उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ जिला अपनी ऋषि परंपरा और पौराणिक इतिहास के साथ-साथ पारंपरिक खानपान की समृद्ध धरोहर के लिए भी पहचाना जाता है। इस जिले की गलियों में तैयार होने वाले पकवानों और मिठाइयों का अपना एक अलग अंदाज है। यहां आने वाले किसी भी व्यक्ति का सफर तब तक पूरा नहीं माना जाता, जब तक वह स्थानीय मिष्ठान का आनंद न ले ले। आजमगढ़ में खानपान की कई खास चीजें उपलब्ध हैं, जिनमें प्रसिद्ध लौंगलता और बेहद अनोखा सफेद गाजर का हलवा अपनी अलग मिठास के लिए जाने जाते हैं। इसी कड़ी में जब भी शहर की पारंपरिक मिठास का जिक्र छिड़ता है, तो गाढ़ी मलाईदार रबड़ी और खुरमे का नाम सबसे पहले आता है।
नौ दशकों से कोट मोहल्ले में बरकरार है विंध्याचल बाबा की दुकान
आजमगढ़ शहर के कोट मोहल्ले में स्थित विंध्याचल बाबा की मिठाई की दुकान करीब नौ दशकों से लोगों को वही पुराना स्वाद परोस रही है। इस दुकान पर मिलने वाली रबड़ी और खुरमा न केवल स्थानीय लोगों को पसंद है, बल्कि आसपास के कई अन्य जिलों से आने वाले ग्राहक भी इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं। दुकान के संचालक संतोष कुमार के अनुसार, यह उनके पूरे मोहल्ले की सबसे पहली मिठाई की दुकान है। इस प्रतिष्ठान की शुरुआत साल 1935 के आसपास उनके बुजुर्गों द्वारा की गई थी। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों विंध्याचल बाबा, दुर्गा जी और कृपा प्रसाद गुप्ता जी ने मिलकर इस पारंपरिक काम की नींव रखी थी।
खपड़े की छत से पक्की दुकान तक, नहीं बदला बनाने का तरीका
शुरुआती दौर में यह दुकान केवल खपड़े की छत के नीचे संचालित होती थी। वक्त गुजरने के साथ दुकान की बनावट और आसपास का माहौल जरूर बदल गया, लेकिन मिठाइयां तैयार करने का घरेलू तरीका और उनका स्वाद बिल्कुल पहले जैसा ही बना हुआ है। वर्तमान में संतोष कुमार और उनके परिवार की छठी पीढ़ी इस पूरी व्यवस्था को संभाल रही है। यह परिवार अपनी पिछली पीढ़ियों से मिले हुनर और विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने में जुटा है। शुद्ध दूध और पारंपरिक मिठास के दम पर इस दुकान ने बाजार में अपनी मजबूत साख कायम रखी है।
शुद्ध दूध की ताजी रबड़ी और घरेलू कारीगरी की खूबी
दुकान संचालक बताते हैं कि ग्राहकों के बीच सबसे ज्यादा मांग मलाईदार रबड़ी की रहती है। इसके साथ ही पारंपरिक खुरमा और पेड़ा भी लोग बेहद चाव के साथ खरीदते हैं। रबड़ी की लोकप्रियता की मुख्य वजह गुणवत्ता पर दिया जाने वाला ध्यान है। वे बताते हैं कि शुद्धता से कभी समझौता नहीं किया जाता। रोजाना जितना भी ताजा और शुद्ध दूध आता है, उसी से हर दिन ताजी रबड़ी पकाई जाती है और उसमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं की जाती। इस दुकान की सबसे अनूठी बात यह है कि यहां मिठाई बनाने या बेचने के लिए किसी बाहरी कारीगर या नौकर की मदद नहीं ली जाती।
परिवार के सदस्य ही संभालते हैं भट्ठी से लेकर बिक्री तक का काम
मिठाई तैयार करने का पूरा दायित्व परिवार के लोग ही आपस में बांटकर पूरा करते हैं। संतोष कुमार के साथ उनके भतीजे और घर के युवा लड़के खुद भट्ठी पर दूध पकाने से लेकर मिठाइयां बनाने और ग्राहकों को परोसने तक का हर काम संभालते हैं। इसी वजह से स्वाद और स्वच्छता का पैमाना हमेशा एक समान रहता है। इस स्वाद के प्रशंसक केवल शहर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे आजमगढ़ जिले के अलग-अलग कस्बों और गांवों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। कई ग्राहक तो दूसरे शहरों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और परिचितों के लिए भी यहां से विशेष तौर पर खुरमा, रबड़ी और पेड़ा पैक कराकर ले जाते हैं।


















