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सुरों का जादू: उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की जुगलबंदी, जिसने बदल दिया 90 के दशक का संगीतबॉलीवुड
22 जून 2026, 4:29 pm (38 दिन पहले)· 6

सुरों का जादू: उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की जुगलबंदी, जिसने बदल दिया 90 के दशक का संगीत

80 और 90 के दशक में उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की जोड़ी ने कई सदाबहार गाने दिए, जिन्होंने न केवल फिल्मों को सुपरहिट बनाया बल्कि संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई।

भारतीय संगीत के इतिहास में 80 और 90 का दशक बेहद खास रहा है। इस सुरीले दौर को संवारने में पार्श्व गायक उदित नारायण और गायिका अनुराधा पौडवाल की जुगलबंदी का बहुत बड़ा योगदान था। इन दोनों कलाकारों ने एक के बाद एक कई ऐसे सदाबहार गाने दिए, जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं। उनकी आवाज के जादू ने कई साधारण फिल्मों को भी संगीत के दम पर बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट बना दिया।

सफलता की शुरुआत और दो जादुई आवाजों का सफर

अनुराधा पौडवाल ने अपने गायकी के सफर की शुरुआत 80 के दशक में की थी। निर्देशक सुभाष घई की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हीरो’ ने उन्हें असली पहचान दी और उनकी सुरीली आवाज को घर-घर तक पहुंचाया। इस फिल्म के दो प्रसिद्ध गीत ‘डिंग डॉन्ग’ और ‘तू मेरा हीरो है, तू मेरा दिलवर है’ श्रोताओं के दिलों में बस गए। दिलचस्प बात यह है कि इन गानों को पहले स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज में डब किया जाना था, लेकिन संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को अनुराधा पौडवाल की मूल रिकॉर्डिंग इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसी आवाज में गाने रिलीज करने का फैसला किया। दूसरी तरफ, साल 1988 में आई आमिर खान की पहली फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के सुपरहिट गाने ‘पापा कहते हैं’ से उदित नारायण रातोंरात पूरे देश के चहेते गायक बन गए। इसके बाद उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की जोड़ी ने एक के बाद एक कई बेहतरीन युगल गीत गाए, जिन्होंने सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए। इनमें ‘लाल दुपट्टा मलमल का’, ‘दिल’, ‘बेटा’, ‘दाग दि फायर’, ‘तुम बिन’ और ‘ये दिल आशिकाना’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

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‘लाल दुपट्टा मलमल का’: बिना सिनेमाघरों के ही कमाए करोड़ों रुपये

साल 1988-89 के आसपास अनुराधा पौडवाल की मुलाकात टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार से हुई थी। गुलशन कुमार उस समय एक छोटे बजट की संगीतमय फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। अनुराधा पौडवाल ने उनकी मुलाकात उस समय के चर्चित संगीतकार आनंद-मिलिंद से करवाई। इसके बाद एक खूबसूरत संगीतमय फिल्म ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ का निर्माण हुआ, जिसका निर्देशन रविंदर पीपट ने किया था। इस फिल्म में साहिल चड्ढा और वेवर्ली मुख्य किरदारों में नजर आए थे। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीतों के साथ यह वीडियो एल्बम 2 जून 1989 को रिलीज किया गया था। इस एल्बम का गाना ‘क्या करते थे साजना, तुम हमसे दूर रहके’ बेहद लोकप्रिय हुआ, जिसे अनुराधा पौडवाल और उदित नारायण ने अपनी सुरीली आवाज दी थी। गुलशन कुमार ने इस एल्बम का जोरदार प्रचार किया, जिसे दूरदर्शन और आकाशवाणी पर बार-बार प्रसारित किया गया। नतीजा यह हुआ कि बिना सिनेमाघरों में रिलीज किए ही इस वीडियो एल्बम ने गुलशन कुमार को करोड़ों रुपये की कमाई कराई। निजी जिंदगी की बात करें तो अनुराधा पौडवाल का विवाह साल 1969 में संगीतकार अरुण पौडवाल से हुआ था, जो मशहूर संगीत निर्देशक एसडी बर्मन के सहायक थे और उन्होंने खुद भी कई फिल्मों में संगीत दिया था।

फिल्म ‘दिल’ की सफलता और सुरों के पीछे का विवाद

साल 1990 में आई फिल्म ‘दिल’ का गाना ‘मुझे नींद ना आए, मुझे चैन ना आए’ उस दौर के युवाओं का एंथम बन गया था। इस फिल्म का निर्देशन इंदर कुमार ने किया था, जो अभिनेत्री अरुणा ईरानी के भाई हैं। फिल्म का संगीत आनंद-मिलिंद ने तैयार किया था और गीत समीर ने लिखे थे। इस फिल्म का एक और गाना ‘हम प्यार करने वाले, दुनिया से ना डरने वाले’ भी उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की आवाज में हिट रहा। 22 जून 1990 को रिलीज हुई इस फिल्म में आमिर खान, माधुरी दीक्षित, अनुपम खेर और सईद जाफरी मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म ने युवाओं के बीच रोमांस के मायने बदल दिए और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

