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बरसात के मौसम में मुर्गियों को खतरनाक बीमारियों से कैसे बचाएं, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने बताए उपायस्वास्थ्य
9 सित॰ 2026, 12:29 am (49 दिन पहले)· 4

बरसात के मौसम में मुर्गियों को खतरनाक बीमारियों से कैसे बचाएं, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने बताए उपाय

मानसून के दौरान हवा में नमी और पोल्ट्री फार्म में सीलन बढ़ने से रानीखेत और कॉक्सीडियोसिस जैसी घातक बीमारियों का खतरा रहता है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ ने सूखा बिछावन, स्वच्छ जल और समय पर टीकाकरण के जरिए पक्षियों की सुरक्षा के तरीके बताए हैं।

गोंडा जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही पोल्ट्री फार्म मालिकों के समक्ष एक नई प्रशासनिक और स्वास्थ्य चुनौती खड़ी हो गई है। बरसात के इस मौसम में हवा के भीतर नमी का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे मुर्गियों के शेड में अत्यधिक सीलन और गंदगी पनपने लगती है। यदि इस दौरान पोल्ट्री संचालक थोड़ा सा भी ध्यान न दें तो मुर्गियों में कई संक्रामक और जानलेवा बीमारियां बेहद तेजी से फैल जाती हैं। इसका सीधा दुष्प्रभाव मुर्गियों के शारीरिक स्वास्थ्य, अंडे देने की क्षमता और वजन पर पड़ता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है।

बरसात में पनपने वाली मुख्य बीमारियां और उनके लक्षण

पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा ऋतु के दौरान पोल्ट्री फार्मों में जीवाणु और परजीवी बहुत तेजी से सक्रिय होते हैं। गोंडा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि इस मौसम में मुर्गियों के भीतर कॉक्सीडियोसिस, रानीखेत, ई-कोलाई, डायरिया और सीआरडी यानी क्रोनिक रेस्पिरेटरी डिजीज जैसी सांस संबंधी गंभीर बीमारियों के फैलने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। इन बीमारियों को शुरुआती स्तर पर पहचानना बेहद आवश्यक है।

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डॉ. राकेश कुमार तिवारी के मुताबिक जब मुर्गियां कॉक्सीडियोसिस बीमारी से ग्रस्त होती हैं, तो उनकी बीट में स्पष्ट रूप से खून दिखाई देने लगता है। इसके विपरीत जब फार्म में रानीखेत बीमारी का प्रकोप होता है, तो पक्षियों को सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस होती है और वे हरी तथा पतली बीट करने लगते हैं। इसके अलावा दूषित पानी पीने की वजह से मुर्गियों में डायरिया और ई-कोलाई का संक्रमण तेजी से बढ़ता है। इन लक्षणों के दिखते ही तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

बिछावन और वेंटिलेशन का सही प्रबंधन

पोल्ट्री फार्म के अंदर का वातावरण सूखा और स्वच्छ रखना बारिश के दिनों में सबसे प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए। शेड के फर्श पर बिछाया जाने वाला लकड़ी का बुरादा या धान का पुआल किसी भी स्थिति में नम या गीला नहीं होना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि बिछावन में थोड़ी भी सीलन या गीलापन नजर आए, तो उसे बिना किसी देरी के तुरंत बदल देना चाहिए। गीली बीट और नमी मिलकर हानिकारक बैक्टीरिया को जन्म देते हैं।

इसके अतिरिक्त पोल्ट्री शेड के भीतर हवा के सुचारू आवागमन यानी प्रॉपर वेंटिलेशन का होना अत्यंत आवश्यक है। शेड में पर्याप्त वेंटिलेशन रहने से उमस कम होती है और मुर्गियों की बीट से पैदा होने वाली अमोनिया तथा अन्य हानिकारक गैसें अंदर जमा नहीं हो पाती हैं। इससे मुर्गियों को सांस लेने के लिए एक स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक माहौल मिलता है, जिससे उनका तनाव भी कम होता है।

