी सांसद नदीमुल हक से जुड़े ठिकानों पर 24 घंटे से ज्यादा चली तलाशी में करीब 60 करोड़ रुपये के लेनदेन में गड़बड़ी पकड़ी है, जांच में हवाला एंगल भी खंगाला जा रहा है।

टीएमसी के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक से जुड़े कई ठिकानों पर ईडी की टीमें लगातार 24 घंटे से ज्यादा समय तक डटी रहीं, और मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान करीब 60 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन में कई खामियां सामने आई हैं, जिनका संबंध हक से जुड़े एक उर्दू अखबार से बताया जा रहा है।

तीन शहरों में फैली रही तलाशी

अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई सोमवार सुबह शुरू हुई और मंगलवार तड़के तक चलती रही। जांच टीमों ने कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में अखबार के दफ्तर के साथ-साथ नदीमुल हक के आवास और उनसे जुड़े अन्य परिसरों की भी तलाशी ली। एजेंसी सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रही, दिल्ली और रांची में भी सात और ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए, जिससे अंदाजा लगता है कि कथित धन का जाल कितना बड़ा माना जा रहा है।

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बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस खंगाले

ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि टीमें छापेमारी के दौरान मिले बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड, वित्तीय कागजात और डिजिटल सामग्री की बारीकी से जांच कर रही हैं। एजेंसी का मकसद विवादित लेनदेन की पूरी कड़ी को जोड़ना और यह पता लगाना है कि रकम असल में कहां से आई, न कि सिर्फ उन कागजों पर भरोसा करना जो सामने पेश किए गए।

हवाला के रास्ते से रकम भेजे जाने का शक

जांच से जुड़े लोगों के मुताबिक, जांचकर्ता यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि कहीं जांच के दायरे में आई कुछ रकम बैंकिंग व्यवस्था के बजाय हवाला जैसे अनौपचारिक माध्यमों से तो नहीं भेजी गई। अगर ऐसा साबित होता है, तो एजेंसी के लिए यह दलील देना आसान हो जाएगा कि इन लेनदेन का मकसद असली भेजने और पाने वालों की पहचान छिपाना था।

करीब 60 करोड़ की एंट्री बिना ठोस सबूत के

अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के दौरान सामने आए करीब 60 करोड़ रुपये के लेनदेन के समर्थन में मौके पर पूछे जाने पर तुरंत संतोषजनक कागजात पेश नहीं किए जा सके। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ये सौदे अखबार के कामकाज से जुड़ी असली व्यावसायिक गतिविधि थे, या फिर इनका इस्तेमाल रकम को सामान्य निगरानी से बाहर के रास्तों से घुमाने के लिए किया गया।

छापेमारी के बीच सांसद से भी पूछताछ

तलाशी के अलावा ईडी अधिकारियों ने कोलकाता में नदीमुल हक के आवास और दफ्तर पर उनसे सीधे पूछताछ भी की। अधिकारियों के अनुसार जब सोमवार को छापेमारी शुरू हुई, उस वक्त सांसद रांची में मौजूद थे। इसके बाद उसी रात उन्हें कोलकाता लाया गया, जहां उनके घर और दफ्तर की तलाशी अगले दिन तक जारी रहने के दौरान उनसे सवाल-जवाब किए गए। इसके अलावा जांचकर्ता तृणमूल कांग्रेस से जुड़े बताए जा रहे कुछ और वित्तीय लेनदेन की भी अलग से पड़ताल कर रहे हैं।

बिधाननगर की एफआईआर से शुरू हुआ पूरा मामला

मौजूदा छापेमारी की जड़ में बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय में दर्ज एक एफआईआर है। इसी शिकायत के आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने अपनी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट यानी ईसीआईआर दर्ज करते हुए विधिवत जांच शुरू की। इस मामले में अवैध और बेहिसाबी वित्तीय लेनदेन के साथ-साथ संदिग्ध ठिकानों से रकम मिलने के आरोपों की पड़ताल हो रही है।

फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ईडी का कहना है कि अभी उसका पूरा जोर वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच पर है, ताकि लेनदेन की असली प्रकृति और रकम के मूल स्रोत का पता लगाया जा सके।

सवाल-जवाब

नदीमुल हक कौन हैं?
वे तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं, जिनसे जुड़े एक उर्दू अखबार के परिसरों पर ईडी ने छापेमारी की।
छापेमारी कब शुरू हुई और कितने समय तक चली?
यह सोमवार सुबह शुरू हुई और मंगलवार तड़के तक, यानी 24 घंटे से ज्यादा समय तक चली।
किन शहरों में छापे मारे गए?
कोलकाता के अलावा दिल्ली और रांची में भी सात अन्य ठिकानों पर छापेमारी हुई।
कितनी रकम के लेनदेन में गड़बड़ी मिली?
करीब 60 करोड़ रुपये के लेनदेन में विसंगतियां सामने आई हैं।
ईडी हवाला एंगल की जांच क्यों कर रही है?
एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि कहीं कुछ रकम बैंकिंग व्यवस्था के बजाय हवाला जैसे अनौपचारिक माध्यमों से तो नहीं भेजी गई।
क्या नदीमुल हक से पूछताछ हुई?
हां, ईडी ने उनके कोलकाता स्थित आवास और दफ्तर में उनसे पूछताछ की, जबकि छापेमारी शुरू होने पर वे रांची में थे।
यह मामला कैसे शुरू हुआ?
यह बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय में दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसके बाद ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की।
क्या अब तक किसी की गिरफ्तारी हुई है?
नहीं, फिलहाल इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

यह मामला क्षेत्रीय राजनीति और वित्तीय जांच एजेंसियों के बीच बढ़ते टकराव का एक नया अध्याय है। कोलकाता, दिल्ली और रांची जैसे तीन शहरों में एक साथ हुई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि जांच का दायरा केवल एक अखबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और वित्तीय नेटवर्क के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। आगे यह देखना होगा कि हवाला एंगल और 60 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन पर क्या ठोस कानूनी सबूत सामने आते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि 24 घंटे से अधिक चली इस मैराथन छापेमारी और तीन शहरों में एक साथ हुई कार्रवाई से ईडी के हाथ डिजिटल डिवाइस और बैंक रिकॉर्ड जैसे अहम डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य लगे हैं। चूंकि यह पूरी जांच बिधाननगर पुलिस की शुरुआती एफआईआर और ईसीआईआर पर आधारित है, इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना कानूनी रूप से अहम होगा कि एजेंसी इन 60 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन को हवाला नेटवर्क और बिना दस्तावेजों वाले रूट से जोड़ने के लिए अदालत में क्या पुख्ता सबूत पेश करती है।

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