हालांकि, इस फिल्म के गानों को लेकर अनुराधा पौडवाल और अलका याज्ञनिक के बीच विवाद भी हुआ था। चर्चा थी कि इन गानों को पहले अलका याज्ञनिक ने गाया था, लेकिन बाद में इन्हें अनुराधा पौडवाल की आवाज में डब कर दिया गया। अनुराधा पौडवाल ने खुद एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्होंने गुलशन कुमार को ऐसा करने से मना किया था, लेकिन गुलशन कुमार का मानना था कि वह व्यापार कर रहे हैं और इसमें नैतिकता की कोई जगह नहीं है। इसके अलावा, अनुराधा पौडवाल ने ही साल 1989 में संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण को गुलशन कुमार से मिलवाया था। उन्होंने समीर के साथ मिलकर एक एल्बम ‘चाहत’ के लिए गाने तैयार किए थे, जो बाद में प्रसिद्ध फिल्म ‘आशिकी’ के रूप में सामने आई। महेश भट्ट के निर्देशन में बनी इस फिल्म के सभी गाने अनुराधा पौडवाल ने गाए थे। इसके बाद महेश भट्ट ने टी-सीरीज के लिए ही ‘दिल है की मानता नहीं’ का निर्देशन किया, जिसके गाने भी नदीम-श्रवण के संगीत में अनुराधा पौडवाल ने ही गाए थे। साल 1991 में आई फिल्म ‘आई मिलन की रात’ का गाना ‘मत रो मेरे दिल’ भी काफी पसंद किया गया, जिसमें अविनाश वधावन और शाहीन मुख्य भूमिकाओं में थे, हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औसत रही थी।

‘बेटा’ फिल्म का धमाल और ‘धक धक गर्ल’ का जन्म

साल 1992 में उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की जुगलबंदी से एक और ऐतिहासिक गाना सामने आया, जिसने माधुरी दीक्षित को हमेशा के लिए ‘धक धक गर्ल’ बना दिया। फिल्म थी ‘बेटा’, जिसका निर्देशन इंदर कुमार ने किया था और मुख्य भूमिकाओं में अनिल कपूर तथा माधुरी दीक्षित थे। फिल्म का गाना ‘धक धक करने लगा’ इतना लोकप्रिय हुआ कि वह आज भी कल्ट क्लासिक माना जाता है। इसी फिल्म का एक और सुरीला गीत ‘कोयल सी तेरी बोली’ भी उदित और अनुराधा ने गाया था। आनंद-मिलिंद के संगीत और समीर के लिखे गीतों वाली इस फिल्म की मूल कहानी के. भाग्यराज की थी, जबकि संवाद कमलेश पांडेय ने लिखे थे। फिल्म का स्क्रीनप्ले ग्यानदेव अग्निहोत्री, राजीव कौल और प्रकाश पारेख ने मिलकर तैयार किया था। यह फिल्म दरअसल 1987 की तमिल फिल्म ‘एंगा चिन्ना रासा’ की रीमेक थी। इस फिल्म ने उस समय दुनिया भर में लगभग 23.5 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया था और यह 1992 की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक बनी थी। गौरतलब है कि ‘धक-धक करने लगा’ गाना फिल्म की पूरी शूटिंग खत्म होने के बाद इसमें जोड़ा गया था।

चुनौतियों के बीच जारी रहा संगीत का सफर

अनुराधा पौडवाल के जीवन में साल 1991 में एक बड़ा दुख आया जब उनके पति अरुण पौडवाल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इस व्यक्तिगत क्षति के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और गाना जारी रखा। साल 1999 में आई एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘दाग दि फायर’ का गाना ‘परदेसिया इतना बता सजना’ एक बार फिर उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की आवाज में सुपरहिट साबित हुआ। 12 फरवरी 1999 को रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन राज कंवर ने किया था, जबकि इसकी पटकथा रॉबिन भट्ट और आकाश खुराना ने लिखी थी। संजय दत्त, चंद्रचूड़ सिंह और महिमा चौधरी अभिनीत इस फिल्म का संगीत राजेश रोशन ने दिया था और गीत समीर के थे। इस फिल्म का अनुराधा पौडवाल का एकल गीत ‘दिल दीवाना ना जाने कब खो गया’ भी काफी लोकप्रिय हुआ। 6.75 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में 20.28 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इसके बाद साल 2001 में इस जोड़ी ने फिल्म 'तुम बिन' के बेहद लोकप्रिय गाने 'तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत...' से एक बार फिर संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया।

सवाल-जवाब

'धक धक करने लगा' गाना फिल्म में कब जोड़ा गया था?
यह गाना फिल्म 'बेटा' की पूरी शूटिंग समाप्त होने के बाद फिल्म में जोड़ा गया था।
'लाल दुपट्टा मलमल का' से गुलशन कुमार ने बिना थिएटर रिलीज के कैसे कमाई की?
गुलशन कुमार ने दूरदर्शन और आकाशवाणी पर इस वीडियो एल्बम का भारी प्रचार किया, जिससे उन्होंने सिनेमाघरों के बिना ही करोड़ों रुपये कमाए।
फिल्म 'दिल' के गानों को लेकर क्या विवाद हुआ था?
कथित तौर पर इन गानों को पहले अलका याज्ञनिक ने गाया था, जिन्हें बाद में अनुराधा पौडवाल की आवाज में डब किया गया, जिससे दोनों गायिकाओं के बीच विवाद हुआ।
उदित नारायण को पहली बड़ी सफलता किस फिल्म से मिली?
उदित नारायण को साल 1988 में आई आमिर खान की पहली फिल्म 'कयामत से कयामत तक' के गाने 'पापा कहते हैं' से पहली बड़ी सफलता मिली।
फिल्म 'बेटा' ने बॉक्स ऑफिस पर कितना कलेक्शन किया था?
साल 1992 में रिलीज हुई फिल्म 'बेटा' ने दुनिया भर में लगभग 23.5 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया था।
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