उपवास के पर्व हों या सुबह के नाश्ते का समय, साबूदाना खिचड़ी भारतीय घरों में खूब पसंद की जाती है। यह भोजन हल्का होने के साथ-साथ ऊर्जा से भरपूर होता है, जिसके कारण लोग इसे व्रत के दौरान खाना बेहद पसंद करते हैं। हालांकि, कई बार पूरी मेहनत के बाद भी खिचड़ी कड़ाही में चिपक जाती है या उसके दाने आपस में जुड़कर लोई जैसे बन जाते हैं। इस समस्या की मुख्य वजह साबूदाने में मौजूद अतिरिक्त स्टार्च और पकाने के दौरान होने वाली छोटी गलतियां हैं। यदि आप भिगोने की प्रक्रिया से लेकर तड़का लगाने तक सही तकनीक अपनाएंगे, तो हर दाना अलग और स्वादिष्ट बनेगा।
परफेक्ट खिचड़ी के लिए आवश्यक सामग्री
बेहतरीन दानेदार खिचड़ी तैयार करने के लिए सामग्री का सटीक माप बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको निम्नलिखित चीजों की आवश्यकता होगी
- साबूदाना: 1 कप
- उबले आलू: 2 मध्यम आकार के (छोटे टुकड़ों में कटे हुए)
- मूंगफली: आधा कप (अच्छी तरह भुनी हुई)
- हरी मिर्च: 2 (बारीक कटी हुई)
- जीरा: 1 छोटा चम्मच
- करी पत्ते: कुछ पत्तियां
- घी या तेल: 1 बड़ा चम्मच
- नमक: सेंधा नमक या सामान्य नमक स्वाद के अनुसार
- नींबू: आधा
- गार्निशिंग: बारीक कटा ताजा हरा धनिया
साबूदाना भिगोने की सही विधि और स्टार्च निकालना
खिचड़ी को खिला-खिला बनाने का सबसे पहला और मुख्य चरण साबूदाने को सही तरीके से धोना है। सबसे पहले 1 कप साबूदाने को साफ पानी में डालें और हल्के हाथों से 2 से 3 बार धोएं। ऐसा करने से दानों की बाहरी सतह पर जमा हुआ फालतू स्टार्च निकल जाता है, जो खिचड़ी के चिपचिपेपन का सबसे बड़ा कारण बनता है।
धोने के बाद बर्तन में उतना ही पानी रखें जिससे साबूदाना पूरी तरह डूब जाए। पानी की मात्रा दानों के स्तर से जरा सी भी ऊपर नहीं होनी चाहिए। अब इसे ढककर लगभग 5 से 6 घंटे के लिए छोड़ दें। यदि आप सुबह खिचड़ी बनाना चाहते हैं, तो इसे पूरी रात के लिए भिगोना सबसे उत्तम रहता है। पकाने से पहले दानों की जांच जरूर करें। 1 या 2 दानों को उंगलियों के बीच दबाकर देखें। यदि वे बिना किसी मशक्कत के पूरी तरह मसल जाएं और आपस में न चिपकें, तो समझें कि साबूदाना पकाने के लिए सही स्थिति में है।
सामग्री की पूर्व तैयारी
साबूदाने के अच्छे से फूल जाने के बाद, भुनी हुई आधा कप मूंगफली को लें और उसे मिक्सी में या ओखली में दरदरा कूट लें। मूंगफली का पाउडर एकदम बारीक नहीं होना चाहिए, क्योंकि दरदरापन खिचड़ी को एक बेहतरीन क्रंच देता है और नमी को सोखने में भी मदद करता है। साथ ही, दोनों उबले आलू को छोटे-छोटे चौकोर टुकड़ों में काट कर रख लें।
कड़ाही में तड़का और पकाने का सही तरीका
अब एक कड़ाही या पैन लें और उसमें 1 बड़ा चम्मच घी या तेल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। जब घी गर्म हो जाए, तो उसमें 1 छोटा चम्मच जीरा डालें। जीरे के चटकते ही करी पत्ता और बारीक कटी हुई 2 हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड के लिए भूनें। इसके बाद कटे हुए उबले आलू के टुकड़े डालें और उन्हें तब तक सेकें जब तक कि उन पर हल्का सुनहरा रंग न आ जाए।
इसके बाद भीगा हुआ साबूदाना कड़ाही में डालें। साथ ही दरदरी पिसी मूंगफली और स्वादानुसार सेंधा नमक या सामान्य नमक भी मिला दें। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पलटे को बहुत ही हल्के हाथों से चलाएं। साबूदाने को बार-बार या जोर-जोर से हिलाने से दाने टूट सकते हैं और खिचड़ी चिपचिपी हो सकती है।
पकाने का समय और परोसने का तरीका
साबूदाने को धीमी से मध्यम आंच पर लगभग 3 से 4 मिनट तक ही पकाएं। जैसे ही दाने पारदर्शी दिखने लगें और नरम हो जाएं, तो समझ जाएं कि आपकी खिचड़ी बनकर तैयार हो चुकी है। अधिक पकाने से दाने रबड़ जैसे सख्त हो सकते हैं।
गैस बंद करने के बाद खिचड़ी के ऊपर आधा नींबू का रस निचोड़ें और कटा हुआ ताजा हरा धनिया डालें। इसे हल्के से मिला लें। आप चाहें तो इस गरमा-गरम खिली-खिली खिचड़ी को ताजे दही के साथ परोस सकते हैं, जिससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है। इन आसान नियमों का ध्यान रखकर आप घर पर ही रेस्टोरेंट और बाजार जैसी लाजवाब साबूदाना खिचड़ी बना सकते हैं।



















