सुपरफूड की श्रेणी में गिनी जाने वाली अलसी पोषक तत्वों का बड़ा स्रोत है, जिसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन और कई जरूरी खनिज प्रचुर मात्रा में मौजूद रहते हैं। अक्सर लोग इसके कच्चे स्वाद की वजह से इसे सीधे चबाने से कतराते हैं, लेकिन मसालों के साथ तैयार की गई इसकी चटपटी चटनी स्वाद और पोषण का शानदार संतुलन बना देती है। यह सूखी चटनी सामान्य भोजन का जायका बढ़ाने के साथ शरीर को जरूरी पौष्टिक तत्व देने का काम करती है।
मसालों और बीजों की सही भुनाई
इस चटनी को तैयार करने की शुरुआत अलसी को भूनने से होती है। इसके लिए एक भारी तले की कढ़ाई को मध्यम आंच पर गर्म किया जाता है और अलसी के बीजों को बिना तेल या घी के सूखा ही डाला जाता है। लगभग 3 से 4 मिनट तक लगातार चलाते हुए भूनने पर जब बीज चटकने लगें और सौंधी सुगंध आने लगे, तब आंच तुरंत बंद कर देनी चाहिए। अलसी को निर्धारित समय से अधिक नहीं पकाना चाहिए, क्योंकि अधिक भूनने से बीजों का स्वाद कड़वा हो जाता है और चटनी का स्वाद बिगड़ सकता है।
अलसी को अलग निकालने के बाद उसी गर्म बर्तन में जीरा, तिल और सूखी लाल मिर्च को भी हल्का सा सूखा भून लिया जाता है। जो लोग चटनी में लहसुन का स्वाद पसंद करते हैं, वे लहसुन की कलियों को भी इसी दौरान हल्का सा सेंक सकते हैं। जब ये सभी सामग्रियां भुन जाएं, तो पीसने से पहले इन्हें पूरी तरह से ठंडा होने देना जरूरी होता है।
दरदरा पीसने और सुरक्षित रखने की विधि
मसालों और बीजों के सामान्य तापमान पर आने के बाद उन्हें मिक्सी के जार में डाला जाता है। जार में भुनी हुई अलसी, जीरा, लाल मिर्च, तिल और भुने लहसुन के साथ अमचूर पाउडर, हींग, काला नमक और सादा नमक मिलाया जाता है। इस मिश्रण को मिक्सी में दरदरा पीसा जाता है। इसे बहुत ज्यादा बारीक या महीन पाउडर बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि दरदरापन ही इस चटनी को विशेष बनावट और कुरकुरा स्वाद देता है।
तैयार सूखी चटनी को नमी से बचाकर किसी साफ और हवा बंद डिब्बे में संग्रहित करना चाहिए। यह चटनी बिना खराब हुए 15 से 20 दिनों तक इस्तेमाल की जा सकती है, जिससे इसे एक बार बनाकर कई हफ्तों तक खाया जा सकता है।
सेहत के लाभ और परोसने के विकल्प
पोषक तत्वों के लिहाज से अलसी की चटनी पाचन तंत्र और हृदय दोनों के लिए लाभकारी है। इसमें मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पाचन क्रिया को सुचारू रखने में मददगार होते हैं, जबकि ओमेगा 3 फैटी एसिड हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में सहयोग करता है। दैनिक आहार में सीमित मात्रा में इसे शामिल करने से स्वाद के साथ आवश्यक पोषण प्राप्त होता है।
इस चटनी को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के साथ परोसा जा सकता है। यह देसी घी लगी सामान्य गेहूं की रोटी, बाजरे की रोटी, भरवां पराठे और दाल-चावल के साथ बहुत स्वादिष्ट लगती है। इसके अलावा इडली, ढोकला या अन्य स्नैक्स के साथ भी इसका सेवन किया जा सकता है। कई लोग इस चटनी को ताजे गाढ़े दही में मिलाकर रायते या डिप की तरह भी उपयोग में लाते हैं।



















