अहमदाबाद के स्टर्लिंग अस्पताल में चिकित्सा और इंसानियत की एक अद्भुत मिसाल सामने आई है। दो अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाली महिलाओं ने धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक सीमाओं से परे जाकर एक-दूसरे के पतियों को अपनी किडनियां दान कर दीं। इस परस्पर किडनी ट्रांसप्लांट की मदद से दोनों पुरुषों की जान बचा ली गई है। चिकित्सा विज्ञान और सामाजिक सद्भाव के दृष्टिकोण से इस अनोखे मामले ने अंगदान के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगाई है।
मेडिकल बाधा और स्वैप ट्रांसप्लांट का विकल्प
अहमदाबाद निवासी 45 वर्षीय हिंदू पुरुष और उदयपुर निवासी 42 वर्षीय मुस्लिम पुरुष लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। दोनों ही मरीज क्रोनिक किडनी डिजीज और एंड-स्टेज रीनल डिजीज से पीड़ित थे। डॉक्टरों के अनुसार दोनों मरीजों के जीवन को सुरक्षित करने का एकमात्र विकल्प तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट ही था। शुरुआत में दोनों ही परिवारों के निकट संबंधी अंगदान के लिए आगे आए, लेकिन शुरुआती मेडिकल जांच में उनके अंग मरीजों के साथ मेल नहीं खा सके। परिजनों के मेडिकली अनुकूल न पाए जाने के कारण ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में बड़ी रुकावट आ गई थी।
इस जटिल स्थिति को देखते हुए अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दोनों परिवारों को किडनी स्वैप प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया। जब डॉक्टरों ने दोनों महिलाओं की मेडिकल जांच और विस्तृत स्कैन रिपोर्ट का विश्लेषण किया, तो पाया कि हिंदू महिला की किडनी मुस्लिम मरीज के लिए और मुस्लिम महिला की किडनी हिंदू मरीज के लिए पूरी तरह से मेडिकली फिट थी।
काउंसलिंग और 9 जुलाई को सफल सर्जरी
किडनी स्वैप की संभावना स्पष्ट होने के बाद अस्पताल के मेडिकल स्टाफ और ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर राहिल शाह ने दोनों परिवारों की विस्तृत काउंसलिंग की। प्रक्रिया की सफलता और कानूनी पहलुओं को समझने के बाद दोनों परिवारों ने अपनी पूर्ण सहमति दे दी। इसके बाद 9 जुलाई को विशेषज्ञों की टीम ने एक साथ दोनों ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कीं।
यह पूरी जटिल सर्जरी विशेषज्ञों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम द्वारा संपन्न की गई, जिसकी अगुवाई डॉ. सोनल दलाल, डॉ.वेदों डॉ. जावेद वकील, डॉ. केतन शुक्ला, डॉ. हिमांशु पटेल और डॉ. भविन महेतलिया ने की। स्टर्लिंग अस्पताल के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट दर्ज किया गया है।
स्वास्थ्य में सुधार और 18 जुलाई को डिस्चार्ज
ऑपरेशन के बाद दोनों मरीजों की स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया। डॉक्टरों ने बताया कि डिस्चार्ज के समय मरीजों का सीरम क्रिएटिनिन स्तर क्रमशः 1.26 mg/dL और 1.30 mg/dL दर्ज किया गया, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रत्यारोपित किडनियां सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं। सर्जरी के बाद आवश्यक रिकवरी अवधि पूरी होने पर 18 जुलाई को सभी चारों व्यक्तियों को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल प्रशासन के क्लिनिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुधीर मोराड़ ने इस उपलब्धि पर अपनी बात रखते हुए कहा, "जब अपना डोनर मेडिकली फिट न हो, तब किडनी स्वैप मरीजों को दूसरा मौका देता है।" उन्होंने आगे कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को बेहद खास बनाने वाली बात दोनों परिवारों द्वारा दिखाया गया आपसी विश्वास, करुणा और सद्भाव का भाव है। यह घटना यह संदेश देती है कि जब जान बचाने की बात आती है, तो मानवीय संवेदनाएं हर सामाजिक और धार्मिक दीवार से ऊपर सिद्ध होती हैं।



















