जापान के उत्तरी द्वीप होक्काइडो में आधी रात के समय एक असाधारण और भयानक रेल दुर्घटना सामने आई, जब एक तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेन सीधे पटरी पर मौजूद भारी भरकम भालू से टकरा गई। यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन का इंजन और डिब्बे झटके के साथ पटरी से नीचे उतर गए। इस रेलगाड़ी में कुल 34 यात्री और चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जो असाहिकावा से वाक्कनाई शहर की दिशा में यात्रा कर रहे थे। राहत की बात यह रही कि इतनी भयानक टक्कर और डिरेलमेंट के बाद भी किसी यात्री को गंभीर शारीरिक चोट नहीं आई, लेकिन सुदूर वन क्षेत्र में बोगियां बेपटरी होने के कारण सभी मुसाफिरों को पूरी रात खौफ के साए में ट्रेन के अंदर ही गुजारनी पड़ी।
जंगल के अंधेरे में अचानक हुआ तेज धमाका
यह घटना रात करीब 10 बजकर 50 मिनट पर पेश आई, जब ट्रेन अपनी नियमित गति से निर्जन ट्रैक पर दौड़ रही थी। अचानक अंधेरे में एक भीमकाय भालू रेलवे लाइन के बीच आ गया। ट्रेन चालक जब तक स्थिति को भांप पाता या आपातकालीन ब्रेक सक्रिय कर पाता, उससे पहले ही ट्रेन भारी जानवर से जा भिड़ी। जोरदार झटके के साथ डिब्बे असंतुलित होकर पटरियों से फिसल गए और बोगियों की बिजली अचानक गुल हो गई। घुप अंधेरे और सन्नाटे के बीच फंसे मुसाफिर अनहोनी की आशंका से सहम गए। इलाका बेहद वीरान और जंगलों से घिरा होने की वजह से वहां फौरन बचाव दल या अतिरिक्त सहायता पहुंचाना मुमकिन नहीं था।
बिजली न होने और बाहर जंगली जानवरों की मौजूदगी के खतरे को देखते हुए यात्रियों को सुबह होने तक ट्रेन के भीतर ही सुरक्षित रहने की सलाह दी गई। शनिवार की सुबह करीब 9 बजकर 30 मिनट पर राहत और बचाव कर्मियों का दल मौके पर पहुंचा और सभी 34 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरी जगह भेजा गया। हादसे के बाद इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि टक्कर का शिकार हुआ विशालकाय भालू जीवित बचा या उसकी मौत हो गई।
जापान में वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ता टकराव
इस हादसे ने जापान में जंगली भालुओं के लगातार बढ़ते खतरे को एक बार फिर प्रमुखता से उजागर कर दिया है। पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गांवों से शहरों की ओर हो रहे बड़े पैमाने पर पलायन के कारण ग्रामीण क्षेत्र और खेत वीरान हो रहे हैं। खेती बाड़ी बंद होने से इंसानी आबादी और घने जंगलों के बीच की प्राकृतिक सीमा रेखा खत्म हो गई है, जिससे जंगली जानवर आसानी से आबादी वाले इलाकों में दाखिल होने लगे हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक वनों में भोजन की भारी किल्लत पैदा हो गई है, जिसके चलते भोजन की तलाश में भालू अक्सर स्कूलों, रिहायशी कॉलोनियों, सुपरमार्केट्स और सुपर स्टोर्स तक पहुंच रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष जापान में भालुओं के हमलों की वजह से रिकॉर्ड 13 नागरिकों की जान चली गई थी। इस साल भी अप्रैल से जून के बीच तीन महीनों के भीतर ही पांच लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश भर में भूरे भालुओं की अनुमानित संख्या अब 12 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिससे यह समस्या एक गंभीर राष्ट्रीय संकट बनती जा रही है।
अतिविशाल भूरे भालू और सेना की तैनाती तक पहुंचे हालात
होक्काइडो द्वीप समूह पर पाए जाने वाले भूरे भालू शारीरिक बनावट के लिहाज से बेहद ताकतवर और विशाल होते हैं। एक पूर्ण वयस्क नर भालू की लंबाई लगभग दो मीटर और उसका वजन 400 किलोग्राम तक पहुंच जाता है। इतने भारी वजन और ठोस शरीर वाले जीव से तेज गति में सीधी भिड़ंत होने पर ट्रेन का बेपटरी होना स्वाभाविक था। भालुओं के बढ़ते आतंक और अनियंत्रित होती स्थिति पर काबू पाने के लिए टोक्यो प्रशासन ने 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एशियाई भालुओं के शिकार की अनुमति दोबारा बहाल कर दी है।
इस नए प्रशासनिक आदेश के तहत शहरों, रिहायशी इलाकों और नदियों के आसपास दिखाई देने वाले आक्रामक भालुओं को मारा जा सकेगा। इससे पहले अकिता प्रांत में बिगड़ती कानून व्यवस्था और सुरक्षा संकट को देखते हुए स्थिति नियंत्रित करने के लिए सेना के जवानों को मैदान में उतारना पड़ा था। उस क्षेत्र में भालू दिखने की घटनाएं छह गुना की भारी उछाल के साथ 8 हजार के पार चली गई थीं। अब इस रेल हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारी वन क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलवे ट्रैकों के आसपास बाड़ लगाने और निगरानी के सुरक्षा इंतजाम कड़े करने की तैयारी कर रहे हैं।























