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जोधपुर से पाली तक: हाईवे के पांच पड़ावों पर मारवाड़ के बेमिसाल पारंपरिक जायकेखानपान
19 जून 2026, 11:43 pm (131 दिन पहले)· 6

जोधपुर से पाली तक: हाईवे के पांच पड़ावों पर मारवाड़ के बेमिसाल पारंपरिक जायके

जोधपुर-पाली हाईवे पर कांकाणी, रोहट, चोटिला और पाली जैसे पड़ावों पर मिलने वाले पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन इस रूट को एक यादगार फूड ट्रेल बनाते हैं। बाजरे की रोटी से लेकर गुलाब हलवे तक, हर मोड़ पर एक अलग स्वाद आपका इंतजार करता है।

जोधपुर से गाड़ी निकालते ही पाली की तरफ जाने वाले हाईवे पर पहला जरूरी ठहराव है कांकाणी. खासकर दोपहर या रात के वक्त इस रास्ते से गुजरने वालों को यहां रुकना चाहिए. कांकाणी के ढाबों और होटलों पर जो खाना मिलता है, वो राजस्थान की देसी रसोई का सबसे सच्चा नमूना है. तवे पर हाथ से सिकी गरम बाजरे की रोटी, उसके ऊपर देसी घी की भरपूर परत, साथ में लहसुन की कड़क चटनी और कढ़ी-साग का जायका, यह थाली सड़क की लंबी थकान को पल में भुला देती है. मारवाड़ी खान-पान की असली पहचान का यह पहला और सबसे मजबूत पड़ाव है.

Mangilal Prajapat की कचोरी: रोहट की सबसे बड़ी पहचान

कांकाणी के बाद आता है ऐतिहासिक कस्बा रोहट, जो अपने नाश्ते की वजह से पूरे हाईवे पर जाना जाता है. Mangilal Prajapat की कचोरी यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है और इसे खाए बिना रोहट से निकलना इस रूट की सबसे बड़ी भूल होगी. मैदे का खस्ता और कड़क खोल, उसके भीतर मूंग दाल और सीक्रेट मसालों से तैयार भरावन, और ऊपर से गरम कढ़ी या हरी चटनी का जायका, यह कचोरी शाम की चाय के साथ खाने में कुछ और ही स्तर पर होती है. इस हाईवे से गुजरने वाले मुसाफिरों की पहली पसंद बन चुकी है यह कचोरी.

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रोहट के रसगुल्ले: लूणी को भी टक्कर देती मिठास

रोहट सिर्फ नमकीन और चटपटे स्वाद के लिए नहीं, बल्कि मीठे के लिए भी उतना ही खास है. जोधपुर जिले में लूणी के रसगुल्ले सालों से मशहूर रहे हैं, लेकिन पाली-जोधपुर हाईवे के बीचोबीच बने रोहट के रसगुल्ले अब उनसे कड़ी टक्कर लेने लगे हैं. शुद्ध छेने से बनाए गए ये रसगुल्ले एकदम स्पंजी होते हैं, मिठास बिल्कुल सही होती है और मुंह में रखते ही घुल जाते हैं. यह मिठाई अब रोहट की नई और मीठी पहचान बनती जा रही है.

चोटिला में Bullet Baba के दर्शन और केसरिया रबड़ी का लुत्फ

रोहट के बाद रास्ते में पड़ता है चोटिला, जहां Bullet Baba का प्रसिद्ध धाम है. देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं. लेकिन इस पावन जगह पर आस्था के साथ-साथ एक और चीज लोगों को खींचती है, और वो है यहां की केसरिया मलाईदार रबड़ी. पारंपरिक तरीके से घंटों दूध उबालकर तैयार की जाने वाली यह गाढ़ी रबड़ी इतनी जायकेदार है कि कई लोग सिर्फ इसी के लिए यहां का रुख करते हैं. प्रसाद के रूप में हो या सफर के बीच खाने-पीने के शौक के रूप में, यह रबड़ी हर किसी का मन मोह लेती है.

पाली का गुलाब हलवा: मारवाड़ की सबसे शानदार मिठाई से होती है विदाई

जब पाली शहर की सीमा शुरू होती है, तब इस पूरे सफर का सबसे मीठा और खास अंत होता है. यहां का गुलाब हलवा पाली की सबसे बड़ी पहचान है और इसे मरुधरा की सबसे प्रतिष्ठित मिठाइयों में गिना जाता है. मावे को एक खास तकनीक से भूनने के बाद तैयार होने वाला यह दानेदार हलवा शुद्ध दूध की मलाई से मिलकर जो जायका देता है, वो देश-विदेश में मशहूर है. पाली आकर इस हलवे को चखना और परिवार के लिए पैक करवाना इस रूट से गुजरने वाले हर मुसाफिर की आदत बन चुकी है.

सवाल-जवाब

जोधपुर-पाली हाईवे पर खाने का सबसे पहला पड़ाव कौन सा है?
कांकाणी इस रूट का पहला पड़ाव है, जो हाथ से सिकी बाजरे की रोटी, देसी घी, लहसुन चटनी और कढ़ी-साग के लिए मशहूर है।
रोहट की मशहूर कचोरी किसकी है?
Mangilal Prajapat की कचोरी रोहट में सबसे प्रसिद्ध है, जो मैदे के खस्ते खोल में मूंग दाल और सीक्रेट मसालों से भरी जाती है।
रोहट के रसगुल्ले लूणी के रसगुल्लों से कैसे अलग हैं?
रोहट के रसगुल्ले शुद्ध छेने से बने, स्पंजी और सही मिठास वाले हैं और अब जोधपुर-पाली हाईवे पर लूणी के रसगुल्लों को कड़ी टक्कर देने लगे हैं।
चोटिला के Bullet Baba धाम में खाने के लिए क्या मशहूर है?
Bullet Baba धाम के अलावा चोटिला में केसरिया मलाईदार रबड़ी बेहद मशहूर है, जो पारंपरिक तरीके से घंटों दूध उबालकर बनाई जाती है।
पाली का गुलाब हलवा किस चीज से बनता है?
पाली का गुलाब हलवा मावे को एक खास तकनीक से भूनकर और शुद्ध दूध की मलाई मिलाकर बनाया जाता है, जिससे इसकी खास दानेदार बनावट आती है।
रोहट की कचोरी किसके साथ सबसे अच्छी लगती है?
शाम की चाय के साथ रोहट की कचोरी इस हाईवे के मुसाफिरों की पहली पसंद है, हालांकि यह गरम कढ़ी या चटनी के साथ भी परोसी जाती है।
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