भारतीय त्योहारी सीजन में साल 2025 के दौरान कुल व्यापार 6.05 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसमें सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। दिवाली से पहले के 30 से 35 दिनों की अवधि में ऑनलाइन ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू यानी जीएमवी 1.15 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई। सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाले डी2सी ब्रांड्स के मामले में 2025 में दिवाली जीएमवी में सालाना आधार पर 47 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया था, जबकि 2026 में इसके 35 से 40 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान जताया गया है। खरीदारी का यह रुझान अब पहले की तुलना में काफी जल्दी देखने को मिल रहा है। अगस्त महीने तक नवरात्रि से पहले के डी2सी ऑर्डर वॉल्यूम में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी थी। ऐसी स्थिति में केवल सतही बातों के बजाय उन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है जो सीधे तौर पर कंपनी के लाभ और हानि यानी पीएंडएल को प्रभावित करते हैं, जिनमें कैटेगरी के अनुसार उपभोक्ता व्यवहार, डिस्काउंट देने के तरीके, चेकआउट प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स और सेल खत्म होने के बाद के कदम शामिल हैं।
प्रमुख सबक और बाजार की हकीकत
त्योहारी सीजन की तैयारी को लेकर कुछ बुनियादी तथ्य बेहद स्पष्ट हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर ही ब्रांड्स अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं
- अगस्त से ही तैयारी शुरू करें: त्योहारी मांग अब पहले ही आ रही है, इसलिए समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
- फैशन में औसत ऑर्डर मूल्य की भारी छलांग: फैशन और परिधान में एओवी यानी एवरेज ऑर्डर वैल्यू सबसे तेजी से बढ़ती है, लेकिन इसके साथ रिटर्न की जटिलता भी सबसे अधिक होती है।
- ब्यूटी उत्पादों में बार-बार खरीदारी: ब्यूटी और पर्सनल केयर में बार-बार खरीदारी की दर सबसे मजबूत रहती है, जबकि इसमें रिटर्न सबसे कम देखने को मिलते हैं।
- सेल के बाद ग्राहकों को जोड़े रखना जरूरी: केवल त्योहार के दौरान बिक्री करना काफी नहीं है, बल्कि सेल खत्म होने के बाद के 60 दिन वास्तविक मुनाफे के लिहाज से सबसे अहम होते हैं।
ऑपरेशनल सबक: जब त्योहारी ट्रैफिक से बड़े प्लेटफॉर्म भी लड़खड़ाए
त्योहारी सीजन में वेबसाइट और ऐप पर आने वाला ट्रैफिक सिस्टम की छिपी हुई कमजोरियों को उजागर कर देता है। जब भारी छूट के दौरान कोई साइट क्रैश होती है, तो विज्ञापनों पर खर्च हुआ पूरा बजट बर्बाद हो जाता है और ग्राहक तुरंत प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म का रुख कर लेते हैं। भारी-भरकम इंजीनियरिंग टीमों और अरबों डॉलर के मूल्यांकन वाली दिग्गज कंपनियों को भी ऐसे बड़े लॉन्च के दौरान गंभीर तकनीकी गड़बड़ियों का सामना करना पड़ा है
- फ्लिपकार्ट: बिग बिलियन डे (2014): अपने बुनियादी ढांचे को 5,000 सर्वरों के साथ 20 गुना तक बढ़ाने के बावजूद, एक साथ आए भारी ट्रैफिक ने डेटाबेस के रास्तों को पूरी तरह जाम कर दिया। इसके चलते रियल-टाइम इन्वेंट्री सिस्टम फेल हो गया, क्षमता से ज्यादा ऑर्डर बुक हो गए और चेकआउट के दौरान डिस्काउंट अपने आप हटकर एमआरपी में बदल गए। इस गंभीर विफलता के बाद संस्थापकों को पूरे देश से सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी।
- मिंत्रा: ऐप एपीआई विफलता (2016): मोबाइल ट्रैफिक में आए अप्रत्याशित उछाल ने कार्ट को पेमेंट प्रोसेसर से जोड़ने वाले मुख्य एपीआई गेटवे को ठप कर दिया। सेल के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा खरीदारी वाले समय में चेकआउट स्क्रीन पूरी तरह फ्रीज हो गई और बार-बार एरर कोड दिखाने लगी।
