सिनेमा जगत में फिल्मों की विषयवस्तु और कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर अक्सर व्यापक विमर्श देखने को मिलता है। हरियाणा के रोहतक स्थित सुपवा यूनिवर्सिटी के परिसर में आयोजित हाइफा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान जाने-माने अभिनेता यशपाल शर्मा ने फिल्मों के निर्माण, कलाकारों के दृष्टिकोण और नए अवसरों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कला को किसी संकीर्ण दायरे में सीमित नहीं किया जा सकता और फिल्मों का निर्माण किसी पूर्वाग्रह या एजेंडे के बजाय निष्पक्ष भावना के साथ होना चाहिए।
फिल्मों में नीयत और एजेंडे पर स्पष्ट दृष्टिकोण
धार्मिक विषयों पर बनने वाले सिनेमा की चर्चा करते हुए यशपाल शर्मा ने रेखांकित किया कि आस्था या धर्म से जुड़े विषयों पर फिल्म बनाना कतई गलत नहीं है, बल्कि यह एक सराहनीय पहल हो सकती है। हालांकि उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ऐसी फिल्मों के निर्माण के पीछे की नीयत पूरी तरह पारदर्शी और साफ होनी चाहिए। जब किसी रचना के पीछे कोई खास राजनीतिक झुकाव या छिपा हुआ एजेंडा शामिल हो जाता है, तब वह अपनी रचनात्मक दिशा से भटक जाती है।
शर्मा का मानना है कि सिनेमा का निर्माण किसी विशेष राजनीतिक दल के हित साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। फिल्म ‘हनुमान अंश’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि यह फिल्म अपनी खुद की काबिलियत और सामग्री के बल पर आगे बढ़ी है। भविष्य में इस श्रेणी की और अधिक फिल्मों का निर्माण होना चाहिए, लेकिन कहानी की सच्चाई और बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रस्तुतीकरण को हमेशा प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सच्चे कलाकार की भूमिका और सामाजिक दायरा
रचनात्मकता और कलाकार की पहचान पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक सच्चा रचनाकार जाति और धर्म की सीमाओं से पूरी तरह परे होता है। किसी भी निष्पक्ष कलाकार के लिए पूरा समाज और सभी दर्शक एक समान होते हैं। जब कोई कलाकार अपनी कला को किसी खास पहचान या समूह तक सीमित नहीं करता, तभी समाज में कला का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो पाता है।
स्थानीय प्रतिभाओं के लिए मंच और अंतरराष्ट्रीय विस्तार
सुपवा यूनिवर्सिटी में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय समारोह के महत्व पर चर्चा करते हुए अभिनेता ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन क्षेत्रीय प्रतिभाओं को निखारने के लिए बेहद आवश्यक हैं। हरियाणा में पुरस्कार समारोहों की परंपरा पहले से रही है, लेकिन इस आयोजन का यह पहला साल बेहद भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। यहां देश और दुनिया भर के बेहतरीन सिनेमा के साथ-साथ हरियाणवी फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जा रहा है, जो स्थानीय सिनेमा को वैश्विक पटल पर ले जाने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि पहले वर्ष के आयोजनों में कुछ कमियां रह जाना स्वाभाविक है, लेकिन निरंतर सुधार के माध्यम से इसे भविष्य में और बेहतर रूप दिया जाएगा। इस फेस्टिवल में फिल्म निर्माताओं के लिए विशेष मास्टर क्लास का भी प्रावधान रखा गया है, जिसमें लेखक और निर्देशक अश्विनी चौधरी तथा अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। इससे युवा निर्देशकों और तकनीशियनों को सिनेमा की व्यावहारिक बारीकियों को सीखने का अवसर मिल रहा है।
युवा कलाकारों को आगे बढ़ने और ऑडिशन की सलाह
हरियाणा के युवा कलाकारों और सुपवा से प्रशिक्षित हो रहे विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए यशपाल शर्मा ने कहा कि आज के समय में नए कलाकारों के सामने अवसरों की कोई कमी नहीं है। हर चौथे दिन विभिन्न भूमिकाओं के लिए ऑडिशन के नोटिस जारी किए जाते हैं। उन्होंने अभिनय में रुचि रखने वाले युवाओं से आह्वान किया कि वे झिझक छोड़कर ऑडिशन दें और पूरी तरह से अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर पहचान बनाएं।
दिशा सालियान मामले पर पारदर्शी जांच की मांग
दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में आदित्य ठाकरे और रिया चक्रवर्ती के संदर्भ पर पूछे गए सवाल पर यशपाल शर्मा ने कहा कि उन्हें इस प्रकरण की पूरी और विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसे मामलों में पूरी निष्पक्षता और गहराई से जांच की जानी चाहिए ताकि वास्तविक सच जनता के सामने आ सके। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष, ताकि न्याय की मर्यादा बनी रहे।


















