आज के दौर में सीमित ओवरों के क्रिकेट में जब बल्लेबाज क्रीज पर उतरते हैं, तो दर्शकों की नजरें तेज तर्रार अर्धशतक या सबसे तेज शतक के नए कीर्तिमानों पर टिकी होती हैं। आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े स्कोर आधुनिक एकदिवसीय क्रिकेट की पहचान बन चुके हैं। लेकिन इस प्रारूप के पन्नों में एक ऐसा मुकाबला भी दर्ज है, जिसे क्रिकेट इतिहास की सबसे सुस्त बल्लेबाजी के रूप में याद किया जाता है और शायद कोई भी आधुनिक बल्लेबाज अपने करियर में ऐसा रिकॉर्ड नहीं देखना चाहेगा।
1975 विश्व कप का वह मुकाबला जब थम गई थी रनों की रफ्तार
यह वाकया साल 1975 के पहले एकदिवसीय विश्व कप का है, जब भारतीय टीम का सामना इंग्लैंड से लंदन के मैदान पर हुआ था। उस दौर में आज की तरह बल्लेबाजों का आकलन सिर्फ उनके ऊंचे स्ट्राइक रेट से नहीं होता था, लेकिन इस मुकाबले में जो देखने को मिला उसने सभी को चौंका दिया। भारत के दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने पूरे मैच के दौरान क्रीज संभाली रखी, मगर रनों की गति बेहद धीमी रही। उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान केवल 20.68 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए, जो वनडे क्रिकेट के इतिहास में दर्ज सबसे धीमी पारियों में शामिल हो गया।
174 गेंदों का सामना और स्कोरबोर्ड पर नाबाद 36 रन
लंदन में खेले गए इस मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 60 ओवरों में 4 विकेट खोकर 334 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। उस जमाने में 335 रनों के लक्ष्य को हासिल करना बेहद कठिन माना जाता था। बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की ओर से सुनील गावस्कर ओपनिंग करने आए और अंत तक आउट नहीं हुए। उन्होंने कुल 174 गेंदों का सामना किया और महज 36 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की पूरी टीम 60 ओवरों की समाप्ति पर 3 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 132 रन ही जोड़ सकी। नतीजतन, इंग्लैंड ने यह एकदिवसीय मैच 202 रनों के बड़े अंतर से अपने नाम कर लिया।
मैदान पर उस धीमी बल्लेबाजी के पीछे की मुख्य वजहें
क्रिकेट विश्लेषकों और खुद सुनील गावस्कर के नजरिए से देखें तो इस तरह की पारी किसी भी बल्लेबाज को पसंद नहीं आ सकती। उस समय एकदिवसीय प्रारूप बिल्कुल नया था और मुकाबले 60-60 ओवरों के होते थे। खिलाड़ियों को इस फॉर्मेट का खास अनुभव नहीं था, इसलिए ज्यादातर बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट वाली मानसिकता के साथ ही मैदान में उतरते थे।
इंग्लैंड के 334 रनों के भारी भरकम स्कोर के सामने भारतीय टीम को यह लक्ष्य लगभग नामुमकिन लगने लगा था। ऐसे में गावस्कर ने क्रीज पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताने और मुकाबले को अभ्यास मैच की तरह खेलने का फैसला किया ताकि वे अपनी लय वापस पा सकें। इसके साथ ही, उस समय वह अपनी खराब फॉर्म से भी जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने जोखिम उठाने के बजाय सिर्फ विकेट बचाए रखने पर ध्यान दिया।





















