छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पुनर्वास नीति के जरिए मुख्यधारा में लौटे लोगों की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास और शैक्षणिक कार्यक्रमों के तहत छह पुनर्वासित माओवादियों ने 10वीं कक्षा की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली है। इनमें तीन अभ्यर्थी अकेले बस्तर जिले से ताल्लुक रखते हैं। राज्य सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और पढ़ाई की इच्छा रखने वालों को पूरा सहयोग देना है। इसी व्यवस्था के जरिए ओपन स्कूल प्रणाली से परीक्षा दिलाकर उन्हें औपचारिक शिक्षा से दोबारा जोड़ा गया है।
जंगल की बैठकों से संगठन में शामिल होने तक का सफर
सफलता हासिल करने वालों में शामिल गीता नुरोटे ने अपनी पुरानी जिंदगी और बदलाव की कहानी साझा की है। गीता पूर्व में माओवादी संगठन के भीतर डीवीसी पद पर सक्रिय थीं और वहां डॉक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालती थीं। उनका पैतृक गांव घने जंगली इलाके में स्थित है, जहां संगठन के सदस्यों का लगातार आना-जाना लगा रहता था और नियमित रूप से बैठकें आयोजित की जाती थीं।
इन चौपालों और बैठकों में प्रायः गरीब तबके के हक और अधिकार छिनने, जमीन अधिग्रहण के विवादों तथा महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों जैसे विषयों पर चर्चा होती थी। बचपन से ही ऐसे मुद्दों को सुनते रहने और कम उम्र में ही कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी का सामना करने की वजह से गीता ने माओवादी संगठन की राह चुनी थी।
हथियार के साथ भी नहीं छूटा किताबों का साथ
संगठन में सक्रियता के दौरान गीता इंसास बंदूक लेकर चलती थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका किताबों के प्रति आकर्षण कभी कम नहीं हुआ। वह संगठन में शामिल होने से पहले भी 10वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में संगठन के भीतर रहते हुए भी अध्ययन जारी रखा और आत्मसमर्पण करने के बाद भी इस शैक्षणिक सफर को टूटने नहीं दिया।
मुख्यधारा में लौटने के बाद गीता ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष 10वीं की परीक्षा में बैठने की अपनी इच्छा जताई, जिसे प्रशासन ने मंजूरी दे दी। इस तैयारी के दौरान आत्मसमर्पण कर चुके चैतू दादा ने उनकी पढ़ाई में अहम मार्गदर्शन किया। चैतू दादा ने पूर्व में संगठन में रहते हुए शिक्षक के तौर पर पढ़ाने का कार्य किया था। गीता ने मराठी माध्यम से अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की थी, इसलिए उन्हें हिंदी विषय समझने में थोड़ी कठिनाई आई, जबकि गृह विज्ञान विषय उनके लिए काफी सरल रहा।
12वीं के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य
10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद गीता के हौसले बुलंद हैं और उनका शैक्षणिक सफर यहीं रुकने वाला नहीं है। उनका अगला कदम 12वीं की पढ़ाई पूरी करना और उसके बाद नर्सिंग का औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करना है। संगठन में पहले से मेडिकल कार्य का अनुभव रखने वाली गीता अब नर्सिंग की डिग्री लेकर औपचारिक रूप से समाज और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहती हैं।



















