साधारण लौकी को अक्सर लोग कम मसालेदार या नीरस समझकर खाने से कतराते हैं, लेकिन सही मसालों और छौंक के मेल से इसे बेहद लजीज रूप दिया जा सकता है। क्षेत्रीय खानपान में इसे कद्दू के नाम से भी पुकारा जाता है, खासकर बिहार और झारखंड के इलाकों में लौकी को इसी पहचान से जाना जाता है। इस पारंपरिक विधि में राई की खुशबू और साबुत मसालों का तीखापन मिलकर सब्जी को ऐसा तीखा-चटपटा स्वाद देते हैं जो बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आता है।
सही सब्जी का चुनाव और कटाई का खास तरीका
इस व्यंजन को बनाने के लिए सबसे पहले बाजार से ताजी, मुलायम और छोटे आकार की लौकी चुननी चाहिए। छोटे आकार की लौकी में बीज बेहद कम या न के बराबर होते हैं, जिससे पकाते समय सब्जी का स्वाद और बनावट दोनों बेहतरीन रहते हैं। सब्जी को अच्छी तरह छीलकर पानी से साफ कर लें।
सब्जी का स्वाद इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसे किस तरह काटा गया है। जिस तरह आलू की भुजिया बनाने के लिए पतले और लंबे टुकड़े काटे जाते हैं, ठीक उसी तरह लौकी को भी पतली और लंबी फांकों में काटना चाहिए। इसके साथ ही तैयारी के लिए चार हरी मिर्च और एक बड़े आकार का प्याज बारीक काट कर अलग रख लें।
सरसों तेल और साबुत मसालों का तड़का
गैस पर कड़ाही चढ़ाकर उसमें सरसों का तेल गर्म करें। इस विधि में सरसों के तेल का इस्तेमाल जरूरी है क्योंकि इसका तीखापन राई के साथ मिलकर असली महक पैदा करता है। जब तेल पूरी तरह गर्म हो जाए, तब इसमें राई और जीरा डालें। साथ में एक से दो सूखी लाल मिर्च और एक से दो तेजपत्ते शामिल करें।
जब यह छौंक अच्छी तरह चटक जाए और मसालों की खुशबू आने लगे, तब कड़ाही में कटी हुई लौकी डाल दें। कुछ देर तक सब्जी को तेल में चलाएं। इसके बाद इसमें स्वादानुसार नमक और हल्दी पाउडर डालकर मिला लें। अब कड़ाही को ढक्कन से ढक दें और आंच धीमी कर दें, ताकि लौकी अपने ही पानी में धीमी आंच पर पककर पूरी तरह गल जाए।
मसालों का संतुलन और परोसने का तरीका
जब लौकी पूरी तरह गल जाए और नरम हो जाए, तब इसमें रंगत और चटपटापन बढ़ाने के लिए थोड़ी सी लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा गरम मसाला मिलाएं। सभी मसालों को अच्छी तरह मिलाकर धीमी आंच पर करीब दो मिनट तक भूनें ताकि मसालों का कच्चापन खत्म हो जाए। इसके बाद गैस बंद कर दें।
यह चटपटी भुजिया बनकर पूरी तरह तैयार है। इसे गरमा-गरम रोटी, सादे पराठे या फिर दाल-चावल के साथ परोसा जा सकता है। सरसों के तड़के की सौंधी खुशबू भोजन का जायका बढ़ा देती है और जो लोग सामान्य रूप से लौकी खाना पसंद नहीं करते, वे भी इसे चाव से खाते हैं।



















