पूर्णिया में पौधे खरीदने का सही तरीका, नर्सरी से लाने के बाद इन पांच बातों का रखें ध्यानमहिंद्रा थार, स्कॉर्पियो और एक्सयूवी 7एक्सओ की कीमतें फिर बढ़ेंगी, साल में चौथी बार झटका देने की तैयारीग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान नंबर वन, पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर और देश की नीतियों पर उठाए सवालछत्तीसगढ़ में दिल दहला देने वाला तिहरा हत्याकांड: रायपुर में पति ने पत्नी और दो बच्चों को उतारा मौत के घाट, खुद को भी किया घायलग्रहों के न्यायधीश शनि वर्ष 2027 में चलेंगे टेढ़ी चाल, तीन राशियों की साढ़ेसाती में होगा बड़ा उलटफेरमीरा राजपूत का नो रूल्स फूड फॉर्मूला क्यों बटोर रहा है सुर्खियां, जानिए बच्चों की डाइट पर उनकी सोचसाल 2026 में कब है जितिया व्रत, जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्तअप्पे पैन में बनाएं बिना मैदे के क्रिस्पी समोसे, जानें कम तेल में तैयार होने वाली हेल्दी रेसिपीसिंहस्थ के विकास के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर चलाई गैंती, उज्जैन के लोगों के सामने पेश की मिसालदिल्ली से गया जाने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन शेड्यूल, जानिए महाबोधि और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस का समय
मीरा राजपूत का नो रूल्स फूड फॉर्मूला क्यों बटोर रहा है सुर्खियां, जानिए बच्चों की डाइट पर उनकी सोचखानपान
27 सित॰ 2026, 3:07 pm (1 मिनट पहले)· 0

मीरा राजपूत का नो रूल्स फूड फॉर्मूला क्यों बटोर रहा है सुर्खियां, जानिए बच्चों की डाइट पर उनकी सोच

मीरा राजपूत का बच्चों की डाइट को लेकर सख्त नियमों से दूर रहने का तरीका पेरेंटिंग के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उनका मानना है कि खान-पान में रोक-टोक की बजाय संतुलन और समझ पर जोर होना चाहिए।

बच्चों को रोजाना सही और पौष्टिक खाना खिलाना किसी भी माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं होता है। कई बार बच्चे हरी सब्जियां देखकर मुंह बनाने लगते हैं या फिर अपनी मनपसंद चीजों के लिए जिद करने पर अड़ जाते हैं। ऐसे में घरों में खाने-पीने को लेकर कई तरह के नियम और पाबंदियां बनाना बहुत आम बात है। लेकिन मीरा राजपूत का बच्चों की डाइट को लेकर दृष्टिकोण इन पारंपरिक तरीकों से काफी अलग माना जाता है। वह खाने को लेकर जरूरत से ज्यादा रोक-टोक करने के बजाय बच्चों को उनकी अपनी पसंद और भूख को समझने की पूरी आजादी देने की वकालत करती हैं।

कड़े नियमों के बजाय संतुलन पर जोर

उनके इस पेरेंटिंग अंदाज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें सख्त पाबंदियों की जगह संतुलन और समझदारी का मेल दिखाई देता है। यही मुख्य वजह है कि उनका ‘कोई नियम नहीं’ वाला यह फूड फॉर्मूला इन दिनों पेरेंटिंग से जुड़े मामलों पर चर्चा करने वालों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सोशल मीडिया पर मीरा राजपूत अक्सर अपनी लाइफस्टाइल और बच्चों की परवरिश से जुड़े खट्टे-मीठे अनुभव साझा करती रहती हैं। बच्चों के खान-पान की आदतों को लेकर उनका यह सोचना है कि हर मनपसंद चीज को पूरी तरह प्रतिबंधित कर देना कतई जरूरी नहीं होता है। उनके मुताबिक अगर बच्चे कभी अपनी पसंद का कुछ खाना चाहते हैं, तो उसे लेकर बहुत ज्यादा सख्ती दिखाने के बजाय पूरे दिन के खान-पान के पैटर्न पर ध्यान देना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

