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कनाडा को तोड़ने का डोनाल्ड ट्रंप और अल्बर्टा का दांव फेल, जनमत संग्रह में मिली भारी शिकस्तदुनिया
20 अक्तू॰ 2026, 2:38 pm (10 दिन पहले)· 7

कनाडा को तोड़ने का डोनाल्ड ट्रंप और अल्बर्टा का दांव फेल, जनमत संग्रह में मिली भारी शिकस्त

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में हुए जनमत संग्रह में भारी बहुमत ने देश के साथ बने रहने का समर्थन किया है, जिससे अलग देश बनाने की मांग को बड़ा झटका लगा है। इस नतीजे को प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है।

कनाडा के तेल समृद्ध प्रांत अल्बर्टा में अलगाववादियों को बड़ा झटका लगा है। कनाडा के सरकारी प्रसारक सीबीसी के अनुमान के मुताबिक, हालिया जनमत संग्रह में लगभग 76 प्रतिशत मतदाताओं ने कनाडा के साथ ही जुड़े रहने के पक्ष में मतदान किया है, जबकि करीब 23 प्रतिशत लोगों ने देश से अलग होने की प्रक्रिया शुरू करने का समर्थन किया। इस चुनावी परिणाम को प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और देश की एकता के पैरोकारों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। मतदान से ठीक पहले प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देशवासियों को आगाह किया था कि बाहरी ताकतें कनाडा को खंड-खंड कर उसके प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहती हैं। राजनीतिक हलकों में इस बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर इशारा माना जा रहा था।

अल्बर्टा में अलगाववादी मुहिम को करारा झटका

सीबीसी के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को शुरुआती मतगणना के दौरान 10 लाख से अधिक मतपत्रों की गिनती की जा चुकी थी। इनमें से करीब 76 प्रतिशत मतदाताओं ने कनाडा के साथ एकजुट रहने का विकल्प चुना, जबकि लगभग 23 प्रतिशत ने ऐसी कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के पक्ष में मत दिया जो भविष्य में एक अलग राष्ट्र के गठन का मार्ग प्रशस्त कर सकती थी। हालांकि, यह जनमत संग्रह सीधे तौर पर पूर्ण स्वतंत्रता या नए देश के गठन पर अंतिम निर्णय नहीं था। मतपत्र पर मुख्य सवाल यह था कि क्या एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया का श्रीगणेश किया जाना चाहिए, जिससे आने वाले समय में अलगाव के मुद्दे पर एक और निर्णायक जनमत संग्रह कराया जा सके। अलगाव का समर्थन करने वाले कुछ धड़ों में इस बात को लेकर भी असंतोष था कि इस चुनाव में सीधे तौर पर स्वतंत्रता के संबंध में सवाल नहीं पूछा गया था। अल्बर्टा में सोमवार को कुल 10 विभिन्न मुद्दों पर मतदान संपन्न हुआ, जिसमें आव्रजन, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और प्रांत की संवैधानिक शक्तियों से जुड़े विषय भी शामिल थे। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि सभी बचे हुए मतों की अंतिम गिनती पूरी होने में अभी कई दिन और लग सकते हैं।

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प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चेतावनी के मायने

मतदान से पहले प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नागरिकों से पुरजोर अपील की थी कि वे सरकार के कामकाज से अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए कनाडा से अलगाव का गलत रास्ता न चुनें। अल्बर्टा के एडमंटन शहर में ही पले-बढ़े मार्क कार्नी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि देश के खिलाफ वोट डालना एक बेहद खतरनाक जुआ साबित होगा, जिससे दीर्घकालिक अनिश्चितता और आर्थिक अवसरों का बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया था कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य पहले की तुलना में कहीं अधिक असुरक्षित और विभाजित हो चुका है। प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार कुछ ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो कनाडा को कमजोर कर तोड़ना चाहती हैं ताकि वे हमारे विशाल संसाधनों पर अधिकार जमा सकें। हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन विश्लेषकों ने इस चेतावनी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बयानों से जोड़कर देखा। अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रंप कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। इसके अलावा उनके प्रशासन ने कनाडा पर लगातार राजनीतिक और आर्थिक दबाव भी बनाए रखा है, हालांकि ट्रंप ने कभी भी अल्बर्टा की स्वतंत्रता का आधिकारिक तौर पर खुला समर्थन नहीं किया है।