- कॉस्टको: 16 घंटे का ब्लैकआउट (2019): थैंक्सगिविंग के भारी ट्रैफिक ने पुराने और पारंपरिक बुनियादी ढांचे को पूरी तरह चरमरा दिया, जिससे प्लेटफॉर्म 16 घंटे तक पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान प्रोडक्ट पेज खुलने बंद हो गए, कार्ट लॉक हो गए और कंपनी को अनुमानित 11 मिलियन डॉलर के ग्रॉस ट्रांजैक्शन का सीधा नुकसान उठाना पड़ा।
विभिन्न डी2सी श्रेणियों का त्योहारी प्रदर्शन
त्योहारी सीजन के दौरान हर उत्पाद श्रेणी का व्यवहार एक जैसा नहीं होता। किसी एक श्रेणी के लिए तैयार की गई डिस्काउंट और प्रमोशन रणनीति दूसरी श्रेणी में शायद ही कभी कारगर साबित होती है। अक्टूबर से लेकर 5 जनवरी तक के त्योहारी समय में विभिन्न भारतीय डी2सी और ई-कॉमर्स श्रेणियों के आधार पर औसत ऑर्डर मूल्य यानी एओवी, रिपीट परचेज रेट और रिटर्न-टू-ओरिजिन यानी आरटीओ में कुछ इस प्रकार का बदलाव देखने को मिलता है
फैशन और परिधान: तीनों प्रमुख श्रेणियों में से फैशन में ऑर्डर वैल्यू में सबसे तीखा उछाल देखने को मिलता है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह प्रीमियम एथनिक वियर, सर्दियों के कपड़े और पूरे सेट वाले आउटफिट्स की भारी खरीदारी होती है। हालांकि, इसी श्रेणी में रिटर्न से जुड़ी सबसे ज्यादा परेशानियां भी आती हैं। इसका मुख्य कारण कैश ऑन डिलीवरी यानी सीओडी ऑर्डर, कपड़ों के साइज में गड़बड़ी और ग्राहकों द्वारा एक ही सामान को तुलना करने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म से मंगाना होता है। नए ग्राहकों को आकर्षित करने के अभियानों के कारण सेल के दौरान रिपीट परचेज में गिरावट आती है, लेकिन स्टॉक क्लीयरेंस शुरू होते ही इसमें फिर से सुधार देखा जाता है।
ब्यूटी और पर्सनल केयर: इस श्रेणी में विकास ऑर्डर के आकार के बजाय खरीदारी की बारंबारता यानी फ्रीक्वेंसी पर अधिक निर्भर करता है। इसमें मुख्य भूमिका गिफ्टिंग किट्स और बंडल किए गए रूटीन सेट्स की होती है। ब्यूटी उत्पादों में रिटर्न की दर तीनों श्रेणियों में सबसे कम रहती है, क्योंकि स्वच्छता और हाइजीन नीतियों के तहत ज्यादातर उत्पाद नॉन-रिटर्नलेबल होते हैं और कपड़ों की तरह साइज का कोई झंझट नहीं होता। सबसे महत्वपूर्ण पहलू त्योहार के बाद देखने को मिलता है, जब सेल के दौरान जुड़े नए ग्राहक किसी भी अन्य श्रेणी की तुलना में सबसे ज्यादा दोबारा खरीदारी करते हैं।
होम डेकोर और फर्निशिंग: दिवाली से पहले घरों के नवीनीकरण और मेहमानों के स्वागत की तैयारियों के कारण इस श्रेणी में ऑर्डर वैल्यू में सबसे बड़ा उतार-चढ़ाव देखा जाता है। बड़े और भारी सामानों के परिवहन में देरी होने और दरवाजे पर ग्राहकों द्वारा सीओडी पार्सल लेने से इनकार करने के चलते रिटर्न की संख्या बढ़ जाती है। उत्पादों के लंबे समय तक चलने और बार-बार बदलने की जरूरत न होने के कारण पूरे साल रिपीट परचेज की दर सीमित रहती है, जिसे किसी भी मार्केटिंग अभियान से तुरंत नहीं बदला जा सकता।
प्राइसिंग और डिस्काउंटिंग के नियम
छूट देने की रणनीति बनाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, जिससे बिक्री के साथ मार्जिन भी सुरक्षित रहे
क्या करें:
- फ्लैट प्रतिशत छूट देने के बजाय बंडलिंग और कार्ट वैल्यू के आधार पर लेयर्ड डिस्काउंट का इस्तेमाल करें। फ्लैट डिस्काउंट देने से कम कीमत वाले एसकेयू पर मार्जिन बहुत तेजी से खत्म हो जाता है।
- सीजन शुरू होने से पहले ही प्रत्येक एसकेयू के लिए डिस्काउंट का न्यूनतम स्तर यानी फ्लोर तय कर लें, न कि सेल चलने के दौरान अचानक बदलाव करें।
