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सीतामढ़ी में बांस की नई प्रजातियों से खेती में क्रांति, उमेश यादव ने दिखाई राहव्यापार
19 जून 2026, 10:10 pm (45 दिन पहले)· 2

सीतामढ़ी में बांस की नई प्रजातियों से खेती में क्रांति, उमेश यादव ने दिखाई राह

बिहार के सीतामढ़ी में किसान उमेश यादव खास किस्म के बांस की खेती कर रहे हैं, जिससे बेहतरीन फर्नीचर तैयार किया जा रहा है।

बिहार के सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर में उमेश यादव ने बांस की खेती को एक नई पहचान दी है। यहाँ मुख्य रूप से पिंक बांस, पीला बांस और बेत वाला बांस उगाया जा रहा है। इन प्रजातियों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनमें गांठें या कांटे बहुत कम होते हैं, जिससे इनसे तैयार फर्नीचर प्राकृतिक रूप से काफी चमकदार दिखता है। इस फर्नीचर की खासियत यह है कि इसमें अलग से पॉलिश या पेंट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे यह दिखने में अत्यंत आकर्षक लगता है।

फर्नीचर निर्माण में बेत वाले बांस की उपयोगिता

बेत वाले बांस की मांग फर्नीचर उद्योग में सबसे अधिक है। इसे गर्म पानी में डालकर आसानी से किसी भी आकार में मोड़ा जा सकता है, जो सोफा सेट, टेबल और कुर्सियां बनाने के लिए बेहद उपयुक्त है। स्थानीय कारीगर इस बांस का उपयोग टोकरी और डालिया जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें बनाने के लिए भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका में सुधार हुआ है।

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खेती की लागत और आधुनिक मशीनों की जरूरत

इन खास बांसों की खेती का खर्च सामान्य बांस की खेती के समान ही है। इसमें अतिरिक्त देखभाल या भारी निवेश की जरूरत नहीं पड़ती है। हालांकि, तकनीकी अभाव के कारण फिलहाल ये बांस स्थानीय बाजारों में 125 से 150 रुपये प्रति पीस की दर से बिक रहे हैं। उमेश यादव का मानना है कि यदि सरकार की तरफ से आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएं, तो यहाँ चीन के स्तर का विश्वस्तरीय फर्नीचर बनाया जा सकता है। मशीनों के आने से न केवल उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

सवाल-जवाब

सीतामढ़ी में कौन सी बांस की प्रजातियां उगाई जा रही हैं?
यहाँ मुख्य रूप से पिंक बांस, पीला बांस और बेत वाला बांस उगाया जा रहा है।
बेत वाला बांस फर्नीचर के लिए क्यों उपयुक्त है?
बेत वाला बांस गर्म पानी में आसानी से मुड़ जाता है, जिससे इसे कुर्सियों और सोफा सेट के लिए मनचाहा आकार देना सरल हो जाता है।
क्या इन बांसों की खेती बहुत महंगी है?
नहीं, किसान उमेश यादव के अनुसार इनकी खेती का खर्च सामान्य बांस की खेती जैसा ही है और इसमें अतिरिक्त रखरखाव की जरूरत नहीं होती।
फिलहाल ये बांस किस भाव में बिक रहे हैं?
तकनीकी मशीनों की कमी के कारण ये स्थानीय बाजारों में 125 से 150 रुपये प्रति बांस के भाव पर बिक रहे हैं।
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