दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की मौजूदगी में भारत और जापान के बीच रिश्तों को नई ऊंचाई मिली। दोनों नेताओं की मौजूदगी में सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर हुए और पीएम मोदी ने ताकाइची को अपनी 'छोटी बहन' बताकर उनका आत्मीय स्वागत किया।
ताकाइची को बताया दूरदर्शी और लोकप्रिय नेता
पीएम मोदी ने कहा कि भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की पहली भारत यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने ताकाइची को जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बताते हुए उन्हें एक दूरदर्शी और लोकप्रिय नेता करार दिया। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि ताकाइची जापान के नारा प्रीफेक्चर से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक अहम केंद्र माना जाता है।
G7 समिट का जिक्र, भरोसे को बताया सबसे बड़ी ताकत
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कुछ दिन पहले हुए G7 समिट का हवाला दिया, जहां उन्होंने कहा था कि आज की वैश्विक उथल-पुथल के दौर में आपसी भरोसा ही किसी भी देश की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि भारत-जापान की साझेदारी इसी कसौटी पर खरी उतरती है। मोदी ने बताया कि भारत और जापान आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाते हैं और एक आजाद, समृद्ध और नियमों पर आधारित इंडो पैसिफिक क्षेत्र दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है।
AI पर संयुक्त बयान, डिफेंस में पहला सह-विकास समझौता
पीएम मोदी ने कहा कि वे और प्रधानमंत्री ताकाइची दोनों मानते हैं कि टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग का सबसे मजबूत आधार बनेगी। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में एक संयुक्त बयान जारी किया। पीएम मोदी के मुताबिक जापान की सटीक तकनीक और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का मेल वैश्विक स्तर पर AI के विकास को नई रफ्तार और मजबूती देगा। इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में भी बड़ा कदम उठाते हुए भारत और जापान ने अपनी पहली सह-विकास परियोजना को लेकर समझौते पर दस्तखत किए।
सेमीकंडक्टर से लेकर सप्लाई चेन तक हुई बातचीत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि इस शिखर बैठक का मकसद भरोसे, साझा मूल्यों और रणनीतिक साझेदारी पर टिके भारत-जापान संबंधों को नई गति देना था। दोनों नेताओं ने आपसी आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। बातचीत के दौरान खासतौर पर सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, दवा उद्योग, AI, नई उभरती तकनीकों और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
तीन दिन के दौरे पर हैं ताकाइची, 16वें शिखर सम्मेलन में लेंगी हिस्सा
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इसी दौरान वे 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगी, जिसमें दोनों देश द्विपक्षीय रिश्तों के हर पहलू की समीक्षा करेंगे और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस यात्रा का मकसद रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना है।
बिजनेस फोरम में भी होंगी शामिल, 2027 में पूरे होंगे 75 साल
अपने भारत दौरे के दौरान ताकाइची भारत-जापान बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत और सरकार के प्रतिनिधि निवेश, व्यापार और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि भारत और जापान के रिश्ते बीते कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। साल 2014 में दोनों देशों के संबंधों को विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का दर्जा दिया गया था और 2027 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 साल पूरे करेंगे।
पिछले साल टोक्यो गए थे पीएम मोदी
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त 2025 में टोक्यो गए थे, जहां उन्होंने 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। दोनों देशों के बीच हर साल होने वाला यह शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का सबसे अहम मंच माना जाता है।













