दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में बैंकिंग व्यवस्था चरमराने के बाद राजनीतिक उठापटक का दौर शुरू हो गया है। एक बड़े डिजिटल बैंक में वित्तीय गड़बड़ियां सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक ने उसका पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया, जिसके चलते सेवाएं पूरी तरह बंद हो गईं। इस हालात के कारण लगभग तीस लाख ग्राहकों की गाढ़ी कमाई बैंक में फंस गई है और वे अपने ही पैसों की निकासी नहीं कर पा रहे हैं। देश भर में इस संकट के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन भड़क उठे हैं और राजनीतिक स्तर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बढ़ते हुए भारी राजनीतिक दबाव के बीच राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया, लेकिन देश के सांसदों ने उनके इस इस्तीफे को खारिज कर दिया है। अब उन्हें गंभीर महाभियोग प्रक्रिया और आपराधिक जांच का सामना करना पड़ सकता है।
<इस्तीफा नामंजूर, संसद ने शुरू की महाभियोग की प्रक्रिया
पराग्वे की निचली संसद ने गुरुवार को आयोजित सत्र में अत्तर के मुकाबले शून्य मतों यानी अठहत्तर और शून्य के बहुमत से सैंटियागो पेना के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने के पक्ष में मतदान किया। दिलचस्प पहलू यह रहा कि यह सख्त फैसला उनके द्वारा पद छोड़ने की घोषणा किए जाने के महज कुछ मिनटों के भीतर ही सामने आया। इसके तुरंत बाद ऊपरी सदन यानी सीनेट में भी उन्हें उनके पद से बर्खास्त करने को लेकर गहन चर्चा शुरू कर दी गई। हालांकि, सांसदों ने उनके द्वारा दिए गए इस्तीफे को सिरे से स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसका साफ अर्थ यह है कि सैंटियागो पेना फिलहाल महाभियोग की इस कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया से बच नहीं सकते हैं। घटनाक्रम के बाद सैंटियागो पेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक हैंडल से बयान जारी कर कहा कि वह महाभियोग की आगामी सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे और अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि वह देश के संविधान और सभी प्रमुख संस्थाओं का पूरा सम्मान करते हुए ठोस तथ्यों और पुख्ता सबूतों के आधार पर अपना बचाव करेंगे। यह पूरा मामला इसलिए भी बेहद गंभीर और संवेदनशील बना हुआ है क्योंकि यदि संसद उन्हें उनके पद से हटा देती है, तो राष्ट्रपति के रूप में उन्हें मिलने वाली संवैधानिक कानूनी सुरक्षा यानी इम्युनिटी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ सीधे तौर पर आपराधिक मुकदमा चलाए जाने का कानूनी रास्ता साफ हो जाएगा।
आखिर यूएनओ बैंक में क्या गड़बड़ी सामने आई?
पराग्वे में इस विकट राजनीतिक संकट की असली शुरुआत मंगलवार को हुई, जब देश के केंद्रीय बैंक ने Ueno Bank का पूरा कामकाज और नियंत्रण अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में ले लिया। केंद्रीय बैंक की तरफ से इस सख्त कार्रवाई के पीछे बैंक के भीतर चल रही गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और बैंक के पास कामकाज चलाने के लिए पर्याप्त पूंजी की भारी कमी को मुख्य वजह बताया गया। आपको बता दें कि Ueno Bank एक आधुनिक डिजिटल बैंक था, जिसका मतलब है कि इसके अधिकांश बैंकिंग कार्य मोबाइल बैंकिंग और ऑनलाइन डिजिटल सेवाओं के माध्यम से ही संचालित होते थे। केंद्रीय बैंक की ओर से की गई इस कार्रवाई के तुरंत बाद मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन, एटीएम कार्ड और पैसे ट्रांसफर करने जैसी तमाम जरूरी वित्तीय सेवाएं पूरी तरह से रोक दी गईं। इस अचानक लगे प्रतिबंध का सीधा और भारी असर देश के लगभग तीस लाख ग्राहकों पर पड़ा है। पराग्वे देश की कुल आबादी लगभग पैंसठ लाख के आसपास है, ऐसे में देश की कुल आबादी के लगभग आधे हिस्से के बराबर ग्राहक अपने ही बैंक खातों में जमा अपनी गाढ़ी रकम का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। आम जनता का गुस्सा लगातार सड़कों पर फूट रहा है और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से देशवासियों को भरोसा दिलाया गया है कि सभी पात्र ग्राहकों की डूबी हुई जमा रकम एक विशेष सरकारी गारंटी योजना के तहत पूरी तरह वापस लौटा दी जाएगी। इसके साथ ही बैंक की बची हुई संपत्तियों और परिसंपत्तियों को बेचकर या इस्तेमाल करके लोगों का पैसा वापस हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की तरफ से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि देश के सभी प्रभावित ग्राहकों को उनका फंसा हुआ पैसा आखिरकार कब तक पूरी तरह मिल पाएगा।


















