संतान के सुखद भविष्य और विवाह का सपना हर माता-पिता संजोते हैं, परंतु कई बार भीषण आर्थिक तंगी के चलते परिवार चाहकर भी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पाते। पैसों के अभाव में किसी लाचार मां या पिता का हौसला न टूटे, इसी नेक भावना को ध्येय बनाकर हरियाणा के अंबाला कैंट स्थित बाल कृष्ण क्लब लगातार जरूरतमंद कन्याओं का सहारा बन रहा है। संस्था हर वर्ष दो दिनों का एक अनूठा धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान आयोजित करती है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन मां भगवती का विशाल जागरण आयोजित होता है, जिसमें सैकड़ों भक्त रातभर भजनों और आराधना में लीन रहते हैं। इसके ठीक अगले दिन पांच जरूरतमंद युवतियों का विवाह वैदिक हिंदू परंपराओं के अनुसार सामूहिक रूप से धूमधाम के साथ संपन्न कराया जाता है। इस वर्ष क्लब ने अपने 24वें विशाल मां भगवती जागरण और सामूहिक विवाह समारोह का सफल आयोजन किया, जहां पांच नए युगलों ने पवित्र अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर अपने दांपत्य जीवन का आरंभ किया।
एक असहाय मां की पुकार से शुरू हुआ था सामाजिक बदलाव
इस सराहनीय परंपरा की नींव आज से लगभग 6 से 7 वर्ष पूर्व पड़ी थी। उस समय क्लब की ओर से आयोजित मां भगवती जागरण के दौरान एक निर्धन महिला अपने आंसुओं के साथ संस्था के पदाधिकारियों के पास पहुंची थी। उस महिला की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय थी और उसके पास अपनी बेटी का विवाह संपन्न कराने का कोई साधन शेष नहीं बचा था। मां की विवशता और पीड़ा को देखकर क्लब के सेवादारों ने उस बेटी के विवाह का संपूर्ण खर्च और दायित्व अपने कंधों पर उठा लिया। इस एक सुखद अनुभव ने पूरी संस्था की सोच को एक नई दिशा दी। संस्था के सदस्यों को लगा कि ईश्वर की आराधना और धार्मिक आयोजनों की सार्थकता तभी पूरी होती है जब समाज के सबसे कमजोर वर्ग के आंसू पोंछे जाएं। उसी दिन से क्लब ने हर साल निर्धन परिवारों की पांच बेटियों की शादी करवाने का अटल संकल्प लिया, जो आज एक अटूट परंपरा बन चुका है।
सख्त जांच और चयन प्रक्रिया के बाद ही मिलती है सहायता
संस्था का स्पष्ट मानना है कि सामाजिक सहायता का वास्तविक लाभ केवल उसी परिवार तक पहुंचना चाहिए जिसे इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है। इसके लिए क्लब के सदस्य विवाह से पूर्व वर और वधू दोनों ही पक्षों की पारिवारिक व वित्तीय पृष्ठभूमि की गहनता से पड़ताल करते हैं। जब पूरी तरह पुष्टि हो जाती है कि परिवार सचमुच विवाह का खर्च उठाने में असमर्थ है, तभी उन पांच कन्याओं का चयन इस सामूहिक आयोजन के लिए किया जाता है। निष्पक्ष जांच के चलते अब तक कई गरीब परिवारों की बेटियां बिना किसी कर्ज या चिंता के सम्मानपूर्वक अपने नए घरों को विदा हो चुकी हैं।
वैदिक रीति-रिवाज, भव्य बारात स्वागत और सामुदायिक सहभागिता
इस सामूहिक विवाह में किसी भी प्रकार की औपचारिकता की कमी नहीं रखी जाती, बल्कि हर रस्म को एक निजी पारिवारिक विवाह की तरह निभाया जाता है। जब दूल्हे के परिजन बारात लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते हैं, तो क्लब सदस्य कन्या पक्ष की ओर से आगे बढ़कर उनका भव्य स्वागत और अगवानी करते हैं। इसके बाद दोनों पक्षों की पारंपरिक मिलनी, मंच पर जयमाला और फिर पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सात फेरों की रस्में पूरी करवाई जाती हैं। समारोह में पधारे सभी बारातियों, रिश्तेदारों और अतिथियों के लिए भोजन और जलपान का उत्तम प्रबंध रहता है। इस आयोजन में अंबाला कैंट के पुलिस क्वार्टर के निवासियों और आसपास के पूरे इलाके के लोग बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। इस बार के आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें भाग लेने के लिए सुदूर ऑस्ट्रेलिया से भी लोग पहुंचे, जिससे इस स्थानीय पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रह रहे भारतीयों का भी भरपूर स्नेह और सहयोग मिला।
नई गृहस्थी बसाने के लिए भेंट किया गया संपूर्ण घरेलू सामान
नवविवाहित जोड़ों को विदा करते समय संस्था ने केवल रस्में पूरी करने तक अपने दायित्व को सीमित नहीं रखा, बल्कि बेटियों को अपनी नई जिंदगी की शुरुआत में किसी अभाव का सामना न करना पड़े, इसका भी पूरा ध्यान रखा। संस्था की ओर से प्रत्येक वधू को घर-गृहस्थी का सारा जरूरी सामान उपहार स्वरूप दिया गया। भेंट किए गए इस घरेलू सामान में मुख्य रूप से फ्रिज, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन, डबल बेड, अलमारी, सोफा, प्रेस, पांच नए सूट, कंबल तथा गले का एक सुंदर चांदी का सेट शामिल रहा। इस प्रकार की संपूर्ण सहायता मिलने से बेटियों के माता-पिता बिना किसी मानसिक या आर्थिक दबाव के अपनी लाडलियों को खुशी-खुशी विदा कर सके।



















