फरीदाबाद में आजकल हर छोटे-बड़े काम के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। हालांकि, बिना सोचे-समझे या जल्दबाजी में किसी भी अनजान व्यक्ति को इन दस्तावेजों की फोटोकॉपी देना भारी पड़ सकता है। कई लोग आंख मूंदकर अपने कागजात दूसरों के हाथों में सौंप देते हैं और बाद में उनके गलत इस्तेमाल को लेकर परेशान होते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद आवश्यक है कि दस्तावेज सौंपने से पहले किन बातों का खयाल रखना चाहिए, उसकी कॉपी पर क्या लिखना चाहिए और संबंधित संस्था या व्यक्ति से क्या पूछताछ करनी चाहिए। इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको उन्हीं बेहद जरूरी बातों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं, जिनका पालन करके आप अपने निजी दस्तावेजों के दुरुपयोग के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
किसको दें दस्तावेज और क्या पूछें
फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी का कहना है कि आधार या पैन कार्ड जैसे अहम दस्तावेज साझा करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कागजात केवल उसी इंसान के हाथ में जाएं जिस पर आपको पूरा भरोसा हो। इसके साथ ही आपको यह भी पता होना चाहिए कि आप किस खास मकसद के लिए उसे अपने पहचान पत्र की कॉपी दे रहे हैं। यदि कोई भी व्यक्ति आपसे आपके आधार कार्ड या पैन कार्ड की फोटोकॉपी मांगता है, तो उसे सौंपने से पहले इस बात की तसल्ली जरूर कर लें कि आखिर उसे इस दस्तावेज की क्या आवश्यकता आन पड़ी है।
अनजान लोगों को दस्तावेज देने के खतरे
मोहन तिवारी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी गैर-भरोसेमंद या अनजान व्यक्ति को अपने आधार कार्ड या पैन कार्ड की कॉपी बिल्कुल भी नहीं देनी चाहिए। इन अहम पहचान पत्रों का दुरुपयोग कई तरह के अवैध कामों में किया जा सकता है। कई मामलों में इन दस्तावेजों की मदद से फर्जी कागजात और पहचान पत्र तक तैयार कर लिए जाते हैं। यही वजह है कि किसी भी अनजान शख्स के कहने पर अपनी निजी जानकारी या दस्तावेज साझा करने से पूरी तरह बचना चाहिए। मोहन तिवारी का यह भी कहना है कि केवल दस्तावेज किसी के पास पहुंच जाने मात्र से ही साइबर ठगी हो गई है, यह सीधे तौर पर कहना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन जब किसी शातिर बदमाश के हाथ आपकी गोपनीय जानकारी लग जाती है, तो वह आपको फोन करके तमाम तरह के मनगढ़ंत झूठ बोल सकता है। वह खुद को किसी बैंक का कर्मचारी या किसी अन्य बड़ी संस्था का नुमाइंदा बताकर आपसे और अधिक जानकारी ऐंठने की कोशिश कर सकता है। इसलिए किसी भी फोन कॉल के झांसे में आकर अपनी निजी या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी कभी भी साझा नहीं करनी चाहिए।
साइबर धोखाधड़ी होने पर सबूत कैसे संभालें
मोहन तिवारी के अनुसार, यदि आपके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हो जाता है या आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो अपनी शिकायत को मजबूत बनाने के लिए आपके पास जितने भी वास्तविक साक्ष्य मौजूद हों, उन्हें संभालकर रखना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, आपने दस्तावेज की जो कॉपी भेजी है उसे सुरक्षित रखें, इसके अलावा व्हाट्सएप चैट, ईमेल, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, संदिग्ध व्यक्ति या संस्था की पूरी जानकारी, कोई भी संदिग्ध वेबसाइट या सोशल मीडिया लिंक, बैंक या यूपीआई लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड, ओटीपी या किसी भी संदिग्ध संदेश से जुड़ी जानकारी को सहेज कर रखें। इसके अलावा घटना की सटीक तारीख और समय, मोबाइल या कंप्यूटर के स्क्रीनशॉट और अन्य तमाम डिजिटल सबूतों को भी संभालकर रखना बहुत जरूरी है। सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराते समय घटना से जुड़े सभी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और वीडियो जैसी तमाम जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध कराने की पूरी सुविधा दी गई है, जिसका इस्तेमाल करके तुरंत मदद ली जा सकती है।



















