ल्यूसर्न में नया राजनयिक प्रयास
US के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत की है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से सुधारने का प्रयास किया जा सके। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछले सप्ताह हुए उस अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाना था, जिसका लक्ष्य ईरान में चल रहे संघर्ष को समाप्त करना था। लेक ल्यूसर्न के पास एक स्विस रिसॉर्ट में आयोजित इस बैठक में जेडी वेंस, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची शामिल हुए। बैठक में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान और कतर के अधिकारी मौजूद थे। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह सीधी बातचीत करीब 80 मिनट तक चली।
वैश्विक तेल व्यापार और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा
इस बातचीत का एक बड़ा मुद्दा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला रखना था। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। हालांकि ईरान ने दावा किया था कि उसने इस रास्ते को फिर से बंद कर दिया है, लेकिन US सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज कर दिया। सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में लगातार निगरानी रख रही है ताकि जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहे। जेडी वेंस ने बताया कि हाल के दिनों में लाखों बैरल कच्चा तेल इस मार्ग से सुरक्षित गुजरा है। इस 60 दिवसीय अंतरिम समझौते के तहत व्यावसायिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी गई है।
पिछले हफ्ते जब इस समझौते की घोषणा हुई थी, तब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के वायदा भाव में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इससे उन अमेरिकी उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली जो गर्मियों के यात्रा सीजन से पहले पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से परेशान थे। हालांकि, यह समझौता भविष्य में ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कोई नया शुल्क लगाने की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं करता है।
परमाणु कार्यक्रम पर रार और घरेलू राजनीतिक दबाव
US डेलिगेशन चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस प्रतिबद्धता जताए, क्योंकि इसके सैन्य इस्तेमाल की आशंका लगातार बनी हुई है। हालांकि ईरान हमेशा से परमाणु हथियार बनाने के दावों से इनकार करता रहा है। बैठक के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने यूरेनियम संवर्धन के अपने देश के अधिकार पर कड़ा रुख अपनाया। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, पेजेश्कियान ने कहा कि उनका देश यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेगा और दूसरी तरफ के देशों को भी इस सच को स्वीकार करना होगा।
स्विट्जरलैंड में जेडी वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी पहुंचे थे। ये दोनों तकनीकी परमाणु मुद्दों पर चर्चा करने के लिए समय से पहले ही वहां पहुंच गए थे। अब इन तकनीकी पहलुओं को सुलझाने के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है, हालांकि जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अधिकांश विस्तृत बातचीत अन्य अधिकारी संभालेंगे। डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेश्कियान के बीच हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत तेहरान को तेल बेचने की अनुमति दी गई है और उसकी फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति का रास्ता भी साफ हुआ है। बदले में ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को डाइल्यूट करना होगा, जिसके बारे में माना जाता है कि इसे पिछले साल अमेरिकी हमलों में निशाना बनी जगहों के नीचे सुरक्षित छिपाया गया था।
इस समझौते को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। रिपब्लिकन पार्टी के कट्टरपंथियों ने इस अंतरिम समझौते की आलोचना की है और इसकी तुलना ओबामा काल के परमाणु समझौते से की है। आलोचकों का मानना है कि पुराना समझौता भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में नाकाम रहा था। डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक फोन इंटरव्यू में मसूद पेजेश्कियान को चेतावनी दी कि उन्हें अपना रवैया सुधारना होगा, अन्यथा अमेरिका ईरान के बाकी हिस्सों पर भी नियंत्रण कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर अगले 60 दिनों में कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो US शुल्क लगाए जा सकते हैं।
लेबनान संघर्ष का साया और संघर्षविराम की मुश्किलें
लेबनान के ताजा हालातों ने इस बैठक को काफी हद तक प्रभावित किया। जेडी वेंस को शुक्रवार को ही ल्यूसर्न के पास बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट पहुंचना था, लेकिन लेबनान में हिंसा भड़कने के कारण उनकी यात्रा में देरी हुई। इसके बाद ईरानी अधिकारियों ने भी बैठक में आने का कार्यक्रम रद्द कर दिया था। हालांकि, रविवार को बातचीत फिर से शुरू हो सकी। जेडी वेंस ने कहा कि वह स्विट्जरलैंड में एक या दो दिन रुकेंगे। बैठक की शुरुआत में जेडी वेंस ने सहयोग के भविष्य पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या दोनों देश मिलकर कुछ और हासिल कर सकते हैं और क्या वे एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघेई ने कहा कि उनका देश चाहता था कि बातचीत मुख्य रूप से लेबनान पर इजरायल के हमलों पर केंद्रित हो। शनिवार को लेबनान में हुए संघर्षविराम समझौते के बावजूद, इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच हिंसक झड़पें इस कूटनीतिक प्रगति के लिए खतरा बनी हुई हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि न तो इजरायल और न ही हिजबुल्लाह ने इस US-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक खतरा खत्म नहीं हो जाता, उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में मौजूद रहेगी। वहीं हिजबुल्लाह का कहना है कि जब तक इजरायल पूरी तरह पीछे नहीं हटता, तब तक उसके हमले नहीं रुकेंगे। इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी करते हुए लिखा कि अगर हिजबुल्लाह ने हमला नहीं रोका, तो US ईरान पर फिर से और कड़ा हमला करेगा जैसा कि पिछले सप्ताह किया गया था।