अल्बर्टा के विशाल तेल भंडार का भू-राजनीतिक महत्व

अल्बर्टा कनाडा के सबसे महत्वपूर्ण और बड़े ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में शुमार है, जहां कच्चे तेल के अपार भंडार मौजूद हैं, विशेषकर ऑयल सैंड्स के रूप में। यही मुख्य वजह है कि इस प्रांत की स्थानीय राजनीति का प्रभाव केवल कनाडाई सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह अमेरिका के ऊर्जा हितों से भी सीधा जुड़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह दावा रहा है कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे प्रचुर तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार है और उसे कनाडा के तेल की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद उनके प्रशासन ने अल्बर्टा से अमेरिका तक कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाली पाइपलाइन परियोजनाओं में गहरी रुचि दिखाई है, जिसमें बहुचर्चित कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन को पुनर्जीवित करने का मुद्दा भी शामिल है। अल्बर्टा के अलगाववादी घटनाक्रम के बीच अमेरिकी प्रशासन से जुड़े कुछ बयानों ने इस पूरी बहस को और अधिक हवा दे दी थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अल्बर्टा को संयुक्त राज्य अमेरिका का प्राकृतिक साझेदार करार दिया था। दूसरी तरफ, अलगाव का समर्थन करने वाले समूहों ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ अपनी बैठकों का हवाला देते हुए यह दावा किया था कि वॉशिंगटन उनकी इस मांग को लेकर उत्सुक है। हालांकि इन तमाम दावों से इस बात की कोई पुष्टि नहीं होती कि अमेरिकी सरकार आधिकारिक रूप से अल्बर्टा के अलग देश बनने के एजेंडे का समर्थन कर रही है।

सवाल-जवाब

अल्बर्टा के जनमत संग्रह में किस बात पर मतदान हुआ था?
मतदाताओं ने इस बात पर वोट दिया कि क्या कनाडा से अलग होने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए या नहीं।
जनमत संग्रह में कितने प्रतिशत लोगों ने कनाडा के साथ रहने का समर्थन किया?
सीबीसी के अनुमान के मुताबिक करीब 76 प्रतिशत मतदाताओं ने कनाडा के साथ बने रहने का समर्थन किया।
कनाडा के प्रधानमंत्री कौन हैं?
मार्क कार्नी कनाडा के प्रधानमंत्री हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को लेकर क्या कहा था?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही है।
अल्बर्टा प्रांत क्यों महत्वपूर्ण है?
अल्बर्टा अपने विशाल तेल भंडार और ऑयल सैंड्स के कारण कनाडा का एक बेहद महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक क्षेत्र है।
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टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·9 दिन पहले

ट्रंप की नीयत पर तो सवाल उठना लाजिमी है, पर अल्बर्टा के लोगों का इस तरह एकजुट होना वाकई चौंकाने वाला था। क्या वाकई ट्रंप कनाडा को तोड़ने में लगे हैं?

Li Wei@li-wei·9 दिन पहले

अल्बर्टा के लोगों ने कनाडा के साथ रहने का फैसला तो कर लिया, पर लगता नहीं कि ट्रंप इतनी आसानी से हार मानेंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

ली वेई, बात तुम्हारी ठीक है, पर 76 प्रतिशत का बहुमत कोई छोटी बात नहीं है। जनता का मूड साफ़ है, ट्रंप चाहें भी तो रातों-रात कुछ नहीं बदल सकते।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·9 दिन पहले

अल्बर्टा में क्षेत्रिय अलगाव की बात करने वाले सिर्फ तेईस प्रतिशत ही निकले। ट्रंप के दावों के चक्कर में कनाडा टूटने से तो बच गया, पर राजनीति में ऐसे झटके बहुत कुछ सिखा जाते हैं।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·9 दिन पहले

युकी, तेईस प्रतिशत को कम मत समझो यार। तेल के खेल में इतनी बड़ी संख्या भी कल को बड़ा सिरदर्द बन सकती है, सिर्फ जीत का जश्न मनाने से बात नहीं बनेगी।

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