पारंपरिक भारतीय खानपान में मीठे का स्थान हमेशा सबसे ऊपर रहता है, और किसी भी उत्सव अथवा पारिवारिक आयोजन में रसीले गुलाब जामुन की मौजूदगी मिठास को कई गुना बढ़ा देती है। अक्सर रसोई में इन्हें तैयार करते समय यह परेशानी सामने आती है कि तलते वक्त गोले बिखरने लगते हैं, उनकी ऊपरी परत जरूरत से ज्यादा कड़ी हो जाती है या वे अंदर से ठीक तरह से नहीं पक पाते। कुछ बुनियादी नियमों और पकाने के सही क्रम का पालन करके बेहद आसानी से हलवाई जैसी बनावट और स्वाद हासिल किया जा सकता है।
चाशनी पकाने का सही तरीका और संतुलन
गुलाब जामुन की सफलता काफी हद तक चाशनी के गाढ़ेपन पर निर्भर करती है। सबसे पहले एक चौड़े बर्तन में बराबर अनुपात को ध्यान में रखते हुए चीनी और पानी का घोल तैयार करने के लिए उसे गैस पर रखें। सुगंध और पारंपरिक स्वाद के लिए इसमें इलायची के दाने शामिल करें। मिश्रण को तब तक उबलने दें जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए और पानी में एक हल्की चिपचिपाहट न आ जाए। जब यह चिपचिपा रूप ले ले, तब गैस की आंच बंद कर दें और अंत में सुगंधित गुलाब जल मिलाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चाशनी ज्यादा गाढ़ी या तार वाली न बने, क्योंकि बहुत गाढ़ा शीरा होने पर तले हुए जामुन अंदर तक मिठास को नहीं सोख पाएंगे।
मावा मसलने और आटा तैयार करने की विधि
उत्तम परिणाम पाने के लिए खोया यानी मावा पूरी तरह ताजा और चिकना होना जरूरी है। एक परात या बड़े बर्तन में मावा निकालकर हथेलियों की मदद से तब तक अच्छी तरह मलें जब तक कि उसकी सारी गुठलियां खत्म न हो जाएं। इसके बाद इसमें मैदा और तय मात्रा में बेकिंग सोडा मिलाएं। अब मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा करके दूध डालते हुए एक बेहद मुलायम आटा गूंथ लें। आटा गूंथते समय यह सावधानी रखें कि वह न तो अधिक सख्त हो और न ही जरूरत से ज्यादा गीला या ढीला रहे।
गोले तैयार करना और तलने की प्रक्रिया
तैयार आटे में से बराबर माप के छोटे-छोटे हिस्से तोड़ लें और हथेलियों के बीच घुमाते हुए बिल्कुल चिकनी गोलियां बनाएं। यदि किसी गोले पर कोई हल्की दरार नजर आए, तो उसे हल्के दबाव के साथ दोबारा चिकना करें, क्योंकि मामूली सी दरार भी कड़ाही में जाते ही फटने का कारण बन सकती है। इसके बाद कड़ाही में घी अथवा तेल डालकर उसे मध्यम से धीमी आंच पर गर्म होने दें। ध्यान रहे कि तेल अत्यधिक खौलता हुआ नहीं होना चाहिए। अब एक-एक करके इन गोलों को कड़ाही में छोड़ें और कलछी से लगातार घुमाते हुए एक समान सुनहरा भूरा रंग आने तक तलें। तेज आंच पर पकाने से वे ऊपर से तो झटपट काले पड़ जाएंगे, परंतु उनका भीतरी हिस्सा कच्चा ही रह जाएगा।
चाशनी में डुबोना और परोसने का ढंग
कड़ाही से निकलते ही तले हुए गर्म गुलाब जामुन को तुरंत हल्की गुनगुनी चाशनी के अंदर डाल देना चाहिए। इसके बाद इन्हें कम से कम 2 घंटे तक चाशनी में ही डूबा रहने दें, जिससे वे भीतर तक चाशनी को सोखकर एकदम रसीले और स्पंजी बन सकें। इस समय के बाद आप इन्हें अपनी पसंद के अनुसार गरमा-गरम या फ्रिज में ठंडा करके परोस सकते हैं। प्लेट में निकालते समय ऊपर से बारीक कटे बादाम या पिस्ता डालकर सजाया जा सकता है।



















