सावन के पावन माह की शुरुआत होते ही राजस्थान के ऐतिहासिक शहर बीकानेर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र में अभूतपूर्व चहल-पहल देखी जा रही है। शहर के प्रसिद्ध बड़ा बाजार में स्थित चूड़ी बाजार में अलसुबह से लेकर देर शाम तक खरीदारी के लिए महिलाओं का हुजूम उमड़ रहा है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में श्रावण मास के दौरान हरे रंग को अत्यंत पवित्र, समृद्धिकारक और शुभ माना जाता है। इसी सांस्कृतिक परंपरा का पालन करते हुए सुहागिन महिलाएं और नवयुवतियां कांच की हरी चूड़ियों को विशेष उत्साह के साथ खरीद रही हैं। इसके अतिरिक्त लाल रंग की चूड़ियों के प्रति भी खरीदारों का भारी आकर्षण बना हुआ है। बाजार में सादी चूड़ियों से लेकर नए पैटर्न, नगीनेदार कड़े और विभिन्न रंगों के शानदार कॉम्बिनेशन तैयार कराए जा रहे हैं, जिससे पूरा व्यापारिक परिसर सावन के पारंपरिक रंगों में सराबोर नजर आ रहा है।
धार्मिक परंपरा और चूड़ियों की मांग
सावन के महीने में हरी और लाल चूड़ियां पहनना केवल एक श्रृंगारिक रिवाज नहीं, बल्कि वैवाहिक सुख और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। बड़ा बाजार के प्रमुख चूड़ी विक्रेता सुनील पुरोहित के अनुसार, इस पूरे महीने बाजार में मुख्य रूप से हरे और लाल रंगों का ही बोलबाला रहता है। उन्होंने बताया, "सावन के दौरान बाजार में मुख्य रूप से दो रंगों यानी हरे और लाल रंग की मांग सबसे अधिक रहती है।" इसी मांग की पूर्ति के लिए व्यापारी सावन की औपचारिक शुरुआत से काफी समय पहले से ही व्यापक तैयारियां शुरू कर देते हैं।
बाजार में उपलब्ध चूड़ियों की कीमतों की बात करें तो शुरुआती सेट मात्र 100 रुपये से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बाद कांच की गुणवत्ता, नक्काशी, फिनिशिंग और नगीनों के सूक्ष्म काम के अनुसार दाम तय किए जाते हैं। महिलाएं अपनी आर्थिक क्षमता और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार विविध किस्मों का चयन कर रही हैं। कई ग्राहक हरे रंग की मुख्य चूड़ियों के साथ लाल, पीली और सुनहरी चूड़ियों का तालमेल बिठाकर आकर्षक सेट तैयार करवा रहे हैं, जिससे उनकी कलात्मक पसंद भी झलकती है।
फिरोजाबाद और अहमदाबाद से पहुंच रहा विशेष स्टॉक
बीकानेर के चूड़ी बाजार में बिकने वाली इन बहुरंगी और कलात्मक कांच की चूड़ियों का निर्माण स्थानीय स्तर पर नहीं होता है। इस भारी मांग को पूरा करने के लिए माल का मुख्य प्रदाय उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कांच शहर फिरोजाबाद और गुजरात के औद्योगिक शहर अहमदाबाद से किया जाता है। फिरोजाबाद को पूरे भारत में कांच उद्योग और उत्कृष्ट चूड़ी निर्माण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में पहचाना जाता है।
सावन के दौरान बीकानेर में कांच की चूड़ियों की खपत में अचानक कई गुना की वृद्धि हो जाती है। इस मौसमी उछाल को ध्यान में रखते हुए स्थानीय थोक एवं खुदरा व्यापारी कई महीने पहले से ही फिरोजाबाद और अहमदाबाद के कुशल कारीगरों से संपर्क साध लेते हैं। वहां के कारीगरों को नए पैटर्न, आधुनिक डिजाइनों और विशेष रंग-संयोजन के ऑर्डर दिए जाते हैं ताकि सावन के पावन अवसर पर बीकानेर के बाजार में ग्राहकों को विविध प्रकार के विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।
दैनिक 10 लाख रुपये का कारोबार और व्यापारियों में उत्साह
सावन के आगमन से बीकानेर के चूड़ी व्यापार में जबरदस्त वित्तीय तेजी दर्ज की जा रही है। आम दिनों की तुलना में सावन के महीने में कांच की चूड़ियों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है। व्यापारी सुनील पुरोहित के अनुसार, अकेले उनकी दुकान पर सावन के इस त्योहारी सीजन में लगभग 1 लाख रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक की कांच की चूड़ियों की बिक्री सुगमता से हो जाती है।
यदि संपूर्ण बड़ा बाजार स्थित चूड़ी बाजार के समेकित कारोबार का आकलन किया जाए, तो इन दिनों प्रतिदिन करीब 8 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का वित्तीय लेन-देन हो रहा है। बाजार में खरीदारों की आवाजाही निरंतर बनी हुई है। व्यापारियों के आकलन के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 200 से 300 महिलाएं चूड़ियां खरीदने के लिए चूड़ी बाजार पहुंच रही हैं। बिक्री में आए इस शानदार उछाल और ग्राहकों की भारी भीड़ को देखकर स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिल उठे हैं तथा बाजार में सकारात्मक आर्थिक माहौल बना हुआ है।



















