जलभराव और लंबे ट्रैफिक जाम से दूर फरीदाबाद बना NCR का नया रियल एस्टेट पॉवरहाउसग्रह गोचर: शनि-मंगल की चाल से मेष, कन्या, मीन और तुला की चमकेगी किस्मत, मकर-सिंह-कुंभ को सूर्य ग्रहण के दौरान बरतनी होगी सावधानीनकली पनीर पर मध्य प्रदेश सरकार का शिकंजा, सीएम मोहन यादव का बैन आदेशप्रतिबंधित उग्रवादी गठबंधन ने मणिपुर में 15 अगस्त बंद बुलाया, तिरंगा अभियान से दूर रहने की अपीलछत्तीसगढ़: सरकारी स्कूलों में भाषा सुधार अभियान, शिक्षकों की जवाबदेही भी तय होगीबारामती में पति की हत्या कर घर में दफनाने की साजिश नाकाम, पुलिस ने पत्नी पर दर्ज की एफआईआरफुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया उड़ान में 300 फीट की अचानक गिरावट, डोप जांच में पायलट के मारिजुआना सेवन की पुष्टिभाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने वंदे मातरम पर रामजी लाल सुमन को घेरा, आरएसएस पर पवन खेड़ा के दावे को भी खारिज कियाचुनार की डालमिया सीमेंट फैक्ट्री से पटरियों पर दौड़ेगा सीमेंट, अगस्त से शुरू हुई बड़ी ढुलाई सेवागुड़ बनाने का प्लांट लगाकर कमाई का मौका, सरकार दे रही 35 प्रतिशत तक सब्सिडी, जानें कितनी जमीन और पैसा चाहिए
मेवात की मिठाइयों का कोई जवाब नहीं, डीग के इन पारंपरिक पकवानों के लिए लोग करते हैं लंबा सफरखानपान
28 जून 2026, 9:45 am (46 दिन पहले)· 2

मेवात की मिठाइयों का कोई जवाब नहीं, डीग के इन पारंपरिक पकवानों के लिए लोग करते हैं लंबा सफर

डीग क्षेत्र के मेवात इलाके में बनने वाली मिल्क केक, पंचमेवा, जलेबा, पेड़ा और बालूशाही अपने शुद्ध देसी स्वाद और पारंपरिक तरीके के लिए दूर-दूर तक मशहूर हैं। इन मिठाइयों को आज भी पुरानी विधियों से बनाया जाता है जिससे इनका असली स्वाद बरकरार रहता है।

डीग क्षेत्र के मेवात इलाके की पहचान जहां अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी है, वहीं यहां की पारंपरिक मिठाइयां इस इलाके को एक और खास पहचान देती हैं। मिल्क केक, पंचमेवा, जलेबा, पेड़ा और बालूशाही, ये पांचों मिठाइयां सिर्फ स्थानीय लोगों की पसंद तक सीमित नहीं हैं बल्कि दूर-दूर से लोग इनका स्वाद लेने यहां खिंचे चले आते हैं। इन सबकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें आज भी उसी पुरानी और पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है, जिससे इनका असली स्वाद बरकरार रहता है।

मिल्क केक: दूध और देसी घी का लाजवाब स्वाद

मेवात का मिल्क केक इस पूरे क्षेत्र की सबसे चर्चित मिठाइयों में शुमार किया जाता है। शुद्ध दूध और देसी घी से तैयार होने वाला यह मिल्क केक हल्के भूरे रंग का और दानेदार बनावट का होता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह मुंह में रखते ही घुल जाता है। यहां के हलवाई इसे धीमी आंच पर काफी देर तक पकाते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी गहरा हो जाता है। खास मौकों और त्योहारों पर इसकी मांग कई गुना बढ़ जाती है और लोग इसे उपहार के रूप में भी ले जाना पसंद करते हैं।

ये भी पढ़ें

पंचमेवा: सूखे मेवों से भरपूर पौष्टिक मिठाई

नाम से ही जाहिर है कि पंचमेवा में सूखे मेवों का भरपूर इस्तेमाल होता है। काजू, बादाम, पिस्ता, गोला और अन्य मेवों को मिलाकर तैयार की जाने वाली यह मिठाई जितनी स्वादिष्ट होती है उतनी ही पौष्टिक भी मानी जाती है। मेवात के बाज़ारों में शादियों और त्योहारों के मौसम में इसकी बिक्री खूब होती है और इसका भरपूर स्वाद हर उम्र के लोगों को खूब भाता है।

