जौनपुर जिले के सरकारी अस्पतालों से जुड़ी एक तस्वीर स्वास्थ्य महकमे की पोल खोल रही है। एक तरफ मरीज दवा के लिए इधर उधर भटकते हैं, तो दूसरी तरफ विभाग के गोदाम में भारी मात्रा में दवाइयां बेतरतीब ढंग से पड़ी रहती हैं और वहीं एक्सपायर हो जाती हैं। इस मामले के सामने आने के बाद जिले के स्वास्थ्य तंत्र पर एक बार फिर उंगलियां उठने लगी हैं।
गोदाम में बर्बाद हो रहीं दवाएं, मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जो दवाइयां गरीब और जरूरतमंद मरीजों तक समय पर पहुंचनी चाहिए थीं, वे अस्पतालों की बजाय गोदाम में ही पड़ी रह गईं और वहीं खराब हो गईं। लोगों का कहना है कि सरकारी खजाने से खरीदी गई इन दवाइयों को न तो सही तरीके से भंडारित किया गया और न ही समय पर बांटा गया, जिसका खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ा जो पैसों की तंगी के चलते बाजार से महंगी दवा नहीं खरीद सकते। सवाल यह उठ रहा है कि अगर वितरण व्यवस्था दुरुस्त होती तो इतनी बड़ी तादाद में दवाएं बेकार नहीं जातीं, और इसकी जवाबदेही आखिर किस अधिकारी की बनती है। कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी दवा आपूर्ति में गड़बड़ी की शिकायतें उठती रही हैं लेकिन स्थायी समाधान कभी नहीं निकला।
सीएमओ बोले, वीडियो देखकर मिली जानकारी
जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सीएमओ डॉ. गंगाराम गौतम ने इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया कि यह मामला उनकी नजर में हाल ही में आया और इसकी जानकारी उन्हें एक वीडियो देखने के बाद मिली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस पूरे मामले की जांच बैठाई जाएगी और आगे से दवाइयों को व्यवस्थित तरीके से रखवाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
वेयरहाउस की जिम्मेदारी किसकी, अधिकारियों को थमाया जाएगा नोटिस
जब सीएमओ से पूछा गया कि गोदाम के रखरखाव की जवाबदेही आखिर किसकी बनती है, तो उन्होंने बताया कि स्टोर की देखरेख का जिम्मा एसीएमओ और चीफ फार्मासिस्ट के पास होता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों अधिकारियों से इस लापरवाही पर जवाब मांगा जाएगा और नोटिस जारी कर पूछा जाएगा कि आखिर दवाइयां गोदाम में पड़े पड़े एक्सपायर क्यों होती रहीं।
सीएचसी पीएचसी पर दवा की कमी नहीं, सीएमओ का दावा
जब यह सवाल किया गया कि एक ओर मरीज दवा को तरस रहे हैं और दूसरी ओर स्टॉक गोदाम में सड़ रहा है, तो इसका जवाब देते हुए सीएमओ ने इससे साफ इनकार किया। उनका तर्क था कि कई बार जो दवाइयां सप्लाई में आती हैं उनकी एक्सपायरी डेट पहले से ही नजदीक होती है, जिस वजह से कुछ खेप बिना इस्तेमाल हुए ही खराब हो जाती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिले के हर सीएचसी, पीएचसी और बाकी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयों की कोई कमी नहीं है और मरीजों को पर्याप्त मात्रा में दवा मिल रही है। हालांकि गोदाम से सामने आई तस्वीरें इस दावे पर सवालिया निशान लगाती हैं। अगर स्टॉक वाकई पर्याप्त था तो फिर वह गोदाम में एक्सपायर होने तक क्यों टिका रहा, आपूर्ति में देरी हुई या फिर निगरानी की पूरी व्यवस्था ही फेल हो गई, यह सवाल बरकरार है। यह मसला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं बल्कि सरकारी पैसे की बर्बादी और गरीब मरीजों के इलाज पाने के हक से भी जुड़ा हुआ है।
एक हफ्ते में कार्रवाई का दावा, जनता की निगाहें नतीजे पर
डॉ. गंगाराम गौतम ने अंत में कहा कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और अगले एक सप्ताह के भीतर इस पर ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी। अब जिले के लोगों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच पूरी होने के बाद वाकई दोषी अधिकारियों पर गाज गिरती है या फिर यह मामला भी पहले की तरह सिर्फ आश्वासनों में सिमट कर रह जाता है।


















