रूसी कच्चे तेल की खरीद और व्यापार नीतियों को लेकर भारत पर सवाल उठाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो को सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा है. भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की तरफ से मिली तीखी आलोचना के बाद नवारो ने सार्वजनिक रूप से अपील करते हुए इन हमलों को रोकने का आग्रह किया है. व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार ने दावा किया कि उनके बयानों के बाद उन पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लगातार व्यक्तिगत टिप्पणियां और गंदे हमले किए जा रहे हैं.
ट्रोलिंग और इंटरनेट हमलों पर पीटर नवारो का बयान
व्हाइट हाउस के वरिष्ठ व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा कि भारत की व्यापार नीति और रूसी ऊर्जा आयात की लगातार आलोचना करने के कारण उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा है. उन्होंने इस डिजिटल प्रतिक्रिया की तुलना एक फायरबॉम्ब से करते हुए बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप से बड़ी संख्या में सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उन्हें निशाना बनाया है. नवारो के अनुसार, ऑनलाइन हमलों की यह शैली समस्याओं को हल करने का सही तरीका नहीं है.
अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पीटर नवारो ने कहा, "मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि ऐसा मत करो. अमेरिका में हम समस्याएं इस तरीके से नहीं सुलझाते." हालांकि उन्होंने यह विस्तृत जानकारी नहीं दी कि उन्हें किस तरह की धमकियां या विशिष्ट संदेश मिले, लेकिन उन्होंने माना कि उनके बयानों के विरोध में आई यह डिजिटल लहर काफी व्यापक थी.
रूस से तेल व्यापार और नवारो के तीखे आरोप
पीटर नवारो लंबे समय से भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात के कट्टर आलोचक रहे हैं. उनका आरोप रहा है कि 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने मास्को से तेल की खरीदारी में भारी बढ़ोतरी की. नवारो का दावा है कि इस ऊर्जा व्यापार के जरिए मिलने वाला राजस्व सीधे तौर पर मास्को की सैन्य गतिविधियों को आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करता है.
अपने बयानों में नवारो ने तर्क दिया था कि 2022 से पहले भारत रूस के साथ इस पैमाने पर तेल व्यापार में शामिल नहीं था. हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी क्रूड खरीदा और उससे तैयार रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा. अपने पिछले भाषणों और बयानों में नवारो ने भारत के उच्च आयात शुल्कों के कारण उसे टैरिफ का महाराजा कहा था और एक अवसर पर तो भारत को क्रेमलिन के लिए लॉन्ड्रोमैट तक करार दे दिया था.
फाइनेंशियल टाइम्स लेख और भारत सरकार का रुख
पीटर नवारो ने यह दावा भी किया कि उनके द्वारा लिखे गए आलोचनात्मक लेखों के प्रभाव से भारत के रूसी तेल आयात में कुछ कमी आई है. उन्होंने प्रसिद्ध व्यावसायिक समाचार पत्र फाइनेंशियल टाइम्स में प्रकाशित अपने एक ऑप-एड का संदर्भ देते हुए कहा कि उनकी इस निरंतर सार्वजनिक आलोचना ने भारत के तेल आयात निर्णयों में आंशिक बदलाव लाने में योगदान दिया हो सकता है.
दूसरी तरफ, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने पीटर नवारो के इन दावों को पूरी तरह से खारिज किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने नवारो के पूर्व बयानों को पूरी तरह गलत और भ्रामक करार दिया था. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि भारत अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है और अमेरिकी सलाहकार द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद व तथ्यात्मक रूप से गलत हैं.



















