कन्नौज शहर केवल अपनी खास इत्र की महक के लिए ही नहीं बल्कि एक सदियों पुरानी पारंपरिक मिठाई के लिए भी वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है। यहां लगभग 103 साल से अधिक पुरानी पारंपरिक मिठाई कलावती गट्टा तैयार की जाती है, जिसे पूरी साफ-सफाई और देसी तरीकों से बनाया जाता है। इस पारंपरिक मिठाई का उपयोग विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ प्रमुख त्योहारों पर भी विशेष रूप से किया जाता है। इसका बेजोड़ स्वाद न केवल कन्नौज बल्कि उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों और देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया जाता है, जहां लोग इसे चाव से खाते हैं।
इस तरह तैयार होती है पारंपरिक कलावती गट्टा मिठाई
कलावती गट्टा मिठाई को बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले चीनी की चाशनी का उपयोग करके इसका मुख्य मिश्रण तैयार किया जाता है। उस तैयार मिश्रण को कुछ देर ठंडा करने के बाद उसकी विशेष रूप से कुटाई और फेंटाई की जाती है। मिश्रण को फेंटने के दौरान ही उसमें खुशबूदार इत्र और इलायची मिला दी जाती है, जिससे इस मिठाई का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है। इस पूरी रेसिपी में शुद्ध देशी घी का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण गट्टे का स्वाद कई गुना अधिक बढ़ जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद इसे कारीगरों द्वारा छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है।
कई वैरायटी और अलग-अलग फ्लेवर में मिलती है यह मिठाई
गट्टे के रूप-रंग और स्वाद को और अधिक बढ़ाने के लिए इस पर सूखे मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स और ताजे गुलाब के फूलों की पत्तियां भी सजाई जाती हैं। यह मिठाई कई अलग-अलग प्रकारों में उपलब्ध होती है, जिसमें रोज फ्लेवर गट्टा और ड्राई फ्रूट्स गट्टा प्रमुख हैं। इसके अलावा ग्राहकों की पसंद के अनुसार और भी कई क्वालिटी के गट्टे बाजार में मिल जाते हैं। हर अलग किस्म के गट्टे की कीमत और वैरायटी के अनुसार इसके दाम भी अलग-अलग तय किए जाते हैं, जिन्हें लोग अपनी पसंद के अनुसार खरीदते हैं।
मेहमाननवाजी में गट्टे का होता है खास इस्तेमाल
दुकानदार अभिषेक कुमार वैश्य ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष गट्टे में खुशबू के लिए मुख्य रूप से गुलाब के इत्र का प्रयोग किया जाता है, जिससे गट्टे का स्वाद और उसकी महक दोनों ही काफी बढ़ जाते हैं। कन्नौज आने वाले देश-विदेश के मेहमानों को यह गट्टा सप्रेम भेंट के रूप में भी दिया जाता है। स्थानीय लोग अपने यहां आने वाले देसी और विदेशी मेहमानों का स्वागत इसी पारंपरिक गट्टे से करते हैं, यही वजह है कि यह मिठाई देश के साथ-साथ विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हो चुकी है और गट्टा तैयार होते ही इसकी नियमित सप्लाई विभिन्न स्थानों पर शुरू कर दी जाती है।



















