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बघेलखंड में मीठी बूंदी और तीखी सेव का नायाब मेल, जानें क्यों खास है यह पारंपरिक जायकाखानपान
1 अक्तू॰ 2026, 12:49 pm (53 मिनट पहले)· 0

बघेलखंड में मीठी बूंदी और तीखी सेव का नायाब मेल, जानें क्यों खास है यह पारंपरिक जायका

मध्य प्रदेश के बघेलखंड अंचल में मीठी बूंदी को कुरकुरी नमकीन सेव के साथ परोसने की पुरानी परंपरा है, जो सात्विक मिठास और तीखेपन का अनोखा स्वाद देती है।

मध्य प्रदेश का बघेलखंड इलाका अपनी विशिष्ट बोली और अनूठी संस्कृति के साथ अपने खास खानपान के लिए भी जाना जाता है। इस अंचल में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या पर्व पर पारंपरिक मीठी बूंदी की मौजूदगी अनिवार्य मानी जाती है। बेसन, शुद्ध घी या तेल, चीनी और इलायची की महक से सजने वाली यह पारंपरिक मिठाई न केवल बहुत जल्दी तैयार हो जाती है, बल्कि ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी बाजारों तक हर आयु वर्ग के लोगों की पसंदीदा बनी हुई है।

चाशनी और बेसन से तैयार होने की सीधी विधि

इस पारम्परिक मिष्ठान को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद व्यवस्थित और सरल है। सबसे पहले बेसन में आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर एक चिकना और पतला घोल बना लिया जाता है। इसके बाद कड़ाही में घी अथवा तेल को अच्छी तरह गर्म किया जाता है। एक विशेष छिद्रदार झारे के ऊपर बेसन का घोल डालकर गर्म कड़ाही में गोल-गोल बूंदियां झारी जाती हैं और उन्हें कुरकुरा होने तक तला जाता है।

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बूंदी तलने के समानांतर ही एक दूसरे बर्तन में चीनी और पानी मिलाकर चाशनी बनाई जाती है। चाशनी का स्वाद और रूप निखारने के लिए उसमें कुटी हुई इलायची के साथ केसर अथवा खाद्य रंग मिलाया जाता है। तली हुई गरम बूंदियों को इस तैयार चाशनी में डुबोकर लगभग आधे घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। इस समयावधि में बूंदियां चाशनी को भीतर तक सोख लेती हैं और पूरी तरह रसीली तथा नरम बन जाती हैं।

सत्यनारायण कथा के प्रसाद से लेकर हलवाई की दुकान तक

रीवा शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र शिल्पी प्लाजा में बंगाल स्वीट्स नाम से प्रतिष्ठान चलाने वाले पवन चौरसिया करीब 30 वर्षों से नियमित रूप से यह पारंपरिक मिष्ठान तैयार कर रहे हैं। उनके अनुसार यह बघेलखंड की अपनी मूल देसी मिठाई है, जिसे मांगलिक अवसरों और घरों में पधारने वाले अतिथियों के सत्कार में प्रमुखता से परोसा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अंतर्गत सत्यनारायण भगवान की कथा में इसे मुख्य प्रसाद के तौर पर अर्पित करने और श्रद्धालुओं में वितरित करने का बहुत पुराना रिवाज है। स्थानीय बाजार में उनके प्रतिष्ठान पर यह रसीली बूंदी ₹200 प्रति किलो के भाव पर ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराई जाती है।

नमकीन सेव संग मीठी बूंदी की अनूठी जुगलबंदी

बघेलखंड के कस्बों और गांवों में इस मिठाई को अकेले खाने के बजाय एक बेहद दिलचस्प अंदाज में खाया जाता है। यहां के लोग मीठी बूंदी के साथ तीखी और बेहद कुरकुरी सेव या भुजिया मिलाकर खाते हैं। मीठे और चटपटे नमकीन का यह स्वाद संतुलन सुबह के नाश्ते के अलावा तीज-त्योहारों पर विशेष पहचान रखता है। इसके अलावा शाम के समय गर्म चाय की चुस्कियों के साथ भी इस चटपटे-मीठे मेल का नाश्ता क्षेत्र के लोगों को खूब लुभाता है।

सवाल-जवाब

मीठी बूंदी बनाने के लिए किन मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
इसे तैयार करने के लिए बेसन, पानी, तलने के लिए घी या तेल, चीनी, इलायची और केसर अथवा रंग की आवश्यकता होती है।
तली हुई बूंदी को चाशनी में कितनी देर भिगोकर रखा जाता है?
तली हुई बूंदी को पूरी तरह रसीली और नरम होने के लिए चाशनी में लगभग आधे घंटे तक डुबोकर रखा जाता है।
बघेलखंड में मीठी बूंदी को किस नमकीन के साथ मिलाकर खाया जाता है?
बघेलखंड के कस्बों और गांवों में इसे अक्सर तीखी, कुरकुरी सेव या भुजिया के साथ मिलाकर नाश्ते के रूप में खाया जाता है।
रीवा के शिल्पी प्लाजा स्थित बंगाल स्वीट्स में मीठी बूंदी का क्या भाव है?
बंगाल स्वीट्स में यह पारंपरिक मीठी बूंदी ₹200 प्रति किलो के भाव से मिलती है।
मीठी बूंदी का मुख्य रूप से किस धार्मिक अनुष्ठान में प्रसाद के रूप में प्रयोग होता है?
सत्यनारायण भगवान की कथा में इसे पारंपरिक रूप से भोग लगाने और प्रसाद वितरण के लिए खास तौर पर बनाया जाता है।
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