मिठाइयों के शौकीनों के बीच पारंपरिक खाजा हमेशा से खास जगह रखता है, लेकिन बिहार के पूर्णिया शहर में तैयार होने वाला एक खास व्यंजन अपनी विशिष्ट बनावट के चलते खूब चर्चा में है। भट्ठा बाजार इलाके में कालीबाड़ी चौक के समीप संचालित चौधरी मिष्ठान भंडार में 156 परतों वाला पिपरा खाजा बनाया जाता है। आम बाजार में मिलने वाले सामान्य खाजे के मुकाबले यह मिष्ठान अपनी अत्यधिक खस्ता और रेशेदार बनावट के लिए जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मुंह में रखते ही घुल जाता है, जिसकी वजह से छोटे बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और बिना दांत वाले बुजुर्ग भी बिना किसी परेशानी के इसका भरपूर आनंद ले पाते हैं।
कारीगर पूरन मंडल की पारंपरिक कारीगरी
इस अनूठी मिठाई को तैयार करने की बागडोर अनुभवी हलवाई संभालते हैं। दुकान में कार्यरत कारीगर पूरन मंडल बताते हैं कि वह बीते कई वर्षों से इसी खास विधि का इस्तेमाल कर पिपरा खाजा बना रहे हैं। उनके अनुसार, साधारण खाजे के मुकाबले इसमें परतों की संख्या का बेहद बारीकी से ध्यान रखा जाता है। मैदे की दर्जनों बेहद बारीक और महीन शीट तैयार करके उन्हें एक के ऊपर एक खास सलीके से लपेटा जाता है। इसी जटिल और निरंतर दोहराव वाली तकनीक की बदौलत खाजे के भीतर कुल 156 अलग-अलग तहें विकसित होती हैं, जो तलने के बाद बेहद कुरकुरी और हल्की बनती हैं।
मैदा गूंथने से लेकर चाशनी में डुबोने तक की प्रक्रिया
पूरन मंडल ने इस बहुस्तरीय मिष्ठान को बनाने का पूरा विवरण साझा किया। निर्माण के पहले चरण में बेहतरीन गुणवत्ता वाले मैदे को सादे पानी के साथ बहुत अच्छी तरह से गूंथा जाता है। उचित लोच पैदा करने के लिए गूंथे हुए मैदे को कुछ देर विश्राम के लिए ढककर रख दिया जाता है। इसके पश्चात निर्धारित सामग्री और जरूरी मसाले मिलाकर मैदे को दोबारा गूंथकर एकदम चिकना और तैयार किया जाता है। अगले चरण में इस मैदे की बेहद पतली-पतली शीट बनाई जाती हैं और उन्हें एक के ऊपर एक करीने से लपेटकर मोटी परत तैयार की जाती है।
जब सभी आवश्यक परतें अच्छी तरह व्यवस्थित हो जाती हैं, तब उन्हें धारदार औजार से काटा जाता है। इसके बाद खाजे को एक विशेष सांचे में दबाकर उसका पारंपारिक आकार दिया जाता है। आकार तय होने पर इसे कड़ाही में मौजूद खौलते गर्म तेल में धीमी आंच पर तला जाता है। जब इसका रंग हल्का सुनहरा हो जाता है, तब इसे तेल से बाहर निकाल लिया जाता है। अंतिम चरण में इन तले हुए गर्म टुकड़ों को गाढ़ी चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है। कुछ समय तक चाशनी में डूबे रहने के बाद जब मिठास अंदरूनी परतों तक समा जाती है, तब इसे बाहर निकालकर बिक्री के लिए काउंटर पर सजा दिया जाता है।
₹240 प्रति किलो दर और सालभर मांग
चौधरी मिष्ठान भंडार में यह 156 तहों वाला पिपरा खाजा ₹240 प्रति किलो की दर पर ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है। दुकान संचालक का कहना है कि यह व्यंजन किसी खास मौसम या त्योहार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुकान पर इसकी बिक्री पूरे बारह महीने लगातार चलती रहती है। भट्ठा बाजार के स्थानीय खरीदारों के अतिरिक्त पूर्णिया शहर के बाहर से आने वाले यात्री और आगंतुक भी इस खास बहुपरतीय स्वाद का लुत्फ उठाने और अपने साथ ले जाने के लिए यहां पहुंचते हैं।



















