त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई के बजट से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है। बाजार में तेजी से बढ़ रही चीनी की खुदरा कीमतों में 15 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय मोहल्लों और खुदरा दुकानों में दामों में आई इस कमी का असर अब सीधा दिखने लगा है, जिससे त्योहारी खरीदारी के दौरान आम परिवारों को मिठास के लिए जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी।
मिलों से लेकर खुदरा दुकानों तक नरम पड़े दाम
बाजार के जानकारों के अनुसार, खुदरा दुकानों पर आई यह नरमी अचानक नहीं हुई है बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से थोक और मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ था। हाल के दिनों में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 20 फीसदी तक की कमी आई थी, जिसका असर धीरे-धीरे अब खुदरा उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। इससे पहले खुदरा दरों में 10 फीसदी की कटौती देखी गई थी, जो अब बढ़कर 15 फीसदी तक पहुंच गई है।
सरकारी नीतियों और स्टॉक नियमों का दिखा असर
चीनी की दरों पर लगाम लगाने के लिए नीतिगत स्तर पर उठाए गए कदमों ने कीमतों को नीचे लाने में अहम भूमिका निभाई है। बाजार में आपूर्ति को सुचारू रखने के उद्देश्य से व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की समय-सीमा को बढ़ाकर 30 दिन किया गया था। इस व्यवस्था से जमाखोरी पर रोक लगी और खुले बाजार में आपूर्ति में सुधार हुआ, जिससे कीमतों पर दबाव कम हुआ।
त्योहारी मांग के बीच उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
अगस्त महीने की शुरुआत में मांग बढ़ने और आपूर्ति में अस्थायी अड़चनों के कारण चीनी के भाव में 10 से 15 प्रतिशत का उछाल आया था, जिससे त्योहारी पकवानों की लागत बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी। इस तेजी के बाद चीनी मिल कंपनियों के शेयरों में भी 11 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला था। हालांकि, समय रहते आपूर्ति सुधरने और थोक स्तर पर दबाव घटने के चलते खुदरा भाव सामान्य स्तर पर लौट आए हैं, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं और मिठाई निर्माताओं दोनों को सहूलियत मिली है।


















