पंजाब के कृषि संकट और लंबित नीतिगत मांगों को लेकर राज्य भर के किसान एक बार फिर गोलबंद हो चुके हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 32 किसान संगठनों ने सात दिनों के 24 घंटे चलने वाले पक्का मोर्चा का आह्वान किया है। इस घोषणा के बाद से पंजाब के विभिन्न जिलों से किसानों का जत्था अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ चंडीगढ़ और मोहाली की सीमाओं पर पहुंचने लगा है। मंगलवार से शुरू हुआ यह आंदोलन 7 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा। बुधवार को विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन भी प्रदर्शन स्थल पर किसानों की आमद बनी रही, जिससे सीमावर्ती इलाकों में हलचल तेज हो गई है।
चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पक्का मोर्चा और मौके के हालात
आंदोलन का मुख्य केंद्र चंडीगढ़ और मोहाली बॉर्डर पर स्थित 47/48 लाइट प्वाइंट तथा जगतपुरा के आसपास का क्षेत्र बना हुआ है। किसानों ने सीमा पर सड़क के एक बड़े हिस्से पर अपना स्थायी मंच और धरना स्थल स्थापित कर लिया है। सुरक्षा और जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सड़क के दूसरे हिस्से को यातायात की आवाजाही के लिए खुला रखा है। प्रदर्शन स्थल पर किसानों ने लंबे समय तक रुकने की पूरी तैयारी की है। पंजाब के ग्रामीण अंचलों से आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पर्याप्त मात्रा में राशन, रसोई गैस सिलेंडर, बिस्तर और अन्य दैनिक आवश्यक सामग्रियां मौजूद हैं। भीषण गर्मी से बचाव के लिए धरना स्थल पर बड़े-बड़े कूलर लगाए गए हैं और किसानों व आगंतुकों के लिए सड़क पर ही लंगर तैयार किया जा रहा है। किसान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सांकेतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि चौबीसों घंटे चलने वाला एक दृढ़ आंदोलन है।
किसान संगठनों की प्रमुख मांगें और नीतिगत मुद्दे
इस सात दिवसीय आंदोलन के जरिए किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष अपनी मांगों की एक विस्तृत सूची रखी है। किसानों की सबसे प्राथमिक मांग फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त, किसानों और खेत मजदूरों के पूर्ण कर्जमाफी की मांग उठाई जा रही है। किसान नेता पंजाब के अंतरराज्यीय पानी से जुड़े पुराने समझौतों की दोबारा समीक्षा करने पर जोर दे रहे हैं।
स्थानीय नीतिगत मोर्चों पर, किसान संगठन पंजाब सरकार द्वारा लाई गई लैंड पूलिंग पॉलिसी को तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, केंद्र और राज्य स्तर पर प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी बिल और सीड बिल का कड़ा विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि वर्ष 2020 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के समापन के समय सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा, गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का समय पर और उचित मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करने के मुद्दे भी इस पक्के मोर्चे के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं।
यातायात व्यवस्था पर असर और रूट डायवर्जन
सीमाओं पर किसानों के विशाल जमावड़े के कारण चंडीगढ़ और मोहाली की यातायात व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। 47/48 लाइट प्वाइंट, जगतपुरा और इनसे जुड़ी संपर्क सड़कों पर वाहनों की गति काफी धीमी हो गई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आईआईएसईआर (IISER) से जगतपुरा की ओर आने वाले मार्ग के एक हिस्से को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और ट्रैफिक को दूसरे मार्ग पर मोड़ा गया है। पुलिस प्रशासन ने कई संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेड्स लगाकर रूट डायवर्जन लागू किए हैं। मोहाली से चंडीगढ़ की तरफ आने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। रोजाना मोहाली और चंडीगढ़ के बीच आवागमन करने वाले नौकरीपेशा लोगों तथा शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी गई है, क्योंकि 7 सितंबर तक इस पूरे इलाके में ट्रैफिक का दबाव बना रहने की पूरी संभावना है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और आंदोलन का भविष्य
किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चंडीगढ़ और मोहाली दोनों क्षेत्रों के पुलिस विभागों ने सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है। रणनीतिक और संवेदनशील चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और यातायात को सुचारू रूप से नियंत्रित किया जा सके। किसान नेताओं का कहना है कि उनका यह संघर्ष सरकार की किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ है और आम जनता को परेशान करना उनका उद्देश्य नहीं है। उन्होंने दोहराया कि वे सरकार के साथ किसी भी सकारात्मक बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। हालांकि, किसान नेताओं ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि सरकार वार्ता के जरिए उनकी मांगों का उचित समाधान नहीं निकालती है, तो 7 सितंबर के बाद इस पक्के मोर्चे को और अधिक विस्तार दिया जा सकता है।



















