मिठाई के शौकीनों के बीच मथुरा पेड़े की पहचान उसके खास सोंधे स्वाद और गहरे भूरे रंग की वजह से होती है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाले सामान्य पेड़े हल्के रंग के होते हैं, लेकिन मथुरा शैली के पेड़े को तैयार करने की तकनीक बिल्कुल अलग होती है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर में बब्बी रेस्टोरेंट चलाने वाले हलवाई जगपाल के अनुसार, इस पारंपरिक मिठाई की असली मिठास घंटों की मेहनत और धीमी आंच पर मावे की सही भुनाई पर निर्भर करती है।
लकड़ी के चूल्हे और लोहे की कड़ाही में गाढ़ा होता है दूध
इस पेड़े को तैयार करने की शुरुआत बिल्कुल बुनियादी तरीके से की जाती है। सबसे पहले ताजे दूध को लोहे की एक बड़ी कड़ाही में डाला जाता है। इसे पकाने के लिए मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की धीमी आग जलाई जाती है। दूध को कड़ाही में लगातार चलाना बेहद जरूरी होता है, ताकि वह पेंदे में जले नहीं और धीरे-धीरे गाढ़ा होकर खोवा यानी मावा बन जाए। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।
मावा लाल होने तक भुनाई और सही मीठे का फॉर्मूला
जब दूध पूरी तरह मावा बन जाता है, तब असली प्रक्रिया शुरू होती है। हलवाई जगपाल के मुताबिक, मावे को अलग से दूसरी कड़ाही में डालकर तब तक भूना जाता है जब तक कि उसका रंग गहरा लाल या भूरा न हो जाए। इस पेड़े का असली फॉर्मूला यही है कि इसमें मिठास सीमित रखी जाती है। एक किलो भुने हुए मावे में केवल 200 से 250 ग्राम शक्कर मिलाई जाती है। शक्कर की मात्रा कम रखने से मिठाई अत्यधिक मीठी नहीं लगती और मावे का प्राकृतिक स्वाद बना रहता है।
घुटाई का देसी तरीका और इलायची की खुशबू
मावे में चीनी और पिसी हुई छोटी इलायची का पाउडर मिलाने के बाद मिश्रण की घुटाई की जाती है। इसे अच्छी तरह एकसार करने के लिए पारंपरिक रूप से स्टील के लोटे का उपयोग किया जाता है। लोटे से दबा-दबाकर घोटने के बाद जब यह चिकना और मुलायम मिश्रण बन जाता है, तब हाथों से गोल-गोल छोटे पेड़े गढ़े जाते हैं। इलायची पाउडर की खुशबू इस पेड़े के स्वाद को और अधिक निखार देती है।
बिना मिलावट का दावा और 400 रुपये प्रति किलो कीमत
हलवाई जगपाल स्पष्ट करते हैं कि इस पेड़े को पूरी तरह देसी अंदाज में बिना किसी मिलावट के बनाया जाता है। शुद्ध दूध और घंटों की मेहनत की वजह से यह पेड़ा बब्बी रेस्टोरेंट में 400 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाता है। मांग के अनुसार इसे खास आर्डर पर भी तैयार किया जाता है। स्वाद के कद्रदान इसकी शुद्धता और अनोखे जायके के कारण इसे ऊंची कीमत पर भी खुशी-खुशी खरीदते हैं।



















