अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के लगातार मजबूत होने से प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर दबाव गहराता जा रहा है। यूरो मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है। बुधवार को यूरो बनाम डॉलर (EUR/USD) की विनिमय दर गिरकर 1.1312 तक पहुंच गई, जो जनवरी महीने के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के सख्त मौद्रिक रुख के बावजूद यूरो अपनी मजबूती साबित करने में नाकाम रहा है, जिससे निवेशक इसे डॉलर के मजबूत विकल्प के तौर पर देखने से कतरा रहे हैं।
डॉलर के दबदबे और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का असर
अमेरिकी डॉलर के हालिया शानदार प्रदर्शन के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों में आए बदलाव की अहम भूमिका रही है। पहले जहां बाजार फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती या नरमी की उम्मीद कर रहा था, वहीं अब रुझान दरों को सख्त बनाए रखने की ओर मुड़ चुका है। इसी नीतिगत मोड़ ने गर्मियों से लेकर पिछले महीने तक डॉलर इंडेक्स को लगातार सहारा दिया है। इसके विपरीत, यूरो की सुस्त चाल ने भी मुद्रा जोड़ी में गिरावट को रफ्तार दी है। वर्ष 2025 के कुछ हिस्सों में एकल यूरोपीय मुद्रा ने डॉलर से बाहर निकलने वाले निवेश प्रवाह को आकर्षित किया था, लेकिन ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से हालात तेजी से बदले हैं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त रुख के बावजूद यूरो उस स्तर की मजबूती नहीं जुटा सका, जिससे सीधे तौर पर ग्रीनबैक को लाभ मिला।
सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की बादशाहत
ईरान युद्ध के आगाज के बाद डॉलर में आई जोरदार तेजी ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक उथल-पुथल के समय यह आज भी सबसे पसंदीदा सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। बीते साल बाजार के एक हिस्से ने डॉलर की इस साख पर सवाल उठाने शुरू किए थे, लेकिन वैश्विक भुगतान प्रणाली में अमेरिकी मुद्रा का बुनियादी दबदबा अब भी बरकरार है। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में डॉलर की यह केंद्रीय भूमिका इतनी मजबूत है कि इसे चुनौती देने में दशकों का समय लग सकता है। निवेशकों के लिए यूरो फिलहाल डॉलर का सशक्त विकल्प बनने के बजाय पिछड़ता दिख रहा है, हालांकि यूरोजोन में महंगाई का कोई नया झटका यूरो को अप्रत्याशित सहारा भी दे सकता है।
एशियाई कारोबार में अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं की स्थिति
अमेरिकी डॉलर के आक्रामक रुख का असर सिर्फ यूरो तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख एशियाई और वैश्विक मुद्राओं पर भी साफ देखा जा रहा है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) दो महीने के निचले स्तर के पास 0.6900 के मध्य दायरे में स्थिर रहा। अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) आंकड़ों ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंकाओं को कुछ हद तक शांत किया है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताएं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए हुए हैं। इस बीच, अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस आंकड़े का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सीमित असर ही देखने को मिला।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) गुरुवार को एशियाई सत्र में अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर पर 158.00 के पार कारोबार करता नजर आया। नरम अमेरिकी PCE आंकड़ों के बावजूद तेल आधारित मुद्रास्फीति के जोखिमों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिका रखा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध सुरक्षित विकल्प के रूप में डॉलर को समर्थन दे रहा है। डॉलर की यह व्यापक मजबूती बैंक ऑफ जापान (बीओजे) की संभावित ब्याज दर वृद्धि और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों पर भी भारी पड़ रही है।
कमोडिटी और सोना: तेजी की कोशिशों पर लगा ब्रेक
कीमती धातुओं के बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। मजबूत अमेरिकी डॉलर और तेजी से चढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा। शुरुआती सुधार के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का भाव (XAU/USD) 4,167 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रहा, जिसमें दिन के आधार पर 0.26 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। डॉलर और बॉन्ड यील्ड दोनों के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण पीली धातु अपनी शुरुआती बढ़त को और आगे बढ़ाने में संघर्ष करती नजर आई।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जारी दबाव
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी मंदी का असर साफ नजर आ रहा है। सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन मोटे तौर पर 82,500 डॉलर के समर्थन स्तर और 85,000 डॉलर के प्रतिरोध स्तर के बीच सिमटी हुई है। वहीं दूसरी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी एथेरियम भी भारी दबाव में है और 2,700 डॉलर के नीचे कारोबार कर रही है, जहां 2,600 डॉलर का स्तर उसके लिए तात्कालिक सहारा बना हुआ है। इसके साथ ही, रिपल (XRP) भी फिसलकर अपने महत्वपूर्ण 1.50 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है।
सितंबर एनएफपी आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की निगाहें
अमेरिकी डॉलर अब सितंबर महीने के नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) आंकड़ों की घोषणा की ओर बढ़ रहा है और यह अपने वार्षिक उच्चतम स्तरों के बिल्कुल नजदीक खड़ा है। इस बहुप्रतीक्षित रोजगार रिपोर्ट से ठीक पहले बाजार विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि NFP रिपोर्ट आने तक डॉलर में लिवाली जारी रहेगी और यह ऊपर की ओर एक नया ब्रेकआउट दे सकता है। वहीं अन्य विश्लेषकों का तर्क है कि हालिया रैली जरूरत से ज्यादा आगे निकल चुकी है और अब इसमें ठहराव या सुधार की गुंजाइश बन रही है।



















