टाटा समूह के शीर्ष प्रबंधन में चल रही रार के बीच एक बड़ा अंदरूनी संकट सामने आया है। समूह के भीतर वित्तीय वर्ष 2022 से लेकर अब तक व्हिसलब्लोअर तंत्र के जरिए 12,000 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। यह समय सीमा टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल से मेल खाती है। आंतरिक व्यवस्था में आई यह भारी हलचल दर्शाती है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित व्यापारिक घराने की कंपनियों के भीतर गवर्नेंस और कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष तेजी से गहरा रहा था।
साल 2024 के बाद शिकायतों में अप्रत्याशित उछाल
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल शिकायतों में से 80 प्रतिशत यानी करीब 9,600 मामले अकेले वर्ष 2024 से अब तक के समय में सामने आए हैं। इतनी बड़ी तादाद में कर्मचारियों और संबंधित पक्षों द्वारा उठाई गई आवाजें बताती हैं कि हाल के महीनों में समूह की विभिन्न कंपनियों में परिचालन और पारदर्शिता से जुड़ी चिंताएं चरम पर पहुंच गई थीं। व्हिसलब्लोअर पोर्टल पर दर्ज यह उछाल समूह के भीतर बढ़ रहे प्रशासनिक दबाव और असंतोष का सीधा संकेत देता है।
नेतृत्व विवाद और वित्तीय असर की पृष्ठभूमि
यह आंकड़ा ऐसे मोड़ पर सामने आया है जब टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच मतभेद खुलकर सतह पर आ चुके हैं। नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच रणनीतिक प्राथमिकताओं, पुनर्नियुक्ति और टाटा संस के संभावित आईपीओ को लेकर मतभेद की खबरें लगातार बनी हुई हैं। नोएल टाटा का पक्ष रहा है कि टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग से समूह का 150 साल पुराना पारंपरिक व्यावसायिक मॉडल प्रभावित हो सकता है, जिसके चलते उन्होंने लिस्टिंग के स्थान पर वैकल्पिक योजनाओं की वकालत की।
इस पूरे नेतृत्व गतिरोध और महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष मेहली मिस्त्री से जुड़े घटनाक्रमों के बीच बाजार पर भी इसका गहरा असर देखा गया। दोनों पक्षों की इस खींचतान के दौरान समूह के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में 39,000 करोड़ रुपये तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अब 12,000 शिकायतों का यह ब्योरा साफ करता है कि टाटा समूह की मौजूदा उथल-पुथल अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि इसकी जड़ें पिछले चार वर्षों के दौरान धीरे-धीरे मजबूत हो रही थीं।


















