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समस्तीपुर में नमक की आंच पर सिकता 12 चीजों का जायकेदार भूजा, 20 वर्षों की मेहनत से चंद्र प्रताप ने बनाई खास पहचानखानपान
14 अग॰ 2026, 7:53 pm (30 दिन पहले)· 2

समस्तीपुर में नमक की आंच पर सिकता 12 चीजों का जायकेदार भूजा, 20 वर्षों की मेहनत से चंद्र प्रताप ने बनाई खास पहचान

समस्तीपुर कलेक्ट्रेट के पास चंद्र प्रताप पिछले 20 वर्षों से नमक की आंच पर भुना गरमा-गरम भूजा बेच रहे हैं, जहां 12 पौष्टिक चीजों से बना यह नाश्ता रोजाना 500 से 1000 लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।

बिहार के खान-पान में भूजा की अपनी एक खास जगह है, जिसे लोग न केवल स्वाद के लिए बल्कि अपनी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा मानकर बेहद पसंद करते हैं। समस्तीपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर के पास कोलंबस के समीप स्थित एक छोटी सी दुकान पिछले दो दशकों से स्थानीय नाश्ता प्रेमियों की पहली पसंद बनी हुई है। यहां मिलने वाले पारंपरिक भूजा की सबसे बड़ी खासियत इसका अनूठा स्वाद और ताजगी है, जो हर ग्राहक को घर के बने नाश्ते जैसा संतोष देती है। दोपहर ढलते ही इस दुकान पर लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है, जो देर शाम तक लगातार बनी रहती है।

बालू नहीं, नमक की आंच पर भूनने का अनोखा तरीका

आमतौर पर गांवों या घरों में अनाजों को भूनने के लिए नदी की बालू का उपयोग किया जाता है। हालांकि, समस्तीपुर में कलेक्ट्रेट के बगल में दुकान चलाने वाले चंद्र प्रताप ने इस पारंपरिक विधि में बदलाव किया है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले चंद्र प्रताप पिछले 20 सालों से इसी स्थान पर अपनी दुकान लगा रहे हैं। वे अनाज को बालू में भूनने के बजाय साफ नमक का इस्तेमाल करते हैं। नमक की तेज गर्मी में सिकने के कारण अनाज न केवल पूरी तरह कुरकुरा होता है, बल्कि इसमें एक अनूठा स्वाद भी आ जाता है। चंद्र प्रताप का कहना है, "घरों में लोग बालू में भूजा तैयार करते हैं, लेकिन हम नमक में भूनकर लोगों को गरमा-गरम भूजा खिलाते हैं।"

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12 पौष्टिक अनाज और चटाकेदार चटनी का अनोखा मेल

चंद्र प्रताप द्वारा तैयार किए जाने वाले भूजा में किसी एक अनाज का वर्चस्व नहीं होता, बल्कि यह कई अनाजों का संतुलित मिश्रण है। उनके भूजा में कुल 12 अलग-अलग पौष्टिक सामग्रियां शामिल होती हैं। इनमें मुख्य रूप से देशी चना, मूंगफली के बादाम, चूड़ा, गेहूं और मक्का शामिल हैं। इन सभी अनाजों को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर गरम नमक में तुरंत भूना जाता है। ग्राहक के ऑर्डर देने के बाद ही सामग्री को भूनकर गरमा-गरम परोसा जाता है। इसके अलावा, जब इस गरमा-गरम भूजा के साथ तीखी और चटाकेदार चटनी दी जाती है, तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं।

दोपहर से रात 8 बजे तक जुटती है 500 से 1000 ग्राहकों की भीड़

कोलंबस के पास स्थित यह दुकान प्रतिदिन दोपहर के समय खुलती है और रात करीब 8 बजे तक यहां भूजा की बिक्री होती रहती है। कीमत की बात करें तो यहां 100 ग्राम भूजा मात्र 20 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है, जो हर आम और खास व्यक्ति की जेब के अनुकूल है। चंद्र प्रताप के अनुसार, उनकी दुकान से रोजाना 500 से अधिक और 1000 से कम लोग भूजा खाकर जाते हैं। 20 वर्षों से लगातार एक ही जगह पर सेवा दे रहे चंद्र प्रताप के लिए यह दुकान केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि समस्तीपुर के लोगों के दिल में अपनी स्वाद की पहचान बनाने का एक लंबा और सुखद सफर भी है।

सवाल-जवाब

चंद्र प्रताप समस्तीपुर में कहां और कितने सालों से भूजा बेच रहे हैं?
चंद्र प्रताप पिछले 20 वर्षों से समस्तीपुर कलेक्ट्रेट के पास कोलंबस के समीप अपनी भूजा दुकान चला रहे हैं।
चंद्र प्रताप का भूजा अन्य साधारण भूजा से अलग क्यों है?
वे पारंपरिक बालू के बजाय साफ नमक में भूनकर भूजा तैयार करते हैं, जिससे यह अधिक कुरकुरा, ताजा और अनूठे स्वाद वाला बनता है।
समस्तीपुर में इस भूजा में कौन-कौन सी सामग्रियां शामिल होती हैं?
इसमें चना, मूंगफली का बादाम, चूड़ा, गेहूं और मक्का समेत लगभग 12 अलग-अलग पौष्टिक सामग्रियां मिलाई जाती हैं और इसे चटनी के साथ परोसा जाता है।
इस दुकान की टाइमिंग और 100 ग्राम भूजा की कीमत क्या है?
दुकान प्रतिदिन दोपहर से रात करीब 8 बजे तक खुलती है और भूजा की कीमत 20 रुपये प्रति 100 ग्राम है।
चंद्र प्रताप की दुकान पर रोजाना कितने ग्राहक आते हैं?
चंद्र प्रताप के अनुसार, उनकी दुकान पर रोजाना 500 से अधिक और 1000 से कम ग्राहक भूजा खाने पहुंचते हैं।
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