राजस्थान के जोधपुर में हाल ही में सामने आई एक दर्दनाक घटना ने हर किसी को सन्न कर दिया है। शहर के पांचबत्ती चौराहे के पास विशालकाय जंगली मधुमक्खियों के एक विशाल झुंड ने अचानक राहगीरों पर धावा बोल दिया, जिसकी चपेट में आकर एक व्यक्ति की जान चली गई और दो दर्जन के करीब लोग जख्मी हो गए। आमतौर पर लोग मधुमक्खियों को सिर्फ शहद देने वाले छोटे कीटों के रूप में देखते हैं, लेकिन जब जंगली मधुमक्खियों की सबसे आक्रामक प्रजाति भड़कती है, तो उनका सामूहिक वार सीधे तौर पर जानलेवा साबित होता है।
जोधपुर के पांचबत्ती चौराहे पर मची थी भयंकर अफरा-तफरी
यह गंभीर हादसा जोधपुर के एयरपोर्ट रोड स्थित पांचबत्ती चौराहे के समीप हुआ। पोलो ग्राउंड के बाहर और टिड्डी दल नियंत्रक कार्यालय के पास उस समय अचानक अफरातफरी फैल गई, जब हवा में गूंजती तेज भिनभिनाहट के साथ मधुमक्खियों का एक विशाल झुंड सड़क पर उतर आया। यह हमला इतना व्यापक था कि देखते ही देखते सड़क पर चल रहे आम लोग चीख-पुकार मचाने लगे।
एक ही दिन के भीतर इस आक्रामक झुंड ने करीब 15 से 20 लोगों को बुरी तरह डंक मारकर घायल कर दिया। दहशत का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि अगली सुबह भी 5 से 7 राहगीर इनके डंक का शिकार बने। इसी घातक हमले में शरीर पर अत्यधिक डंक लगने की वजह से एक व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। हमले के खौफ का आलम यह था कि सड़क से गुजर रहे कुछ ट्रैक्टर चालक अपनी जान बचाने के लिए अपने वाहन बीच रास्ते में ही छोड़कर भाग निकले। जो लोग कारों या बंद वाहनों के भीतर सवार थे, वे तो सुरक्षित बच गए, लेकिन खुले में चल रहे पैदल राहगीरों और दोपहिया सवारों पर इन मक्खियों ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया। पास में स्थित आईजी कार्यालय के परिसर में मौजूद कर्मचारियों और आगंतुकों के बीच भी काफी देर तक दहशत बनी रही।
सुबह साढ़े सात बजे पहुंचा रेस्क्यू दल, हटाए गए तीन विशाल छत्ते
घटना की गंभीरता को भांपते हुए वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू विशेषज्ञ टीआर शर्मा और दिनेश कुमावत सुबह करीब 7:30 बजे घटनास्थल पर पहुंच गए। जब बचाव दल वहां पहुंचा, तब भी आक्रामक मधुमक्खियां आसपास से गुजरने वाले लोगों पर लगातार झपट रही थीं। इलाके को सुरक्षित करने के लिए रेस्क्यू टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाते हुए वहां मौजूद 3 बेहद खतरनाक छत्तों को सुरक्षित तरीके से हटा दिया, जिसके बाद जाकर इलाके में स्थिति सामान्य हो सकी।
असल में क्या है स्थानीय भाषा में बोली जाने वाली घोड़ा मक्खी?
स्थानीय स्तर पर लोग जिस कीट को घोड़ा मक्खी या घोड़ा मधुमक्खी कहते हैं, वह असल में कोई मक्खी नहीं बल्कि विशालकाय जंगली मधुमक्खी यानी रॉक बी है। विज्ञान की भाषा में इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम एपिस डोरसाटा (Apis dorsata) है। यह घरों में पाली जाने वाली या सामान्य छत्तों में दिखने वाली घरेलू मधुमक्खी की तुलना में शारीरिक आकार में काफी बड़ी और भारी होती है।
इसकी शारीरिक बनावट बेहद विशिष्ट होती है। इसका पूरा शरीर गहरे काले और पीले-भूरे रंग के मिश्रण से ढका होता है। इसके पंख अत्यधिक मजबूत, लंबे और पूरी तरह पारदर्शी होते हैं, जो इसे तेज गति से लंबी दूरी तक उड़ने में मदद करते हैं। अपने विशाल आकार और भारी वजन की वजह से यह जमीन के पास नहीं रहती, बल्कि अक्सर बहुत ऊंचे पेड़ों की मजबूत शाखाओं, विशाल प्राकृतिक चट्टानों और शहरों की गगनचुंबी इमारतों की बाहरी दीवारों या छतों पर खुले छत्ते तैयार करती है। इन छत्तों की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त होती है और छत्ते के बाहरी हिस्से पर हर समय पहरेदार मधुमक्खियां तैनात रहती हैं।
खतरा भांपते ही कैसे शुरू होता है सामूहिक हमला?