ये भी पढ़ें

अनावश्यक पाबंदियों से बचने की जरूरत

यह तरीका उन तमाम माता-पिता के लिए बेहद दिलचस्प साबित हो सकता है जो बच्चों को हेल्दी डाइट देने के चक्कर में उनकी हर पसंदीदा चीज पर तुरंत रोक लगा देते हैं। अक्सर कई घरों में चॉकलेट, पिज्जा, बर्गर या किसी भी मीठी चीज को लेकर ऐसा तनावपूर्ण माहौल बन जाता है कि बच्चा उस चीज को पाने के लिए और ज्यादा जिद करने लगता है। मीरा के फूड अप्रोच में इस तरह की अनावश्यक सख्ती से पूरी तरह बचने की बात साफ नजर आती है। हालांकि, ‘कोई नियम नहीं’ का मतलब यह कतई नहीं है कि बच्चों को बिना किसी सीमा के कुछ भी खाने की पूरी छूट दे दी जाए। इसका सीधा सा मतलब यह है कि ज्यादा सख्त फूड रूल्स से बचा जाए और भोजन को लेकर बच्चों के मन में किसी तरह का डर या अपराधबोध पैदा न होने दिया जाए।

डाइट में फ्लेक्सिबिलिटी का महत्व

उदाहरण के तौर पर, अगर कोई बच्चा किसी दिन अपनी पसंद की कोई खास डिश मांगता है, तो उसे पूरी तरह गलत ठहराने के बजाय उसके बाकी के भोजन में पौष्टिक चीजों को आसानी से शामिल किया जा सकता है। अगर घर के सामान्य और दैनिक भोजन में दाल, हरी सब्जियां, ताजे फल, अनाज, दूध और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थ नियमित रूप से शामिल हैं, तो कभी-कभार पसंद की कोई चीज खा लेना कोई बड़ी बात नहीं है। बच्चों के लिए खाने की मेज पर माहौल भी बहुत मायने रखता है, और अगर हर निवाले के साथ माता-पिता की डांट या दबाव जुड़ा हो, तो वही खाना बच्चों के लिए एक बड़े मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। इसके बजाय माता-पिता बहुत शांत तरीके से बच्चों के सामने अलग-अलग विकल्प रख सकते हैं और उन्हें अपनी रफ्तार से नए स्वादों को आजमाने का पूरा मौका दे सकते हैं.

विशेषज्ञों की सलाह क्यों है जरूरी

हालांकि, हर बच्चे के लिए एक जैसा फूड फॉर्मूला अपनाना जरूरी नहीं होता है क्योंकि हर बच्चे की उम्र, उसकी शारीरिक गतिविधि, पसंद और पोषण संबंधी जरूरतें बिल्कुल अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी सेलिब्रिटी के फूड रूटीन को आंख मूंदकर ज्यों का त्यों अपना लेना समझदारी नहीं है। छोटे बच्चों के मामले में अगर भोजन से जुड़ी कोई विशेष जरूरत हो या बच्चा बहुत कम मात्रा में खाना खाता हो, तो माता-पिता को किसी अनुभवी बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य आहार विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेनी चाहिए। खासकर किसी खास खाद्य पदार्थ से एलर्जी होने पर, विकास से जुड़ी कोई चिंता होने पर या डॉक्टर की बताई गई खास डाइट होने पर सामान्य फूड रूल्स से हटकर सलाह की आवश्यकता पड़ सकती है। घर में खाने को लेकर एक संतुलित और सकारात्मक रवैया अपनाने का सबसे आसान तरीका यह है कि रोज की थाली में पौष्टिक विकल्प मौजूद हों और बच्चे को उनमें से अपनी पसंद चुनने की थोड़ी छूट मिले, साथ ही माता-पिता खुद भी अलग-अलग चीजें खाकर एक बेहतरीन उदाहरण पेश करें।

सवाल-जवाब

मीरा राजपूत के फूड फॉर्मूला की मुख्य खासियत क्या है?
इस फॉर्मूले में बच्चों के खाने पर सख्त पाबंदियों की बजाय संतुलन, समझ और लचीलेपन पर जोर दिया जाता है।
क्या 'कोई नियम नहीं' का मतलब बच्चों को कुछ भी खिलाना है?
नहीं, इसका मतलब ज्यादा सख्त फूड रूल्स से बचना और खाने को लेकर अनावश्यक डर या अपराधबोध पैदा न करना है।
बच्चों की डाइट में जंक फूड या पसंदीदा चीजों को कैसे मैनेज करें?
कभी-कभार पसंद की चीज खाने देने के साथ-साथ बाकी भोजन में दाल, सब्जियां और फल जैसे पौष्टिक विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।
क्या सेलिब्रिटी फूड रूटीन को ज्यों का त्यों अपनाना चाहिए?
नहीं, हर बच्चे की उम्र, पसंद और पोषण संबंधी जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए सेलिब्रिटी रूटीन को आँख मूंदकर नहीं अपनाना चाहिए।
विशेषज्ञ की सलाह कब लेनी चाहिए?
छोटे बच्चों के मामले में विशेष जरूरत होने, कम खाने की समस्या या किसी खाद्य एलर्जी की स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp