बागवानी के शौकीन लोगों के घरों में गुलाब का पौधा अक्सर पहली पसंद होता है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में मौसम और जमीन खेती के साथ-साथ फूलों की बागवानी के लिए काफी मुफीद मानी जाती है। सरगुजा के कृषि विशेषज्ञ राकेश राजवाड़े बताते हैं कि गमले में गुलाब उगाने की योजना बनाते समय सही किस्म, बर्तन का आकार और मौसम का ध्यान रखना सबसे अहम होता है। यदि अक्टूबर और नवंबर के महीनों में पौधा लगाया जाए, तो उसे जड़ें जमाने और नई परिस्थितियों में ढलने के लिए आदर्श तापमान और वातावरण मिलता है। उचित पोषण और नियमित खाद की मदद से यह पौधा कड़ाके की ठंड में भी बिना नुकसान के जीवित रह सकता है।
गमले के अनुकूल गुलाब की प्रमुख किस्में
गुलाब की कई श्रेणियां होती हैं, लेकिन हर किस्म बड़े आंगन या खुले खेत जैसी जगह की मांग नहीं करती। गमलों में सीमित जगह के हिसाब से मिनिएचर गुलाब, फ्लोरीबंडा और हाइब्रिड टी सबसे मुफीद माने जाते हैं। मिनिएचर गुलाब आकार में काफी छोटे होते हैं, जिन्हें छोटे कंटेनर में संभालना बहुत आसान होता है। इस समूह में बेबी डार्लिंग और सैंड्रा जैसी किस्में गमलों के लिए बेहतरीन मानी जाती हैं। वहीं हाइब्रिड टी किस्म की खासियत यह है कि इसके एक तने पर एक बड़ा, बेहद खुशबूदार और आकर्षक फूल खिलता है। इसके उलट फ्लोरीबंडा में आने वाले फूल हाइब्रिड टी की तुलना में थोड़े छोटे होते हैं, लेकिन इनकी सघनता और खूबसूरती गमले की शोभा बढ़ाने के लिए काफी अच्छी रहती है।
गमले का चुनाव और ड्रेनेज व्यवस्था
गुलाब के पौधे की स्वस्थ बढ़त के लिए 12 से 16 इंच आकार का गमला लेना सबसे सही रहता है। गमले की तली में पानी की निकासी के लिए छेद होना बेहद जरूरी है। यदि अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकल पाता, तो गमले के भीतर जलभराव हो जाता है, जिससे पौधे की संवेदनशील जड़ें सड़ने और खराब होने लगती हैं। गमले के इस छेद को मिट्टी से पूरी तरह बंद नहीं होने देना चाहिए। मिट्टी भरने से पहले छेद पर किसी टूटे हुए गमले का टुकड़ा या खपरैल इस तरह रख देना चाहिए जिससे पानी आसानी से रिसकर बाहर बहता रहे और मिट्टी छेद को जाम न कर सके।
मिट्टी का सही मिश्रण कैसे बनाएं
गमले में गुलाब के लिए तैयार की जाने वाली मिट्टी हल्की, भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर होनी चाहिए। इस मिश्रण में 30% अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाना चाहिए। इसके साथ ही मिट्टी में कोकोपीट और रेत का संतुलन बनाना जरूरी होता है। कोकोपीट जहां मिट्टी के भीतर जरूरी नमी को लंबे समय तक बांधकर रखने में मदद करता है, वहीं रेत मिट्टी को सख्त होने से बचाती है, उचित जल निकासी सुनिश्चित करती है और जड़ों तक ताजी हवा का संचार बनाए रखती है।
पौधा लगाते समय जड़ों की सुरक्षा
नर्सरी या बाजार से नया पौधा लाकर गमले में रोपते समय उसकी जड़ों के आसपास चिपकी पुरानी मिट्टी को कभी नहीं हटाना चाहिए। पौधे के चारों ओर लिपटे प्लास्टिक कवर को बेहद सावधानी से काटें ताकि जड़ों को कोई झटका न लगे। मिट्टी को उसी मूल स्थिति में रखते हुए पौधे को नए गमले में स्थापित करें। अगर रोपाई के दौरान जड़ों को बहुत ज्यादा छेड़ा या हिलाया जाता है, तो पौधे को नए वातावरण में खुद को स्थापित करने में भारी परेशानी होती है और वह सूख भी सकता है।
ग्राफ्टिंग वाले हिस्से को सुरक्षित रखने का तरीका
गुलाब की रोपाई के दौरान सबसे अहम तकनीकी पहलू उसका ग्राफ्टिंग वाला जोड़ होता है। रोपाई करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि ग्राफ्ट वाला हिस्सा किसी भी सूरत में मिट्टी के नीचे न दबे। इसे मिट्टी की ऊपरी सतह से लगभग एक से दो इंच ऊपर खुला रखना जरूरी है। यदि ग्राफ्टेड हिस्सा मिट्टी के भीतर दब जाता है, तो पौधे की सामान्य बढ़त रुक सकती है और उसमें नई शाखाएं फूटने में रुकावट आ सकती है।
सिंचाई का सही तरीका और जलभराव से बचाव
नए पौधे को गमले में लगाने के तुरंत बाद एक बार भरपूर पानी देना चाहिए ताकि मिट्टी अच्छी तरह बैठ जाए। इसके बाद सिंचाई की आवृत्ति मौसम और गमले की नमी को देखकर तय करनी चाहिए। सर्दियों के दिनों में जरूरत के मुताबिक एक या दो दिन के अंतर पर पानी दिया जा सकता है, जबकि गर्मियों में तेज धूप के कारण मिट्टी तेजी से सूखती है, जिससे बार-बार पानी देने की जरूरत पड़ती है। पानी देने से पहले गमले की सतह को केवल ऊपर से देखकर फैसला न लें, बल्कि एक से दो इंच गहराई तक उंगली डालकर मिट्टी की नमी जांचें। यदि गहराई में मिट्टी सूखी लगे, तभी पानी डालें। यदि पानी देने के बाद वह नीचे के छेद से बाहर नहीं निकल रहा है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज न करें। तुरंत गमले से थोड़ी मिट्टी निकालकर जल निकासी को दुरुस्त करें, ताकि जड़ें गलने से बच सकें।



