क्या न करें:
- सबसे ज्यादा बिकने वाले एसकेयू और धीमी गति से बिकने वाले उत्पादों पर एक जैसी छूट न दें। ऐसा करने से बार-बार आने वाले ग्राहकों में हमेशा सेल का इंतजार करने की आदत बन जाती है।
- आरटीओ को देखे बिना केवल औसत ऑर्डर मूल्य में हुई बढ़ोतरी पर ध्यान न दें। फैशन में एओवी बढ़ने के बावजूद रिटर्न के भारी खर्च से अंततः मार्जिन का बड़ा नुकसान होता है।
चेकआउट और पेमेंट सिस्टम की सावधानियां
त्योहारी सीजन की बिक्री में सबसे ज्यादा पेमेंट विफलताएं चेकआउट के दौरान ही होती हैं, और यहीं पर राजस्व का सबसे बड़ा नुकसान अक्सर पकड़ में नहीं आ पाता।
क्या करें:
- चेकआउट बुनियादी ढांचे की लोड टेस्टिंग औसत ट्रैफिक के आधार पर नहीं, बल्कि अपेक्षित पीक ट्रैफिक से कम से कम तीन गुना अधिक क्षमता के लिए करें।
- बाय नाउ पे लेटर यानी बीएनपीएल और ईएमआई के विकल्पों को प्रमुखता से दिखाएं। त्योहारी सीजन में, खासकर होम डेकोर जैसी महंगी श्रेणियों के लिए इन पेमेंट विकल्पों के उपयोग में भारी उछाल आता है।
- पेमेंट फेलियर रेट और कार्ट एबंडनमेंट रेट को अलग-अलग ट्रैक करें, क्योंकि ये दोनों पूरी तरह अलग-अलग तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं की ओर इशारा करते हैं।
क्या न करें:
- यह मानकर न चलें कि सीओडी से प्रीपेड की तरफ बदलाव हर श्रेणी में समान रूप से हो रहा है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में फैशन के लिए ग्राहक आज भी काफी हद तक सीओडी पर निर्भर हैं, और यही कारण है कि इस श्रेणी में आरटीओ सबसे ज्यादा रहता है।
- बिक्री के सबसे व्यस्त दिनों से ठीक पहले कोई नया पेमेंट इंटीग्रेशन न जोड़ें। किसी भी नए पेमेंट विकल्प का परीक्षण व्यस्त दिनों से कम से कम दो हफ्ते पहले पूरा कर लें।
इन्वेंट्री, आरटीओ और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन
लॉजिस्टिक्स और स्टॉक प्रबंधन को सही दिशा देने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है
- क्या करें: वार्षिक बिक्री मात्रा के बजाय त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शीर्ष 20 प्रतिशत एसकेयू के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार रखें।
- क्या करें: फैशन श्रेणी के लिए चेकआउट प्रक्रिया में साइज गाइड और फिटिंग कन्फर्मेशन के चरण जोड़ें, क्योंकि साइज की गलतियां ही आरटीओ में 28 से 38 प्रतिशत या उससे अधिक उछाल का सीधा कारण बनती हैं।
- क्या करें: महंगी होम डेकोर वस्तुओं के लिए सीओडी वेरिफिकेशन के चरण अनिवार्य करें, क्योंकि पार्सल पहुंचने में देरी और दरवाजे पर सामान लेने से इनकार ही त्योहारी सीजन में इसके आरटीओ को बढ़ाता है।
- क्या न करें: त्योहारी सीजन में होने वाले आरटीओ को एक निश्चित और अपरिहार्य लागत न मानें। हर श्रेणी में रिटर्न का कारण अलग होता है और सही उपायों से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
- क्या न करें: व्यस्त दिनों में डिलीवरी पार्टनर के साथ समन्वय में कर्मचारियों की कमी न होने दें, क्योंकि डिलीवरी में देरी सीधे तौर पर आरटीओ के जोखिम को बढ़ा देती है।
सेल के बाद रिटर्न के झटके से नेट मार्जिन की सुरक्षा
रिकॉर्ड तोड़ बिक्री का कोई मतलब नहीं रह जाता यदि आपका एक-तिहाई जीएमवी कुछ ही हफ्तों में रद्द ऑर्डर या बिना डिलीवरी वाले माल के रूप में वापस आ जाए। अपने वास्तविक मुनाफे को बचाने के लिए बिक्री के तुरंत बाद सक्रिय प्रबंधन बेहद आवश्यक है।
सीओडी रिटर्न पर नियंत्रण
छूट के दौरान बिना सोचे-समझे खरीदारी करने का चलन बहुत बढ़ जाता है, जिससे बिना वेरिफिकेशन वाले सीओडी ऑर्डर्स को दरवाजे पर ठुकराए जाने की दर काफी ऊंची हो जाती है