विशाल जलेबा: देसी घी में तली कुरकुरी मिठास

जलेबा दरअसल जलेबी का एक बड़ा रूप होता है और मेवात क्षेत्र में यह बेहद लोकप्रिय है। इसे बड़े आकार में तैयार किया जाता है, देसी घी में तला जाता है और फिर चाशनी में डुबोया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से बनने वाला जलेबा बाहर से कुरकुरा और अंदर से रसीला होता है। सुबह के नाश्ते में या किसी खास अवसर पर इसे बड़े चाव से खाया जाता है और इसकी मिठास लोगों को लंबे समय तक याद रहती है।

पेड़ा: धार्मिक आयोजनों में हमेशा मौजूद

शुद्ध मावा और चीनी से तैयार होने वाला पेड़ा मेवात की पारंपरिक मिठाइयों में एक अहम स्थान रखता है। इसका स्वाद सादा लेकिन बेहद आकर्षक होता है और इसकी मुलायम बनावट तथा देसी खुशबू इसे बाकी मिठाइयों से अलग बनाती है। धार्मिक कार्यक्रमों में और प्रसाद के रूप में इसका उपयोग बहुत अधिक होता है, इसीलिए इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।

बालूशाही: कुरकुरी परत और मीठा भराव

बालूशाही मेवात की एक और मशहूर मिठाई है जो अपनी कुरकुरी बाहरी परत और अंदर की मिठास के लिए जानी जाती है। इसे एक खास तरीके से बनाया जाता है जिससे इसका टेक्सचर बिल्कुल अलग और स्वाद अनोखा बनता है। मेवात के बाज़ारों में यह मिठाई पूरे साल उपलब्ध रहती है और लोग इसे चाय के साथ खाना भी पसंद करते हैं।

पुरानी विधि में छुपा है असली स्वाद का राज

इन सभी मिठाइयों को जो चीज़ सबसे खास बनाती है वह है इन्हें बनाने का पुराना और परंपरागत तरीका। न कोई कृत्रिम रंग, न मिलावट, बस शुद्ध देसी सामग्री और पीढ़ियों से चले आ रहे हलवाईयों का हुनर। यही कारण है कि डीग के मेवात की ये मिठाइयां आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखती हैं और इनका स्वाद लेने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।

सवाल-जवाब

मेवात क्षेत्र की सबसे मशहूर मिठाइयां कौन सी हैं?
मेवात क्षेत्र में मिल्क केक, पंचमेवा, जलेबा, पेड़ा और बालूशाही सबसे ज्यादा मशहूर पारंपरिक मिठाइयां हैं जो अपने शुद्ध देसी स्वाद के लिए जानी जाती हैं।
मेवात का मिल्क केक किससे बनाया जाता है और यह इतना खास क्यों है?
मेवात का मिल्क केक शुद्ध दूध और देसी घी से बनाया जाता है और इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे यह हल्का भूरा, दानेदार और मुंह में घुलने वाला बनता है।
जलेबा और जलेबी में क्या फर्क है?
जलेबा असल में जलेबी का एक बड़ा रूप होता है जिसे बड़े आकार में बनाकर देसी घी में तला जाता है और फिर चाशनी में डुबोया जाता है।
पंचमेवा मिठाई में कौन से सूखे मेवे मिलाए जाते हैं?
पंचमेवा में काजू, बादाम, पिस्ता, गोला और अन्य सूखे मेवे मिलाए जाते हैं, इसीलिए इसे पौष्टिक भी माना जाता है।
मेवात में पेड़ा किन अवसरों पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है?
मेवात में पेड़ा खासतौर पर धार्मिक कार्यक्रमों और प्रसाद के रूप में इस्तेमाल होता है, जिससे इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।
क्या बालूशाही मेवात में पूरे साल मिलती है?
हां, मेवात के बाज़ारों में बालूशाही पूरे साल उपलब्ध रहती है और लोग इसे चाय के साथ खाना भी पसंद करते हैं।
मेवात की मिठाइयां इतनी खास क्यों मानी जाती हैं?
इन मिठाइयों को आज भी पुराने पारंपरिक तरीकों से बनाया जाता है, जिसमें शुद्ध देसी सामग्री का इस्तेमाल होता है और किसी भी तरह की मिलावट नहीं की जाती।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR