पश्चिम अफ्रीकी देश माली में एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिला है, जहां सैन्य सरकार ने फ्रांसीसी नागरिक यान वेज़िलियर को राष्ट्रपति क्षमादान दे दिया है। यान वेज़िलियर को देश की सरकार के खिलाफ तख्तापलट की साजिश में शामिल होने का दोषी ठहराते हुए 20 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। माली के राष्ट्रपति असिमी गोइता ने गुरुवार को इस माफी की घोषणा की। हालांकि, माली प्रशासन ने इस फैसले के पीछे के कारणों का तत्काल कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
जासूसी के आरोप और फ्रांसीसी प्रतिक्रिया
माली के अधिकारियों ने यान वेज़िलियर पर फ्रांसीसी खुफिया सेवा के लिए काम करने का आरोप लगाया था। पिछले साल हुई गिरफ्तारियों के समय सुरक्षा मंत्री जनरल दाऊद अली मोहम्मदाइन ने बयान दिया था कि सशस्त्र बलों के कुछ तत्वों ने नागरिकों के साथ मिलकर गणराज्य के संस्थानों को अस्थिर करने का प्रयास किया था। सुरक्षा मंत्री के अनुसार, इन संदिग्धों ने विदेशी शक्तियों की मदद ली थी और यान वेज़िलियर ने राजनीतिक नेताओं, सैन्य कर्मियों और नागरिक समाज के सदस्यों को एकजुट करने का काम किया था।
दूसरी ओर, फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था। फ्रांसीसी पक्ष का कहना था कि वेज़िलियर पर जासूसी और साजिश के लगाए गए सभी दावे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। क्षमादान की हालिया घोषणा पर फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की है।
सुरक्षा संकट और 2021 का तख्तापलट
माली वर्ष 2012 से ही उग्रवादी हमलों और गंभीर सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेश रहे इस देश में लगातार हिंसा और अस्थिरता बनी हुई है। इसी सुरक्षा स्थिति को संभालने का हवाला देते हुए असिमी गोइता ने वर्ष 2021 में सैन्य तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। सत्ता संभालने के बाद गोइता ने 2 साल के भीतर लोकतांत्रिक चुनाव कराने का वादा किया था, लेकिन वे चुनाव कभी आयोजित नहीं किए गए।
सैन्य शासन स्थापित होने के बावजूद उग्रवादी गुटों के हमलों में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि हाल के महीनों में हिंसा की घटनाओं में और बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध और कूटनीतिक बदलाव
माली में राजनीतिक तनाव तब और बढ़ गया जब पिछले साल मई में सैन्य जुंटा ने देश के सभी राजनीतिक दलों को भंग कर दिया। यह कदम सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद उठाया गया था। माली के पूर्व प्रधानमंत्री मूसा मारा ने राजनीतिक दलों पर इस प्रतिबंध को सैन्य नेताओं द्वारा शुरू किए गए सुलह के प्रयासों को बड़ा झटका करार दिया था।
विदेश नीति के मोर्चे पर माली ने फ्रांस के साथ अपने पुराने संबंधों को पूरी तरह तोड़ लिया है। नाइजर और बुर्किना फासो जैसे पड़ोसी देशों के साथ मिलकर माली ने उग्रवाद से निपटने के लिए रूसी सहयोगियों की मदद ली है। हालांकि, रूसी सैन्य बलों की मौजूदगी के बाद भी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में कोई ठोस सुधार देखने को नहीं मिला है।






















