अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर भारत के प्रतिभाशाली युवाओं का डंका लगातार बज रहा है. वियतनाम की राजधानी हनोई में संपन्न हुए इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑन एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IOAA) 2026 में भारतीय दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तिरंगा लहराया है. इस प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिता में नोएडा के 12वीं कक्षा के छात्र सुमंत गुप्ता ने देश के लिए प्रतिष्ठित गोल्ड मेडल हासिल किया. 25 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चली इस अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में दुनिया भर के 64 देशों की टीमों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था, जिसमें सुमंत पांच सदस्यीय भारतीय राष्ट्रीय दल के अहम सदस्य के रूप में शामिल थे.
नोएडा स्थित एएसपीएएम स्कॉटिश स्कूल में पढ़ने वाले और फिजिक्सवाला (PW) विद्यापीठ के छात्र सुमंत गुप्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह लगातार दूसरा पदक है. इससे पहले वर्ष 2025 में उन्होंने इसी प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था. पिछले साल के रजत पदक को इस बार स्वर्ण पदक में बदलकर सुमंत ने साबित कर दिया कि निरंतर प्रयास और आत्ममंथन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
बोर्ड, जेईई और ओलंपियाड के बीच संतुलन
सुमंत के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था क्योंकि उनके सामने एक ही समय पर 12वीं की बोर्ड परीक्षा, संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) और अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड जैसी तीन बेहद कठिन चुनौतियों का सामना करने की जिम्मेदारी थी. उन्होंने एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड की तैयारी पिछले दो वर्षों से शुरू कर रखी थी, जबकि इस विशेष चक्र की औपचारिक तैयारी पिछले वर्ष नवंबर में शुरू की गई थी. इस लंबे सफर के दौरान उन्होंने सबसे पहले अपनी कमजोरियों और कमियों को बारीकी से समझा और फिर योजनाबद्ध तरीके से उन पर काम किया.
अपनी दिनचर्या के बारे में बात करते हुए सुमंत ने स्पष्ट किया कि वह प्रतिदिन चार से पांच घंटे का समय केवल सेल्फ स्टडी के लिए समर्पित करते थे. जेईई और ओलंपियाड दोनों के पाठ्यक्रम और दृष्टिकोण में काफी अंतर होता है, जिसके कारण दोनों को एक साथ साधना मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण था. समय के बेहद अनुशासित और सटीक इस्तेमाल ने उन्हें इस संतुलन को साधने में सबसे बड़ी मदद पहुंचाई.
शिक्षकों और परिवार का अटूट सहयोग
अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय सुमंत ने अपने माता-पिता, अपने नाना और संस्थान के शिक्षकों को दिया है. उनके शिक्षकों ने भी माना कि एक विद्यार्थी के लिए इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के साथ ओलंपियाड के जटिल खगोल भौतिकी विषयों पर समान पकड़ बनाए रखना टाइम मैनेजमेंट की सबसे कठिन परीक्षा होती है. अलग-अलग विषयों की मांगों को पूरा करने के लिए शिक्षकों ने उनके व्यक्तिगत संशय दूर करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित कीं.
शिक्षकों ने रेखांकित किया कि पिछले साल जब सुमंत ने सिल्वर मेडल जीता था, तब उन्होंने अपनी रणनीतिक गलतियों का गहरा विश्लेषण किया था. उस अनुभव से सीख लेते हुए उन्होंने इस बार अधिक आत्मविश्वास, स्पष्ट सोच और व्यापक तैयारी के साथ हनोई में कदम रखा, जिसका सकारात्मक परिणाम स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया.
राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों पर उपलब्धियों की लंबी कतार
सुमंत गुप्ता की प्रतिभा केवल खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि गणित और सामान्य विज्ञान की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है. उनके प्रमुख शैक्षणिक पड़ावों में ये उपलब्धियां शामिल हैं
- वर्ष 2024 में आयोजित इंटरनेशनल जूनियर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स ओलंपियाड में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था और वैश्विक स्तर पर 5वीं रैंक प्राप्त की थी.
- वर्ष 2025 के सीनियर एस्ट्रोनॉमी ओरिएंटेशन-कम-सेलेक्शन कैंप में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल करने के साथ बेस्ट इन ऑब्जर्वेशन अवॉर्ड जीता था.
- वर्ष 2026 में इसी ओरिएंटेशन कैंप के दौरान उन्हें बेस्ट सॉल्यूशन इन थ्योरी अवॉर्ड से नवाजा गया.
- सिंगापुर एंड एशियन स्कूल्स मैथ ओलंपियाड में सुमंत ने वैश्विक स्तर पर रैंक 1 हासिल करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था.
- अमेरिकन इन्विटेशनल मैथमेटिक्स एग्जामिनेशन (AIME) में उन्होंने 15 में से 15 का परफेक्ट स्कोर किया और यूएसएएमओ के लिए क्वालीफाई किया, जबकि नेशनल एस्ट्रोनॉमी कॉम्पिटिशन में भी गोल्ड मेडल जीता.
युवा विज्ञान साधकों को सुमंत का संदेश
सुमंत ने बताया कि वैश्विक स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनके पूरे जीवन का सबसे अविस्मरणीय और गौरवशाली पल रहेगा. दुनिया भर के 64 देशों के सबसे प्रतिभाशाली छात्रों के बीच तिरंगे का प्रतिनिधित्व करना किसी भी युवा के लिए अद्वितीय सम्मान की बात होती है. उन्होंने विज्ञान और अनुसंधान में रुचि रखने वाले स्कूली विद्यार्थियों को ओलंपियाड जैसी गंभीर प्रतियोगिताओं में भाग लेने की पुरजोर सलाह दी. उनका दृढ़ विश्वास है कि यदि छात्र के पास मजबूत इच्छाशक्ति, नियमित अभ्यास और समय का सही प्रबंधन हो, तो वह स्कूली बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ ओलंपियाड में भी देश का नाम रोशन कर सकता है.



