दाने और पानी की स्वच्छता का विशेष ध्यान

मानसून के मौसम में पानी और आहार का दूषित होना एक आम समस्या बन जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गियों को हमेशा पूरी तरह साफ और ताजा पानी ही पीने के लिए देना चाहिए। इसके साथ ही पानी के सभी बर्तनों और डिस्पेंसरों की रोजाना अच्छी तरह से सफाई की जानी चाहिए ताकि उनमें कीटाणु न पनप सकें।

मुर्गियों के दाने को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दाने की बोरियों को कभी भी सीधे पक्के या कच्चे फर्श पर सटाकर नहीं रखना चाहिए। जमीन की नमी बोरियों के भीतर प्रवेश कर दाने में सीलन पैदा कर देती है, जिससे उसमें फंगस और फफूंदी लगने का बड़ा खतरा उत्पन्न हो जाता है। फंगस युक्त दाना खाने से मुर्गियां बीमार पड़ सकती हैं। इसलिए दाने के स्टॉक को हमेशा लकड़ी के तख्तों या सूखी और हवादार जगह पर ही स्टोर करना चाहिए।

बीमार पक्षियों को अलग करने और टीकाकरण की रणनीति

संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए फार्म पर लगातार निगरानी रखना अनिवार्य है। यदि कोई मुर्गी सुस्त दिखाई दे, अपने पंख लटकाकर एक कोने में बैठी रहे या फिर पतली बीट कर रही हो, तो उसे तुरंत स्वस्थ मुर्गियों के झुंड से अलग कर देना चाहिए। आइसोलेशन की यह त्वरित प्रक्रिया संभावित संक्रमण को बाकी मुर्गियों तक फैलने से रोकने में सुरक्षा कवच का काम करती है।

उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने जोर देकर कहा कि बीमारी का हमला होने के बाद इलाज खोजने से कहीं बेहतर है कि पहले से ही बचाव के कड़े उपाय किए जाएं। किसानों को अपने पोल्ट्री फार्म में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार मुर्गियों का समय पर टीकाकरण जरूर करवाना चाहिए। यदि फार्म में किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण या बीमारी के संकेत दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर परामर्श लेना चाहिए। सूखा बिछावन, साफ पानी, सही वेंटिलेशन और टीकाकरण के समन्वय से बरसात में नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

बरसात के मौसम में मुर्गियों में कौन सी प्रमुख बीमारियां फैलने का खतरा रहता है?
बरसात में कॉक्सीडियोसिस, रानीखेत, ई-कोलाई, डायरिया और सीआरडी (सांस की बीमारी) जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।
मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस और रानीखेत बीमारी के क्या मुख्य लक्षण हैं?
कॉक्सीडियोसिस में मुर्गियों की बीट में खून दिखाई देता है, जबकि रानीखेत में उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है और वे हरी तथा पतली बीट करने लगती हैं।
पोल्ट्री फार्म के बिछावन (लिटर) का रख-रखाव कैसे करना चाहिए?
बिछावन में इस्तेमाल होने वाले बुरादे या पुआल को हमेशा सूखा रखना चाहिए और उसमें नमी आने पर उसे तुरंत बदल देना चाहिए।
बरसात में मुर्गियों के दाने की बोरियों को कैसे स्टोर करना चाहिए?
दाने की बोरियों को सीधे पक्के या कच्चे फर्श पर रखने से बचना चाहिए और उन्हें जमीन की नमी से बचाने के लिए सूखी तथा हवादार जगह पर रखना चाहिए।
यदि फार्म में कोई मुर्गी बीमार दिखाई दे तो क्या कदम उठाना चाहिए?
सुस्त दिखने वाली, पंख लटकाकर बैठी या पतली बीट करने वाली मुर्गी को तुरंत बाकी स्वस्थ मुर्गियों से अलग (आइसोलेट) कर देना चाहिए।
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