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सूजी-बेसन से हो गए हैं बोर? इस मानसून सिर्फ 30 मिनट में बनाएं उत्तराखंड का खास रागी हलवाखानपान
23 जुल॰ 2026, 3:03 pm (3 घंटे पहले)· 2

सूजी-बेसन से हो गए हैं बोर? इस मानसून सिर्फ 30 मिनट में बनाएं उत्तराखंड का खास रागी हलवा

उत्तराखंड का पारंपरिक रागी या मंडुवे का हलवा स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प है। आयरन और कैल्शियम से भरपूर इस पहाड़ी व्यंजन को आप घर पर बेहद आसानी से बना सकते हैं।

जैसे-जैसे मानसून की बारिश हवा में एक ताजगी और हल्की ठंडक घोलती है, वैसे-वैसे हमारा मन कुछ गर्म और स्वादिष्ट मीठा खाने को करने लगता है। आमतौर पर भारतीय रसोई में सूजी, मूंग दाल या बेसन का हलवा ही पहली पसंद होता है, लेकिन इस मौसम में कुछ अलग और ज्यादा पौष्टिक आज़माने का समय आ गया है। इसके लिए हमें उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों की तरफ रुख करना चाहिए, जहां का पारंपरिक 'मंडुवे का हलवा' स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम है। इसे पूरे देश में रागी के हलवे के नाम से भी जाना जाता है। यह पहाड़ी व्यंजन न केवल आपकी मीठे की लालसा को शांत करता है, बल्कि शरीर को जबरदस्त ताकत भी प्रदान करता है।

पहाड़ी संस्कृति की एक खास सौगात

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मंडुवा या रागी वहां की जीवनशैली और खानपान का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। पीढ़ियों से वहां के लोग इस मोटे अनाज का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। पहाड़ों में किसी भी खास मौके, पूजा-पाठ या त्योहारों के दौरान यह गाढ़ा और गर्म मीठा व्यंजन बड़े चाव से बनाया जाता है। यह मेहमानों के स्वागत का एक शानदार तरीका होने के साथ-साथ कड़ाके की ठंड में शरीर को भीतर से गर्म रखने का भी काम करता है। आज के दौर में यह पारंपरिक व्यंजन शहरों में भी काफी लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि इसे कोई भी व्यक्ति अपने घर की रसोई में महज तीस मिनट के भीतर बड़ी आसानी से तैयार कर सकता है।

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हलवा बनाने के लिए जरूरी सामग्री

इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने की शुरुआत करने से पहले, इसके लिए जरूरी चीजें जुटाना बहुत अहम है। आपको इसके लिए मुख्य रूप से मंडुवे का बारीक आटा और अच्छी गुणवत्ता वाला शुद्ध देसी घी चाहिए होगा। मिठास के लिए अगर आप पारंपरिक गुड़ का इस्तेमाल करते हैं, तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है, हालांकि आप इसके स्थान पर सामान्य चीनी का उपयोग भी कर सकते हैं। इसके अलावा पकाने के लिए पानी, गार्निशिंग के लिए काजू, बादाम और खुशबू के लिए पिसी हुई हरी इलायची की जरूरत पड़ेगी। आप अपनी पसंद और बजट के अनुसार मेवों की मात्रा को कम या ज्यादा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

धीमी आंच पर पकाने का सही तरीका

रागी का हलवा बनाने का सबसे बड़ा रहस्य इसके आटे को सही तरीके से भूनने में छिपा है। सबसे पहले गैस पर एक मोटे तले वाली कड़ाही रखें और उसमें देसी घी डालकर उसे पिघलने दें। घी के हल्का गर्म होते ही उसमें मंडुवे का आटा डाल दें। इसके तुरंत बाद गैस की आंच को एकदम धीमा कर दें और आटे को तसल्ली के साथ भूनना शुरू करें। इस दौरान कलछी को लगातार चलाते रहना बेहद जरूरी है ताकि आटा कड़ाही के तले में चिपक कर जले नहीं। जैसे-जैसे आप इसे भूनते जाएंगे, आटे का गहरा रंग थोड़ा सुनहरा होने लगेगा और आपकी पूरी रसोई एक बेहद सोंधी और मीठी खुशबू से महक उठेगी, जो इस बात का संकेत है कि आटा पूरी तरह से सिक चुका है।

आटे के अच्छी तरह भुन जाने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू होता है। अब इस गर्म भुने हुए आटे में अपनी पसंद के अनुसार गुड़ या चीनी मिला दें और साथ ही जरूरत के हिसाब से पानी डाल दें। पानी डालते ही आपको बिना रुके कलछी को तेजी से चलाना होगा। ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि हलवे के मिश्रण में किसी भी तरह की कोई गांठ या गुठली न पड़े। इस पूरे मिश्रण को धीमी आंच पर ही पकने दें। आप देखेंगे कि पतला मिश्रण धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगेगा और देखते ही देखते यह एक लाजवाब और दानेदार हलवे का रूप ले लेगा।

आखिरी चरण और परोसने का तरीका

जब हलवा पूरी तरह से गाढ़ा हो जाए और कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे, तब इसमें स्वाद बढ़ाने वाली चीजें डालने का समय आ जाता है। अब इसमें पहले से बारीक कटे हुए काजू, बादाम और ताजी कुटी हुई इलायची का पाउडर डाल दें। इन सभी चीजों को हलवे में बहुत अच्छी तरह से मिला लें और इसे महज कुछ और मिनटों तक धीमी आंच पर पकने दें। ऐसा करने से मेवों का कुरकुरापन और इलायची की भीनी महक हलवे के कण-कण में समा जाती है। तैयार होने के बाद, इस गर्मागर्म हलवे को सर्विंग बाउल में निकालें और इसके ऊपर से कुछ और कटे हुए मेवे डालकर सजाएं। यह खाने के बाद परोसी जाने वाली एक बेहतरीन डिश है, जिसे खाकर आपके मेहमान भी आपकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाएंगे।

सेहत का एक बेजोड़ खजाना

स्वाद के अलावा मंडुवे का यह हलवा पोषक तत्वों का एक बहुत बड़ा स्रोत है। रागी को दुनिया भर में एक सुपरफूड का दर्जा हासिल है क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम मौजूद होता है। इसका नियमित सेवन करने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और यह हमारी हड्डियों को अंदर से फौलादी बनाने का काम करता है। चूंकि यह पचने में बेहद आसान होता है और इसमें ढेरों गुण होते हैं, इसलिए बढ़ते हुए छोटे बच्चों और घर के बुजुर्ग सदस्यों के लिए इसे आहार का एक बहुत सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प माना जाता है। इस मानसून में अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए इस पारंपरिक व्यंजन को जरूर आज़माएं।

सवाल-जवाब

मंडुवे का हलवा क्या होता है?
मंडुवे का हलवा उत्तराखंड का एक पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन है, जिसे रागी के आटे, देसी घी, गुड़ और मेवों से तैयार किया जाता है।
रागी का हलवा बनने में कितना समय लगता है?
इस स्वादिष्ट और पौष्टिक हलवे को घर पर बनाने में मुश्किल से 30 मिनट का समय लगता है।
क्या रागी का हलवा बच्चों के लिए फायदेमंद है?
हां, रागी आयरन और कैल्शियम से भरपूर होती है, जो बच्चों के शारीरिक विकास और हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।
मंडुवे के हलवे में चीनी की जगह क्या इस्तेमाल कर सकते हैं?
मंडुवे के हलवे को ज्यादा सेहतमंद और स्वादिष्ट बनाने के लिए आप चीनी की जगह प्राकृतिक गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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