वाइट हाउस वार्ता: यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल उत्पादन लाइसेंस के लिए वॉशिंगटन पहुंचे जेलेंस्की, ट्रंप से करेंगे अहम बैठकचीन में 90 साल की महिला 20 वर्ष तक जिंदा हैंड ग्रेनेड से तोड़ती रही अखरोट, मजदूर ने देख पुलिस को दी सूचनाबेलेघाटा से तृणमूल कांग्रेस नेता राजू नस्कर पुलिस कस्टडी में, रंगदारी और धमकी के आरोपों पर बड़ा एक्शनरसोई की चुभती बीप का इलाज: स्टारलिंग के जोएल कोरेलिट्ज़ और कोलिन कूगन ने C++ कोड से सुधारी माइक्रोवेव की आवाज़त्वचा को चमकदार और टाइट बनाने के लिए घर पर तैयार करें चावल के मांड की नेचुरल कोलेजन क्रीम, जानें आसान तरीकाशादियों की विदाई में आज भी छाया रहता है 1989 का क्लासिक ट्रैक, 37 सालों से कायम है पद्मिनी कोल्हापुरे और मिथुन चक्रवर्ती के इस इमोशनल गाने की जगहलोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा, शशि थरूर ने रखी अपनी बातभारतीय क्रिकेट टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने दिया इस्तीफा, कोलकाता नाइट राइडर्स की कोचिंग में होगी वापसीऐप्पल ने स्मार्टवॉच सीरीज में किया बड़ा बदलाव, जानें सीरीज 11 और वॉच अल्ट्रा 3 के नए फीचर्सअपने जन्मदिन पर हुमा कुरैशी ने दिया सरप्राइज, महारानी सीजन 5 की शूटिंग का किया आधिकारिक ऐलान
बिहार के छपरा की मशहूर 'एटम बम' मिठाई: 1953 से शुद्ध छेना का जायका, अब तीसरी पीढ़ी थामे है दादा की विरासतखानपान
13 जून 2026, 10:42 pm (45 दिन पहले)· 0

बिहार के छपरा की मशहूर 'एटम बम' मिठाई: 1953 से शुद्ध छेना का जायका, अब तीसरी पीढ़ी थामे है दादा की विरासत

छपरा के ताजपुर बाजार में सात दशक से बन रही 'एटम बम' मिठाई आज भी शुद्ध छेना और उसी पुराने स्वाद के लिए मशहूर है, जिसे हिरोशिमा पर गिरे परमाणु बम की चर्चा से नाम मिला था।

मिठाई की दुकानों पर आमतौर पर लड्डू, बर्फी या रसगुल्ले जैसे नाम सुनने को मिलते हैं, लेकिन छपरा के ताजपुर बाजार में एक मिठाई ऐसी है जिसका नाम सुनते ही ग्राहक के चेहरे पर हैरानी के साथ मुस्कान आ जाती है — 'एटम बम'। यह कोई आधुनिक मार्केटिंग की चाल नहीं, बल्कि इस नाम के पीछे दुनिया को हिला देने वाली एक ऐतिहासिक घटना की कहानी छिपी है।

बताया जाता है कि जिस दौर में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था, उस घटना की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही थी। उन्हीं दिनों स्वर्गीय बिंदेश्वरी सिंह, जिन्हें लोग प्यार से भाई जी कहते थे, अपनी दुकान पर मिठाई तैयार कर रहे थे। आसपास लोगों की जुबान पर बस इसी हमले की बातें थीं। यही चर्चा सुनते-सुनते उनके मन में एक विचार आया और उन्होंने अपनी बनाई जा रही मिठाई का नाम ही 'एटम बम' रख दिया। तब से यही नाम इस मिठाई की पहचान बन गया।

ये भी पढ़ें

1953 में पड़ी थी इस कारोबार की नींव

इस मिठाई का सफर सन 1953 में शुरू हुआ था, जब बिंदेश्वरी सिंह उर्फ भाई जी ने ताजपुर बाजार में यह कारोबार खड़ा किया। उनके बाद इस विरासत को उनके पुत्र स्वर्गीय विजय सिंह ने आगे बढ़ाया। आज जब दोनों ही इस दुनिया में नहीं रहे, तो परिवार की तीसरी पीढ़ी ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली है। बिंदेश्वरी सिंह के पोते और विजय सिंह के बेटे नंदन सिंह अब अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर इस दुकान को संभाल रहे हैं।

स्वाद और शुद्धता में आज भी वही बात

सात दशक बीत जाने के बावजूद यहां की मिठाई की गुणवत्ता और स्वाद में ज़रा भी फर्क नहीं आया है। दुकान पर पूरी ईमानदारी के साथ छेना से मिठाई बनाई जाती है, और शायद यही वजह है कि इसका स्वाद खाने वालों की जुबान पर चढ़ जाता है। दूध को ग्रामीण इलाकों से मंगवाया जाता है, उसी से ताजा छेना निकाला जाता है और फिर एटम बम मिठाई तैयार होती है।

सफाई का यहां खास ध्यान रखा जाता है। हालत यह है कि काउंटर पर मिठाई का एक टुकड़ा भी ज्यादा देर तक टिका नहीं रहता और न ही वहां एक मक्खी तक नजर आती है। जितनी मिठाई बनती है, वह हाथों-हाथ बिक जाती है। नाम सुनकर लोग भले ही पहले मुस्कुरा दें, लेकिन एक बार चखने के बाद इसके स्वाद की तारीफ किए बिना नहीं रहते।

दिल्ली से लेकर चेन्नई तक पहुंच रहा है यह स्वाद

अपने अनोखे नाम और बेमिसाल स्वाद के दम पर यह मिठाई आज एक अलग पहचान बना चुकी है। जिले के कोने-कोने से लोग खास तौर पर इसका स्वाद चखने आते हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली, चेन्नई, पंजाब और मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोग भी यहां से इसे खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं।

कीमत की बात करें तो यह मिठाई 360 रुपए किलो के हिसाब से मिलती है, जबकि एक पीस की कीमत 12 रुपए है। हर रोज ताजा मिठाई बनाई जाती है और रोजाना 50 किलो से ज्यादा की बिक्री हो जाती है।

तीसरी पीढ़ी का वादा

लोकल 18 से बातचीत में नंदन सिंह ने बताया, "1953 में मेरे दादा स्वर्गीय बिंदेश्वरी सिंह उर्फ भाई जी ने इस मिठाई की शुरुआत की थी। यह मिठाई शुद्ध छेना से तैयार होती है, जिसका नाम एटम बम है। जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर एटम बम गिराया, तब चारों ओर उसकी चर्चा होने लगी। उसी से दादाजी के मन में मिठाई का नाम एटम बम रखने का विचार आया।" उन्होंने आगे कहा कि अगर लोगों का इसी तरह प्रेम और स्नेह मिलता रहा, तो परिवार आगे भी पूरी शुद्धता के साथ इस मिठाई का स्वाद लोगों तक पहुंचाता रहेगा।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR