घरेलू बॉक्स ऑफिस पर उनतालीस दिनों के भीतर दो सौ बाईस करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करके चर्चा में आए सिनेमाई प्रोजेक्ट 'हनुमान अंश' के बाद इसके निर्देशक ने नए सफर की शुरुआत की है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने गणेश चतुर्थी के मौके पर महाकवि तुलसीदास की जीवन यात्रा पर केंद्रित एक नई परियोजना की घोषणा की, जिसका नाम उन्होंने 'राम बोला' रखा। इस सार्वजनिक ऐलान के तुरंत बाद मनोरंजन जगत में अप्रत्याशित टकराव की स्थिति पैदा हो गई, क्योंकि जाने-माने फिल्मकार डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भी इसी विषय और इसी नाम पर अपनी आगामी कृति तैयार करने की बात कही थी।
एक ही विषय और एक ही नाम पर दो अलग-अलग दावे
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही दिग्गज सिनेमाई हस्तियां तुलसीदास के जीवन चरित्र को केंद्र में रखकर अपनी-अपनी कहानी पर्दे पर उतारने की तैयारी में जुटी हैं। डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी जिस प्रोजेक्ट की कमान संभाल रहे हैं, उसके निर्माण से मधु मंटेना और मंदिरा द्विवेदी का नाम जुड़ा हुआ है। दोनों निर्माताओं और निर्देशकों के बीच तब गतिरोध खुलकर सामने आया जब एक जैसी विषयवस्तु के साथ-साथ दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए 'राम बोला' नाम का ही चुनाव सामने आया। प्रोडक्शन हाउस महावीर जैन से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, यह शीर्षक पहले ही विशाल चतुर्वेदी के पक्ष में पंजीकृत कराया जा चुका था, क्योंकि वे कुछ समय पूर्व अपनी यह परिकल्पना लेकर निर्माताओं के पास पहुंचे थे।
अधिकारों को लेकर नाराजगी और संस्था का हस्तक्षेप
विशाल चतुर्वेदी की ओर से शीर्षक की सार्वजनिक घोषणा किए जाने पर चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि इस नाम के वैध अधिकार उनके पास होने चाहिए, क्योंकि उन्होंने कुछ महीने पहले ही महावीर जैन के साथ इस परियोजना को लेकर औपचारिक बातचीत की थी। जब विवाद गहराने लगा, तब सिनेमाई संस्था 'इंडियन मोशन पिक्चर आर्टिस्ट एसोसिएशन' ने इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। संस्था ने अपने आधिकारिक पत्र में यह साफ कर दिया कि 'राम बोला' शीर्षक वैधानिक रूप से विशाल चतुर्वेदी के नाम पर दर्ज है। विशाल चतुर्वेदी ने तेईस जून को आयोजित एसोसिएशन की बैठक में इस शीर्षक के पंजीकरण का आवेदन दिया था, जिसके बाद समिति ने चार सितंबर को उनके नाम पर विधिवत अनुमति पत्र जारी कर दिया।
अनुभवी बनाम नए दौर के निर्देशक की पृष्ठभूमि
सिनेमा और धारावाहिकों की दुनिया में डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी का योगदान दशकों पुराना और प्रतिष्ठित रहा है। वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्म 'पिंजर' और बड़े बजट की ऐतिहासिक फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' जैसी कृतियों का निर्देशन कर चुके हैं। छोटे पर्दे पर वर्ष 1991 के ऐतिहासिक धारावाहिक 'चाणक्य' के निर्देशन और उसमें मुख्य भूमिका निभाने के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है, जबकि 1996 में प्रसारित धारावाहिक 'मृत्युंजय' का निर्देशन भी उन्हीं के हाथों हुआ था। दूसरी तरफ, विशाल चतुर्वेदी सिनेमा उद्योग में तुलनात्मक रूप से नए दौर के रचनाकार हैं। चिकित्सा क्षेत्र का अपना पेशा छोड़कर मनोरंजन जगत की राह पकड़ने वाले विशाल पूर्व में 'सुनो ना' और 'रब करे तू भी' जैसी फिल्मों से लेखक और निर्देशक के रूप में जुड़े रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर हालिया बड़ी सफलता ने उनके नए प्रोजेक्ट्स के प्रति दर्शकों और फिल्म जगत दोनों की दिलचस्पी काफी बढ़ा दी है।


