- गोदाम से सामान निकालने से पहले एक तय कार्ट वैल्यू से ऊपर के सभी सीओडी ऑर्डर्स पर अनिवार्य व्हाट्सएप ओटीपी वेरिफिकेशन लागू करें।
- ऑर्डर कन्फर्मेशन स्क्रीन पर 3% से 5% तक की अतिरिक्त तत्काल छूट का प्रोत्साहन दें, जिससे ग्राहक सामान भेजे जाने से पहले सीओडी ऑर्डर को प्रीपेड चेकआउट में बदल लें।
ऑर्डर ट्रैकिंग सपोर्ट का ऑटोमेशन
सेल के बाद डिलीवरी विंडो के दौरान ग्राहक सेवा से जुड़े सवालों यानी 'मेरा ऑर्डर कहां है' की संख्या में 3 से 5 गुना की भारी वृद्धि हो जाती है। सपोर्ट मिलने में देरी होने पर ग्राहक अक्सर ऑर्डर रद्द कर देते हैं और सोशल मीडिया पर ब्रांड की छवि खराब होती है
- चैट ऐप में ऑटोमेटेड सेल्फ-सर्व ट्रैकिंग विजेट्स शामिल करें ताकि ग्राहक बिना किसी कर्मचारी से बात किए तुरंत लाइव कूरियर स्टेटस देख सकें।
- शिपिंग के प्रमुख पड़ावों जैसे कि डिस्पैच होने, डिलीवरी के लिए निकलने और डिलीवरी में देरी होने पर एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिए खुद आगे बढ़कर अपडेट भेजें।
कैश रिफंड के बदले स्टोर क्रेडिट को बढ़ावा
हर कैश रिफंड सेल के दौरान हासिल किए गए जीएमवी को तुरंत खत्म कर देता है और कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव डालता है
- अपने सेल्फ-सर्व रिटर्न पोर्टल को इस तरह सेट करें कि वह समाधान के प्राथमिक विकल्प के रूप में स्टोर क्रेडिट या उत्पाद एक्सचेंज को ही सबसे पहले दिखाए।
- ग्राहकों को अपने प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए रिटर्न पर स्टोर क्रेडिट चुनने पर 10% अतिरिक्त टॉप-अप बोनस का ऑफर दें, जिससे उनकी पूंजी ब्रांड के भीतर ही बनी रहे।
मार्जिन को खत्म करने वाली 5 खामोश गलतियां
- एसकेयू स्तर के बजाय पूरे कैटलॉग पर एक समान छूट देना, जिससे उन उत्पादों पर भी मार्जिन खत्म हो जाता है जिन्हें किसी प्रचार की जरूरत ही नहीं थी।
- चेकआउट सिस्टम की लोड क्षमता का गलत अनुमान लगाना, जिससे सबसे अधिक खरीदारी के समय पेमेंट फेल होने लगते हैं।
- कैंपेन के रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट यानी आरओआई में आरटीओ को शामिल न करना, जिससे मुनाफे का आंकड़ा वास्तविक स्थिति से काफी बढ़ा-चढ़ाकर दिखने लगता है।
- सेल के बाद के 60 दिनों के लिए कोई योजना न बनाना, जिससे ब्यूटी जैसी श्रेणियों में बार-बार खरीदारी के सबसे बड़े अवसर का फायदा नहीं मिल पाता।
- फैशन, ब्यूटी और होम डेकोर के बिल्कुल अलग व्यवहार के बावजूद सभी श्रेणियों पर एओवी, आरटीओ या डिस्काउंट का एक ही फॉर्मूला लागू कर देना।
त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद के कदम
ज्यादातर रणनीतियां सेल समाप्त होते ही रुक जाती हैं, जबकि वास्तविक अवसर त्योहार के बाद के 60 दिनों में छिपा होता है। यह अवधि किसी भी मजबूत रिटेंशन रणनीति की नींव है। इस समय ब्यूटी उत्पादों की रिपीट परचेज दर बढ़कर 32 से 42 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, जो इस पूरे आंकड़े में किसी भी श्रेणी के लिए सबसे अधिक है। इस समय का उपयोग निम्न कार्यों के लिए करें
- त्योहारी खरीदारों के लिए विशेष रूप से तैयार व्हाट्सएप और ईमेल संदेश भेजें, जिनमें ब्यूटी उत्पादों के लिए दोबारा स्टॉक भरने और फैशन के लिए स्टॉक क्लीयरेंस पर ध्यान दिया जाए।
- रिफंड और आरटीओ का एक निश्चित समय सीमा के भीतर तेजी से निपटारा करें ताकि लौटाया गया सामान अगली बिक्री विंडो से पहले दोबारा इन्वेंट्री में शामिल हो सके।
- केवल शुरुआती जीएमवी देखने के बजाय डिस्काउंट, आरटीओ और पेमेंट गेटवे की लागत घटाने के बाद प्रत्येक श्रेणी के वास्तविक नेट मार्जिन की गहन समीक्षा करें।



















