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महराजगंज में एक करोड़ की सड़क परियोजना, पंचमुखी शिव मंदिर तक अब पहुंचना होगा आसानबिहार
16 जून 2026, 8:32 am (46 दिन पहले)· 3

महराजगंज में एक करोड़ की सड़क परियोजना, पंचमुखी शिव मंदिर तक अब पहुंचना होगा आसान

महराजगंज जिले में लालपुर से इटहिया तक 2200 मीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण एक करोड़ की लागत से शुरू हो गया है, जिससे पंचमुखी शिव मंदिर और प्राचीन काली माता मंदिर तक श्रद्धालुओं की राह सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला देश की आखिरी छोर पर बसा होने और पड़ोसी देश नेपाल के साथ सीमा साझा करने की वजह से अपनी अलग पहचान रखता है। इसी सीमावर्ती इलाके में स्थित प्राचीन पंचमुखी शिव मंदिर जिले का एक बड़ा आस्था केंद्र है। सावन के महीने और शिवरात्रि के मौके पर भारत के साथ ही नेपाल से भी बड़ी तादाद में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मुख्य मार्ग तो काफी पहले से बना हुआ है, लेकिन मंदिर तक जोड़ने वाले कुछ छोटे रास्ते अब भी कच्चे थे, जिनकी वजह से श्रद्धालुओं को खासी दिक्कत झेलनी पड़ती थी।

हालत यह थी कि श्रद्धालुओं को या तो कच्ची पगडंडियों से गुजरना पड़ता था या फिर लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से मंदिर तक आना पड़ता था। अब इन्हीं श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है।

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लालपुर से इटहिया तक बनेगी पक्की सड़क

लालपुर से इटहिया की ओर जाने वाली जो सड़क लंबे समय से कच्ची पड़ी थी, उसे अब पक्की सड़क में तब्दील किया जा रहा है। इस मार्ग का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जो लालपुर को इटहिया रोड से जोड़ेगा। इसका सीधा फायदा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ इलाके के किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा, जिनके लिए आवाजाही पहले से कहीं आसान हो जाएगी।

एक करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण

इस परियोजना पर एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कुल बाईस सौ मीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, जो लालपुर से होते हुए इटहिया रोड में जाकर मिलेगी। पहले बरसात के दिनों में इस रास्ते से गुजरना बेहद मुश्किल काम होता था, लेकिन सड़क बन जाने के बाद इस स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

इटहिया शिव मंदिर और काली माता मंदिर का महत्व

इटहिया शिव मंदिर जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। सावन और शिवरात्रि के अवसर पर यहां महराजगंज ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पड़ोसी देश नेपाल के अलग-अलग इलाकों से श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। इसी मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर प्राचीन काली माता का मंदिर भी है, जो लोगों की आस्था का एक और बड़ा केंद्र है।

अब तक यहां पहुंचने के लिए लोगों को कच्चे रास्तों का सहारा लेना पड़ता था। श्रद्धालु लालपुर गांव के बगल से गुजरने वाली नहर के किनारे होकर मंदिर तक जाते थे और बरसात के मौसम में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। पक्की सड़क बन जाने के बाद मंदिर तक पहुंचना और वहां से मुख्य मार्ग तक आना दोनों ही आसान हो जाएगा।

कई गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

सड़क तैयार होने के बाद आसपास के गांवों के लोगों की आवाजाही भी सहज होगी। इस मार्ग से लालपुर, लक्ष्मीपुर खुर्द, चटियां, भरवलियां, ठूठीबारी, रामनगर, मरचहवा, राजाबारी समेत कई अन्य गांवों को सीधा फायदा मिलने वाला है। इसी सड़क से एक लिंक रोड प्राचीन काली मंदिर तक भी जाती है, जिसके जरिए श्रद्धालु काली माता मंदिर तक पहुंच सकेंगे।

सही सड़क न होने और पर्याप्त जानकारी के अभाव में पहले प्राचीन काली माता मंदिर तक श्रद्धालुओं का आना-जाना कम रहता था, लेकिन नई सड़क बनने के बाद यहां आवागमन बढ़ने की पूरी संभावना है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी सुविधा होगी, जो अब सीधे पंचमुखी शिव मंदिर तक पहुंच सकेंगे।

सवाल-जवाब

यह सड़क कहां से कहां तक बन रही है और कितनी लंबी है?
यह सड़क लालपुर से इटहिया रोड तक बनाई जा रही है और इसकी कुल लंबाई बाईस सौ मीटर है।
इस सड़क परियोजना पर कितना खर्च हो रहा है?
इस सड़क के निर्माण पर एक करोड़ रुपये की लागत आ रही है।
इस सड़क से किन लोगों को फायदा होगा?
पंचमुखी शिव मंदिर और काली माता मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ लालपुर, लक्ष्मीपुर खुर्द, चटियां, भरवलियां, ठूठीबारी, रामनगर, मरचहवा और राजाबारी समेत कई गांवों के किसानों और ग्रामीणों को फायदा होगा।
पंचमुखी शिव मंदिर पर श्रद्धालु कब आते हैं?
सावन के महीने और शिवरात्रि के अवसर पर भारत के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार और पड़ोसी देश नेपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
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