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होर्मुज में तनाव के बीच भारत में डटा है ईरानी नौसेना का जहाज, छह महीने से कोच्चि में रुका है IRIS लवनदुनिया
18 सित॰ 2026, 9:37 am (42 दिन पहले)· 3

होर्मुज में तनाव के बीच भारत में डटा है ईरानी नौसेना का जहाज, छह महीने से कोच्चि में रुका है IRIS लवन

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में मची उथल-पुथल के बीच ईरान का एक नौसैनिक जहाज पिछले छह महीनों से केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है। तकनीकी खराबी और मानवीय आधार पर भारत ने इसे शरण दी थी।

पश्चिम एशिया में सुलगती जंग और होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी के हालात के बीच भारत और ईरान के रिश्तों की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। ईरान का नौसैनिक जहाज आईआरआईएस लवन पिछले छह महीनों से केरल के कोच्चि बंदरगाह पर ही डेरा डाले हुए है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर मचे इस घमासान के बीच भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस ईरानी युद्धपोत को अपने यहां ठहरने की अनुमति दी थी, जो युद्ध के बदलते घटनाक्रम के कारण अपने वतन नहीं लौट पाया।

युद्ध अभ्यास के बाद स्वदेश लौट रहा था जहाज

ईरानी नौसेना का यह लैंडिंग शिप इसी साल फरवरी के महीने में भारत आया था। इसका मुख्य मकसद विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में शिरकत करना था। इस बड़े रक्षा आयोजन में हिस्सा लेने के बाद जब यह जहाज अपने वतन वापस लौट रहा था, तभी पश्चिम एशिया में स्थितियां पूरी तरह बिगड़ गईं और युद्ध छिड़ गया। इसी5 मार्च को ईरानी नौसेना का एक अन्य फ्लीट सप्लाई वेसल आईआरआईएस बुशहर भी श्रीलंका में शरण लेने के लिए मजबूर हुआ था।

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तकनीकी खराबी और मानवीय आधार पर कोच्चि में प्रवेश

अपने तय सफर के दौरान आईआरआईएस लवन के चालकों ने भारत पहुंचने से पहले ही इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें आने की सूचना साझा की थी। इन परेशानियों को देखते हुए भारत ने पूरी तरह मानवीय आधार पर चार मार्च को इस जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति प्रदान की। कोच्चि पहुंचने पर इस युद्धपोत के सभी 183 सदस्यों को भारतीय नौसेना की आधुनिक सुविधाओं के भीतर ठहराया गया था ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

चालक दल के सदस्य अभी भी भारत में मौजूद

शुरुआती दिनों में भारी संख्या में मौजूद कर्मियों में से अब भी पचास से अधिक चालक दल के सदस्य कोच्चि में ही रुके हुए हैं। हालांकि कुछ अन्य सूत्रों और रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जहाज के सुचारू संचालन और देखभाल के लिए कम से कम दो दर्जन से ज्यादा कर्मी अब भी वहां तैनात हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि इस जहाज की सुरक्षा और देखरेख की पूरी जिम्मेदारी अब कोचीन पोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी गई है, जो लगातार इसकी निगरानी कर रही है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया था फैसले का बचाव

इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की कूटनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सात मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर इस जहाज को प्रवेश दिए जाने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि जब यह जहाज भारत की सरजमीं पर आया था, तब पश्चिम एशिया के हालात बिल्कुल अलग थे और वह केवल एक पूर्व-निर्धारित नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने आया था। वापसी के वक्त अचानक बदले घटनाक्रम और गंभीर संकट को देखते हुए जहाज ने भारत से गुहार लगाई थी, जिसे मानवीय मूल्यों के तहत स्वीकार किया गया।

सवाल-जवाब

ईरानी नौसेना का जहाज IRIS लवन भारत में क्यों आया था?
यह जहाज फरवरी में विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन-2026 नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने आया था।
यह जहाज वर्तमान में भारत में कहां रुका हुआ है?
यह जहाज पिछले छह महीनों से केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है।
भारत ने इस जहाज को अपने बंदरगाह पर क्यों रुकने दिया?
जहाज में तकनीकी खराबी आने और पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के कारण मानवीय आधार पर इसे रुकने की अनुमति दी गई थी।
इस जहाज की देखभाल की जिम्मेदारी किसके पास है?
वर्तमान में इस विदेशी युद्धपोत की देखरेख की जिम्मेदारी कोचीन पोर्ट अथॉरिटी को सौंपी गई है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी थी?
एस. जयशंकर ने कहा था कि जहाज मुश्किल में था और बदलते हालातों के बीच मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसे शरण देना एक उचित कदम था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·41 दिन पहले

पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच कोच्चि में ईरानी युद्धपोत का छह महीने से रुकना भारत की रणनीतिक दुविधा और संतुलित कूटनीति को दर्शाता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के स्पष्टीकरण से साफ है कि नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवीय मूल्यों के बीच तालमेल बिठाया है। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और अमेरिकी प्रतिबंधों के साए में, इतनी लंबी अवधि तक किसी विदेशी सैन्य संपत्ति की मेजबानी करना भारत के समुद्री कूटनीतिक कौशल की एक बड़ी परीक्षा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 दिन पहले

कोच्चि में ईरानी युद्धपोत का यह छह महीने लंबा ठहराव केवल मानवीय सहायता नहीं, बल्कि जटिल समुद्री सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की निगरानी का भी मामला है। बंदरगाह पर विदेशी सैन्य संपत्ति की इतनी लंबी मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल, आव्रजन नियमों और पोर्ट अथॉरिटी के समक्ष सुरक्षा प्रबंधन के लिहाज से एक संवेदनशील प्रशासनिक चुनौती बन जाती है, जिसे भारत ने अब तक बेहद संतुलित तरीके से संभाला है।

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