असंतुलित दिनचर्या और खान-पान की गलत आदतों के चलते तमाम लोग अलग-अलग तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसी कारण सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच अब लोग अपने पारंपरिक आहार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इसी बदलाव के तहत मिलेट्स यानी मोटे अनाजों को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बनाने का चलन भी काफी तेजी से बढ़ा है। इन मोटे अनाजों में रागी को बेहद खास और महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। रागी में फाइबर, आयरन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद रहते हैं। प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन मुक्त होने के कारण यह अनाज वजन घटाने और डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।
सेहत के लिहाज से इतना गुणकारी होने के बावजूद बहुत से लोग रागी की रोटी को अपने नियमित भोजन में शामिल करने से झिझकते हैं। ज्यादातर लोगों की परेशानी यह होती है कि बेलते समय रागी की रोटी किनारों से फटने या टूटने लगती है, और सिकने के बाद वह इतनी सख्त हो जाती है कि उसे चबाना तक मुश्किल पड़ जाता है। दरअसल रागी में ग्लूटेन मौजूद नहीं होता, जिस वजह से इस आटे में गेहूं के आटे जैसा प्राकृतिक खिंचाव और लचीलापन नहीं आता। लेकिन रसोई में इस्तेमाल की जाने वाली एक खास और बेहद आसान तकनीक से घर पर ही बिना टूटे, बिल्कुल पतली, बेहद मुलायम और गुब्बारे जैसी फूली हुई रागी की रोटी आसानी से पकाई जा सकती है।
नरम रागी रोटी के लिए आवश्यक सामग्री
घर पर बिल्कुल मुलायम रागी रोटी तैयार करने के लिए बहुत कम सामग्री की जरूरत पड़ती है। इसके लिए आप रसोई में मौजूद साधारण चीजों का उपयोग कर सकते हैं
- 1 से 2 कप रागी का आटा
- आटे की मात्रा के बराबर अनुपात में पानी
- स्वादानुसार थोड़ा सा नमक
- रोटी बेलने के लिए परथन का सूखा आटा
- एक साफ सूती कपड़ा और ऊपरी सतह पर लगाने के लिए थोड़ा सा पानी
आटा गूंथने का खास तरीका जो रोटी को फटने नहीं देगा
रागी की रोटी को टूटने से बचाने और उसे लचीला बनाने का पूरा रहस्य आटा तैयार करने के तरीके पर निर्भर करता है। इसके लिए सबसे पहले एक साफ बर्तन में पानी को तेज आंच पर चढ़ाएं और उसमें स्वादानुसार थोड़ा सा नमक मिला दें। जब पानी में तेजी से उबाल आने लगे, तो आंच को तुरंत बिल्कुल धीमा कर दें और उबलते पानी में रागी का आटा डाल दें। इसके फौरन बाद किसी बेलन के पिछले सिरे अथवा लकड़ी के चम्मच का इस्तेमाल करते हुए आटे को तेजी से और अच्छी तरह मिला लें, ताकि उसमें किसी तरह की कोई गांठ या गुठली न बचने पाए।
अच्छी तरह मिल जाने के बाद गैस बंद कर दें और बर्तन को ढक्कन से ढककर लगभग 2 मिनट के लिए अलग रख दें। जब यह मिश्रण भाप में सेट हो जाए और हल्का गुनगुना रह जाए, तो इसे किचन स्लैब या किसी बड़ी परात में पलट लें। अब अपनी हथेलियों और उंगलियों से अच्छी तरह मसलते हुए इसे लगातार 3 से 4 मिनट तक गूंथें, ताकि आटा एकदम चिकना और मुलायम बन जाए। उबलते पानी की गर्मी की वजह से रागी का आटा बहुत अच्छी तरह बंध जाता है और उसमें बढ़िया लचीलापन आ जाता है, जिससे बाद में रोटी बेलते समय उसके किनारे बिल्कुल भी नहीं फटते।
इस तरह सेंकें ताकि रोटी गुब्बारे जैसी फूल जाए
आटा तैयार हो जाने के बाद उससे मध्यम आकार की छोटी-छोटी लोइयां बना लें। चकले की सतह पर थोड़ा सा सूखा आटा छिड़कें, उस पर लोई रखें और बेलन को बिल्कुल हल्के दबाव के साथ चलाते हुए गोल और पतली रोटी बेल लें। अब गैस पर तवे को अच्छी तरह गर्म करें और बेली हुई रोटी को बड़ी सावधानी के साथ गर्म तवे पर डाल दें। रोटी को तवे पर डालते ही एक साफ सूती कपड़े को पानी में हल्का भिगोकर रोटी की ऊपरी सतह पर धीरे-धीरे लगा दें। पानी की यह हल्की परत रोटी की ऊपरी सतह को सूखने से बचाती है और उसके भीतर पर्याप्त नमी बनाए रखती है।
तवे पर डालने के कुछ ही पलों बाद जब निचली सतह हल्की सी सिक जाए, तो रोटी को पलट दें। अब रोटी को दूसरी तरफ से भी धीमी से मध्यम आंच पर अच्छी तरह पकने दें। जैसे ही आप इसे दोबारा पलटेंगे, यह रोटी पूरी तरह से भाप भरकर गुब्बारे की तरह फूल जाएगी। इस आसान विधि से तैयार गरमा-गरम, बेहद मुलायम और पौष्टिक रागी की रोटी परोसने के लिए बिल्कुल तैयार है। इसे आप अपनी पसंद की हरी सब्जी, गाढ़ी दाल या लहसुन की तीखी चटनी के साथ आनंद से खा सकते हैं। यह रोटी पेट के लिए बहुत हल्की और पचने में बेहद आसान होती है, साथ ही वजन नियंत्रित करने की इच्छा रखने वालों के लिए आहार का सबसे बेहतरीन विकल्प साबित होती है।



