एपिस डोरसाटा प्रजाति की सबसे भयानक खासियत उनका संगठित और आक्रामक सामूहिक हमला है। छत्ते के आसपास से अगर कोई व्यक्ति गुजरता है या किसी भी तरह की कंपन अथवा हलचल महसूस होती है, तो छत्ते की निगरानी कर रहीं पहरेदार मधुमक्खियां फौरन सतर्क हो जाती हैं। खतरे की शुरुआती चेतावनी के रूप में छत्ते से बहुत तेज भिनभिनाहट की आवाज आने लगती है।
इसके तुरंत बाद कुछ खोजकर्ता मधुमक्खियां खतरे की दिशा में तेजी से उड़कर जांच करने आती हैं। यदि उस जगह से खतरा नहीं हटता या हलचल जारी रहती है, तो रासायनिक संकेतों के जरिए छत्ते से सैकड़ों की संख्या में मधुमक्खियां एक साथ निकलकर हमला बोल देती हैं। यह हमला पूरी तरह सुनियोजित होता है और वे मुख्य रूप से इंसान के सिर, चेहरे, गर्दन और शरीर के अन्य खुले अंगों को अपना निशाना बनाती हैं।
शरीर पर डंक लगने के बाद क्या होता है असर?
इस जंगली मधुमक्खी का विष अत्यधिक तीव्र होता है। यदि किसी व्यक्ति को एक या दो डंक लगते हैं, तो डंक वाली जगह पर असहनीय तेज दर्द, भीषण जलन और भारी सूजन पैदा हो जाती है। लेकिन जब सैकड़ों मधुमक्खियां एक साथ शरीर पर वार करती हैं, तो शरीर के भीतर भारी मात्रा में जहर प्रवेश कर जाता है।
बड़ी तादाद में डंक लगने की स्थिति में पीड़ित को लगातार उल्टियां होने लगती हैं, सिर चकराने लगता है और पूरे शरीर में गंभीर टॉक्सिसिटी यानी विषाक्त प्रभाव फैल जाता है। इसके अलावा जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक प्रणाली मधुमक्खी के जहर के प्रति अतिसंवेदनशील या एलर्जिक होती है, उनके लिए इसका एक अकेला डंक भी एनाफिलेक्टिक शॉक की वजह बनकर जानलेवा साबित हो सकता है।
मधुमक्खियों के झुंड से घिर जाएं तो क्या करें और किन गलतियों से बचें?
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि कभी भी किसी व्यक्ति का सामना रॉक बी के झुंड से हो जाए, तो घबराहट में गलत कदम उठाने के बजाय समझदारी से अपनी सुरक्षा करनी चाहिए
- तुरंत किसी बंद जगह की शरण लें: छत्ते के इलाके में खड़े होकर हाथ-पैर हिलाने या मक्खियों को भगाने की कोशिश बिल्कुल न करें। जितनी जल्दी हो सके उस जगह से दूर भागें और किसी बंद कमरे, दुकान या चार पहिया वाहन के अंदर घुसकर दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लें।
- सिर और चेहरे की सुरक्षा करें: भागते समय सबसे पहले अपने सिर, चेहरे, आंखों और गर्दन को किसी मोटे कपड़े, जैकेट, तौलिए या चादर से पूरी तरह ढंक लें, क्योंकि ये मधुमक्खियां सबसे पहले चेहरे और सिर पर ही वार करती हैं।
- पानी में कूदने की भारी गलती न करें: कई लोग झुंड से बचने के लिए तालाब, नहर या पानी के टैंक में कूद जाते हैं। यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि मधुमक्खियां सतह के ठीक ऊपर उड़ती रहती हैं और जैसे ही व्यक्ति सांस लेने के लिए सिर बाहर निकालता है, वे दोबारा भीषण हमला कर देती हैं।
- चिमटी से निकालें डंक: सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद त्वचा में फंसे डंकों को हाथ से दबाने के बजाय चिमटी की मदद से धीरे-धीरे बाहर निकालें ताकि जहर की थैली फटकर शरीर में और विष न फैलाए।
- बिना देर किए अस्पताल पहुंचें: यदि पीड़ित को कई डंक लगे हैं, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, चक्कर आ रहे हैं या चेहरे और गले में सूजन बढ़ रही है, तो घरेलू नुस्खों में समय गंवाए बिना तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाएं।





















