फरीदाबाद में दिवाली के पावन पर्व पर बच्चों को अत्यधिक मात्रा में मिठाइयां खिलाना उनके मौखिक स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। इसके अलावा उपहार स्वरूप मिलने वाले पैकेट वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक भी बच्चों के दांतों को मिठाइयों की तुलना में कहीं अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन चीजों के सेवन से दांतों में कैविटी पैदा होने के साथ-साथ उनकी बाहरी सुरक्षा परत भी कमजोर होकर खराब हो सकती है। यह महत्वपूर्ण चेतावनी फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के डेंटल डिपार्टमेंट की चाइल्ड डेंटल स्पेशलिस्ट डॉक्टर मेघा जैन ने दी है। उन्होंने एक खास बातचीत में इस बात पर प्रकाश डाला कि त्योहारों के इस उल्लासपूर्ण माहौल के बीच बच्चों के दांतों की सेहत का विशेष ख्याल रखना क्यों आवश्यक है और माता-पिता को किन जरूरी बातों पर गौर करना चाहिए।
त्योहार के दौरान कैविटी का बढ़ता जोखिम
डॉक्टर मेघा जैन के अनुसार दिवाली के सीजन में हर घर में तमाम तरह की मिठाइयां और चॉकलेट की भरमार रहती है। लोग एक-दूसरे को उपहार के तौर पर मिठाइयों के डिब्बे और चॉकलेट्स भेंट करते हैं, जिसकी वजह से बच्चे भी लगातार मीठा खाने लगते हैं। जब बच्चे अधिक मात्रा में शर्करायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो उनके मुंह और दांतों में मौजूद बैक्टीरिया उस शुगर के साथ प्रतिक्रिया करके एसिड का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया के कारण दांतों में कैविटी यानी कीड़ा लगने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। यहाँ केवल मिठाई की कुल मात्रा ही मायने नहीं रखती, बल्कि यह भी बेहद महत्वपूर्ण है कि बच्चा पूरे दिन में कितनी बार मीठा खा रहा है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में शुगर एक्सपोजर कहा जाता है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को बार-बार लगातार मीठा खाने को न दें। माता-पिता यह कर सकते हैं कि वे बच्चों को दोपहर या रात के मुख्य भोजन के बाद डेजर्ट के रूप में थोड़ी सी मिठाई खाने के लिए दे दें। इसके बाद यह अनिवार्य करें कि बच्चा अच्छी तरह से कुल्ला करे और नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करे।
पैकेज्ड जूस और कोल्ड ड्रिंक से दांतों की क्षति
डॉक्टर मेघा जैन का यह भी कहना है कि दिवाली के दिनों में गिफ्ट के रूप में मिलने वाले पैकेट वाले फ्रूट जूस, कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक और फ्लेवर्ड मिल्क भी बच्चों के दांतों की सेहत के लिए उतने ही खतरनाक हैं। ये पेय पदार्थ कई मामलों में मिठाइयों से भी ज्यादा नुकसानदायक साबित होते हैं। इन ड्रिंक्स में उच्च मात्रा में शुगर होने के साथ-साथ खतरनाक एसिड भी मौजूद होता है, जो सीधे तौर पर दांतों की बाहरी मजबूत परत यानी इनेमल को क्षति पहुंचाता है। इनेमल कमजोर होने से दांतों में कैविटी होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इन हानिकारक पैकेट बंद चीजों की बजाय माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को प्राकृतिक ताजे फल और अन्य सेहतमंद चीजें खाने के लिए प्रेरित करें ताकि उनका स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे।
दूध के दांतों की सुरक्षा को न करें नजरअंदाज
डॉक्टर मेघा जैन इस बात पर भी जोर देती हैं कि बच्चों के शुरुआती दूध के दांत उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं जितने कि बाद में आने वाले पक्के दांत। अक्सर कई माता-पिता यह मानकर निश्चिंत हो जाते हैं कि दूध के दांत तो कुछ समय बाद अपने आप टूटकर गिर ही जाएंगे, इसलिए उनकी विशेष देखभाल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, ऐसा सोचना बिल्कुल गलत और नुकसानदेह है। दूध के दांत बच्चों को ठीक से खाना चबाने और शब्दों का सही उच्चारण करने में सहायता प्रदान करते हैं। इसके अलावा, ये दूध के दांत भविष्य में आने वाले पक्के दांतों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करते हैं और उन्हें उचित स्थान पर निकलने में मदद करते हैं। डॉक्टर मेघा जैन समझाती हैं कि यदि कैविटी या किसी अन्य दंत समस्या के कारण दूध के दांत समय से पहले ही टूटने या गिरने लगें, तो पक्के दांतों को सही जगह पाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके परिणामस्वूप बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े निकल सकते हैं और उन्हें भविष्य में अपने दांतों को सीधा करवाने के लिए लंबे ऑर्थोडॉन्टिक ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के दूध के दांतों की भी नियमित और सही ढंग से देखभाल करें।



















